वॉशिंगटन: अमेरिकी अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता आयोग (USCIRF) ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत के अमेरिका दौरे को लेकर चिंता जताई है। आयोग ने अमेरिकी सरकार से भागवत का वीजा रद्द करने और भविष्य में उनके अमेरिका प्रवेश पर रोक लगाने पर विचार करने की अपील की है।
USCIRF ने लगाए गंभीर आरोप
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USCIRF ने 26 अगस्त 2026 को जारी बयान में आरोप लगाया कि RSS से जुड़े संगठनों के सदस्यों पर भारत में ईसाइयों, दलितों, मुसलमानों और सिखों समेत धार्मिक अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा में शामिल होने के आरोप हैं। आयोग ने भारत में धार्मिक स्वतंत्रता की स्थिति को लेकर भी गंभीर चिंता जताई है।
USCIRF चेयरपर्सन आसिफ महमूद ने कहा कि आयोग अमेरिकी सरकार से RSS सदस्यों और धार्मिक स्वतंत्रता के कथित उल्लंघनों में शामिल भारतीय अधिकारियों के खिलाफ Targeted Sanctions पर विचार करने का आग्रह करता है। इसमें मोहन भागवत के वीजा को रद्द करने और भविष्य में प्रवेश से अयोग्य घोषित करने की मांग भी शामिल है।

भारत को ‘Country of Particular Concern’ बनाने की सिफारिश
USCIRF ने अपनी 2026 Annual Report में अमेरिकी विदेश विभाग से भारत को “Country of Particular Concern (CPC)” घोषित करने की सिफारिश की है। आयोग का कहना है कि भारत में धार्मिक स्वतंत्रता की स्थिति 2025 के दौरान और खराब हुई तथा धार्मिक अल्पसंख्यकों को प्रभावित करने वाली नीतियों और कानूनों को लेकर चिंताएं बनी रहीं।
आयोग ने पहले भी भारत को CPC घोषित करने की सिफारिश की है। हालांकि, USCIRF की सिफारिश अपने आप में अमेरिकी सरकार का अंतिम निर्णय नहीं होती; CPC designation का फैसला अमेरिकी विदेश विभाग के स्तर पर होता है।
भारत-अमेरिका संबंधों पर क्या असर?
USCIRF के बयान से एक बार फिर भारत में धार्मिक स्वतंत्रता, RSS, हिंदुत्व और अल्पसंख्यक अधिकारों को लेकर अंतरराष्ट्रीय बहस तेज हो सकती है। दूसरी ओर, इस मुद्दे पर भारत और अमेरिका के बीच राजनीतिक और कूटनीतिक प्रतिक्रिया भी महत्वपूर्ण होगी।
आपकी राय क्या है?
क्या USCIRF की मोहन भागवत के वीजा को लेकर मांग भारत के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप मानी जानी चाहिए, या धार्मिक स्वतंत्रता से जुड़े आरोपों पर अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं को सवाल उठाने का अधिकार है?
आप इस पूरे विवाद को कैसे देखते हैं? अपनी राय कमेंट में जरूर बताएं।



