भारत ने रूस से कच्चा तेल आयात करते हुए नया ऐतिहासिक रिकॉर्ड दर्ज किया है। दरअसल जुलाई 2026 में देश की कुल तेल खरीद में रूसी तेल की हिस्सेदारी 50 से 55 फीसदी के पार पहुंच गई। इसके साथ ही भारत ने वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच अपनी ऊर्जा जरूरतों को सुरक्षित किया है।
जुलाई 2026 में रूस से कच्चा तेल आयात का नया शिखर
सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर (CREA) की रिपोर्ट ने इन आंकड़ों की पुष्टि की है। इसके मुताबिक भारत ने जुलाई में 5.5 अरब यूरो का रूसी जीवाश्म ईंधन खरीदा। वहीं जून के 4.5 अरब यूरो के मुकाबले मात्रा के आधार पर 2.1 फीसदी की बढ़त दर्ज हुई।
नतीजतन भारत अब चीन के बाद रूसी ऊर्जा का दुनिया में दूसरा सबसे बड़ा खरीदार बन चुका है। फिलहाल कुल आयात में 87 फीसदी हिस्सा केवल कच्चे तेल का रहा है।

चार वर्षों में रूस से कच्चा तेल आयात का बदला गणित
गौरतलब है कि फरवरी 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध से पहले स्थिति बेहद अलग थी। उस समय भारत के कुल तेल आयात में रूस की हिस्सेदारी महज 2 फीसदी से भी कम थी। उस दौर में भारत रोजाना लगभग 1 लाख बैरल तेल रूस से खरीदता था।
हालांकि 2026 में यह आंकड़ा बढ़कर 28 लाख बैरल प्रतिदिन (bpd) के स्तर पर पहुंच गया। इसलिए यह बदलाव भारतीय ऊर्जा नीति के बड़े रणनीतिक बदलाव को दर्शाता है।
सऊदी अरब और यूएई को पीछे छोड़ शीर्ष पर बना रूस
केपलर (Kpler) के शिपमेंट आंकड़ों के अनुसार रूस भारतीय बाजार का सबसे बड़ा सप्लायर बना हुआ है। इस सूची में संयुक्त अरब अमीरात (UAE) 6.11 लाख बैरल प्रतिदिन के साथ दूसरे स्थान पर है।
इसके अलावा सऊदी अरब रोजाना लगभग 3.85 लाख बैरल की आपूर्ति के साथ तीसरे स्थान पर रहा। भारत ने पश्चिम एशियाई निर्भरता को संतुलित करते हुए यह बढ़त बनाई है।
- रूस: लगभग 28 लाख बैरल प्रतिदिन (कुल आपूर्ति का 50% से अधिक)
- संयुक्त अरब अमीरात (UAE): लगभग 6.11 लाख बैरल प्रतिदिन
- सऊदी अरब: लगभग 3.85 लाख बैरल प्रतिदिन

वाडिनार रिफाइनरी से रूस को भेजा गया रिफाइंड ईंधन
इस बीच दोनों देशों के बीच ऊर्जा कारोबार में एक अनूठा उलट व्यापार भी देखने को मिला। दरअसल यूक्रेनी ड्रोन हमलों के कारण रूसी तेल शोधन संयंत्रों को भारी क्षति पहुंची थी।
इसके बाद अगस्त 2026 में भारत ने नयारा एनर्जी की वाडिनार रिफाइनरी से रूस को ईंधन भेजा। इसके तहत लगभग 10 लाख बैरल यानी 60,000 मीट्रिक टन से अधिक पेट्रोल रूस को निर्यात किया गया।
पश्चिमी दबाव और प्रतिबंधों के बीच ऊर्जा संतुलन की रणनीति
दरअसल अमेरिकी सीनेट में रूसी तेल खरीदारों पर 100 फीसदी तक टैरिफ लगाने के प्रस्ताव पेश हुए थे। इसके बावजूद भारत ने अपने घरेलू आर्थिक हितों को पूरी प्राथमिकता दी।
बहरहाल होर्मुज जलडमरूमध्य में आपूर्ति बाधाओं के बीच रियायती दरों पर हुई यह खरीद काफी मददगार साबित हुई। नतीजतन देश में पेट्रोल-डीजल की कीमतों और महंगाई को नियंत्रित रखने में बड़ी राहत मिली है।



