महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) ने सिप्ला के पुणे स्थित C&F वेयरहाउस का दवा बिक्री लाइसेंस रद्द कर दिया है। ‘रिएक्टिन प्लस’ दवा की पैकेजिंग पर अनधिकृत ‘एनाल्जेसिक और एंटीपायरेटिक’ लेखन के कारण यह कदम उठाया गया।
अनधिकृत प्रचार के कारण लाइसेंस रद्द
सिप्ला फार्मा एंड लाइफ साइंसेज लिमिटेड के पुणे स्थित वाडकी वेयरहाउस में अनधिकृत विज्ञापन के चलते दवा बिक्री लाइसेंस रद्द कर दिया गया। FDA के अनुसार, दवा की पैकेजिंग पर भ्रामक जानकारी लोगों को बिना डॉक्टर की सलाह के दवा लेने के लिए प्रेरित कर सकती है। यह जानकारी मरीजों को गलतफहमी में डाल सकती है और उनके स्वास्थ्य के लिए खतरा बन सकती है। इसलिए, FDA ने यह कठोर कदम उठाया है।
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स्टॉक जब्ती और भंडारण में खामियां
FDA ने ₹11.19 लाख की ‘रिएक्टिन प्लस’ दवाओं का स्टॉक जब्त किया। जांच में पाया गया कि दवाएं फर्श पर रखी गई थीं और स्टॉक प्रबंधन में गंभीर अनियमितताएं थीं। एक्सपायर्ड दवाओं का प्रबंधन भी असंतोषजनक था। इससे दवाओं की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है और उपभोक्ताओं के लिए स्वास्थ्य संबंधी जोखिम पैदा हो सकता है।
मार्केट रिकॉल निर्देशों का उल्लंघन
FDA ने इस दवा को बाजार से वापस लेने का निर्देश दिया था, लेकिन कंपनी ने पूरी तरह से पालन नहीं किया। इस उल्लंघन के कारण लाइसेंस रद्द करने का फैसला लिया गया। मार्केट रिकॉल का पालन न करना जनता के स्वास्थ्य के लिए खतरा बन सकता है।
कंपनी का पक्ष और कानूनी स्थिति
सिप्ला ने इस कार्रवाई का विरोध किया है और मामला अदालत में विचाराधीन है। कंपनी का कहना है कि वे सभी कानूनी प्रावधानों का पालन कर रहे हैं। उनका दावा है कि उन्होंने सभी आवश्यक मानकों का पालन किया है और यह निर्णय अनुचित है।

FDA की सख्त कार्रवाई
महाराष्ट्र FDA कमिश्नर तुकाराम मुंढे के नेतृत्व में यह कड़ा कदम उठाया गया है। उन्होंने कहा कि जनस्वास्थ्य सुरक्षा के लिए दवा नियमों का सख्ती से पालन करना आवश्यक है। यह कार्रवाई दिखाती है कि नियामक संस्थाएं जनता की सुरक्षा के प्रति कितनी गंभीर हैं।
आम आदमी पर असर
इस कार्रवाई से दवा बाजार में सुरक्षा और गुणवत्ता को लेकर जागरूकता बढ़ेगी। आम जनता को यह सुनिश्चित करना होगा कि वे डॉक्टर की सलाह के बिना दवाओं का सेवन न करें। यह घटना उपभोक्ताओं को दवाओं के बारे में अधिक सतर्क रहने के लिए प्रेरित करेगी।
आगे की राह
आगे बढ़ते हुए, सिप्ला को यह सुनिश्चित करना होगा कि वे सभी नियामक आवश्यकताओं का पालन करें। कंपनी को अपने प्रोडक्ट्स की गुणवत्ता में सुधार लाने के लिए ठोस कदम उठाने होंगे। साथ ही, FDA की ओर से भी यह सुनिश्चित किया जाएगा कि अन्य कंपनियां भी नियमों का पालन करें।



