इंदौर पुलिस ने नाबालिगों से दोपहिया वाहन चोरी कराने वाले गिरोह को पकड़ने में सफलता हासिल की है। नाबालिगों से वाहन चोरी कराकर उन्हें औने-पौने दामों में बेचने का मामला सामने आया है।
गिरोह का पर्दाफाश
इंदौर पुलिस ने नाबालिगों से वाहन चोरी कराने वाले इस गिरोह के चार सदस्यों को गिरफ्तार किया है। पुलिस की जांच में यह खुलासा हुआ कि ये आरोपी नाबालिगों का इस्तेमाल कर दोपहिया वाहनों की चोरी करवाते थे।
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गिरोह के सदस्यों ने अपनी सुरक्षा के लिए नाबालिगों को अपराध में धकेल दिया था। पुलिस ने इनके पास से 11 चोरी के दोपहिया वाहन भी बरामद किए हैं।

कम दामों पर बिक्री
चुराए गए वाहनों को गिरोह द्वारा बाजार में ₹5,000 से ₹10,000 की बेहद कम कीमत पर बेच दिया जाता था। इस सस्ते सौदे की वजह से ये वाहन आसानी से बिक जाते थे।
गिरफ्तार किए गए आरोपियों ने बताया कि वे इस पैसे का इस्तेमाल अपने नशे की जरूरतों को पूरा करने के लिए करते थे।
नाबालिगों को लुभाने के तरीके
आरोपी नाबालिगों को पैसे, नशे का सामान, महंगे कपड़े और मस्ती का लालच देकर उन्हें इस गैरकानूनी काम में शामिल करते थे। यह तरीका गिरोह के लिए लाभदायक साबित होता था, लेकिन नाबालिगों के भविष्य के लिए खतरनाक था।
चोरी के वाहनों का उपयोग
गिरोह चोरी की गाड़ियों की नंबर प्लेट बदलकर फर्जी नंबर या स्टीकर लगा देता था। इस तरीके से वे पुलिस की निगाहों से बचने में सफल हो जाते थे।
इससे वाहनों की पहचान करना मुश्किल हो जाता था, जिससे उनके पकड़े जाने की संभावना कम हो जाती थी।
आगे की जांच
पुलिस अब इस गिरोह से जुड़े अन्य संपर्कों की जांच कर रही है। साथ ही, सस्ते दामों में चोरी के वाहन खरीदने वाले लोगों की पहचान करने का प्रयास किया जा रहा है।
इस मामले में गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ जारी है, जिससे आगे की कार्रवाई में मदद मिल सकती है।
आम जनता पर असर
इस तरह के अपराधों से समाज में सुरक्षा का माहौल बिगड़ता है। लोगों की मेहनत की कमाई से खरीदे गए वाहनों की चोरी होना चिंता का विषय है।
इसलिए, पुलिस की इस कार्रवाई से आम जनता को राहत मिली है, और यह संदेश जाता है कि अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।



