इंदौर में दूध की सप्लाई रोकने की चेतावनी देकर किसानों ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। दरअसल किसान शोषण विरोधी मंच के बैनर तले दुग्ध उत्पादकों ने अपनी मांगों को लेकर मोर्चा खोल दिया है। इसके बाद किसान प्रतिनिधियों ने इंदौर कलेक्टर और संभागायुक्त कार्यालय पहुंचकर मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा।
खरीद मूल्य 65 रुपये करने की मांग पर अड़े दुग्ध उत्पादक
इस बीच किसानों ने साफ कर दिया है कि वे अपनी मांग पूरी होने तक पीछे नहीं हटेंगे। किसान नेता दिलीप सिंह पंवार, महेंद्र सिंह और लाखन सिंह ने खरीद दर 65 रुपये प्रति लीटर करने की मांग रखी है।
👉 यह भी पढ़ें:
- मध्य प्रदेश में 15 अक्टूबर से आंधी-बारिश का अलर्ट, किसानों और लोगों को सतर्क रहने की सलाह
- एमपी शराब घोटाले में कांग्रेस का बड़ा हमला, 2.75 करोड़ की एफडीआर और रिश्वत पर सवाल
- MP में 2026 के फायर एंड इमरजेंसी नियम लागू, संपत्ति कर में 2% फायर टैक्स देना होगा
- मध्य प्रदेश में आयुष्मान घोटाला, 71 अस्पतालों के 12 करोड़ के क्लेम जांच के दायरे में
- एमपी का 234 करोड़ का लग्जरी स्टेट प्लेन जल्द होगा लॉन्च, खास वॉयस कंट्रोल केबिन सहित
- एमपी के पूर्व मंत्री डॉ. ढाल सिंह बिसेन बने उत्तराखंड के नए राज्यपाल
दरअसल किसानों का कहना है कि पशु आहार, भूसा और मजदूरी की लागत काफी बढ़ गई है। वर्तमान में प्रति लीटर दूध उत्पादन पर 60 से 65 रुपये का खर्च आ रहा है। इसके विपरीत गांवों में किसानों को केवल 52 से 55 रुपये प्रति लीटर ही मिल पा रहे हैं।

मांगें न मानने पर इंदौर में दूध की सप्लाई रोकने का फैसला
गौरतलब है कि सांवेर के धरमपुरी और बायपास स्थित झालरिया में करीब 500 किसानों की बड़ी बैठक आयोजित हुई। इस बैठक में दुग्ध उत्पादकों ने आंदोलन की आगामी रणनीति पर विस्तृत चर्चा की।
नतीजतन किसानों ने निर्णय लिया कि यदि खरीद मूल्य नहीं बढ़ाया गया, तो वे आपूर्ति बंद कर देंगे। इसलिए ग्रामीण क्षेत्रों से शहर आने वाले दूध और सब्जियों के वाहनों को भी रोकने की रूपरेखा तैयार की गई है।
दूध व्यापारियों और विक्रेता संघ का पक्ष
वहीं दूसरी तरफ दूध व्यापारियों और विक्रेता संघ का गणित अलग दिखाई दे रहा है। व्यापारियों का कहना है कि वे फैट की गुणवत्ता के आधार पर ही किसानों को भुगतान कर रहे हैं।
इसके अलावा संघ के अनुसार वर्तमान में किसानों को करीब 9.50 रुपये प्रति फैट की दर से भुगतान मिल रहा है। हालांकि पशुओं की देखरेख और चारे के महंगे दामों के कारण किसान इस व्यवस्था से संतुष्ट नहीं हैं।
आम उपभोक्ताओं के बजट पर पड़ सकता है सीधा असर
फिलहाल इंदौर शहर में उपभोक्ताओं को खुला दूध 65 से 70 रुपये प्रति लीटर के भाव से मिल रहा है। यदि प्रशासन और व्यापारियों ने किसानों की मांग मान ली, तो खुदरा बाजार में दूध के दाम तेजी से बढ़ जाएंगे।
नतीजतन इसका सीधा असर आम परिवारों के मासिक बजट पर पड़ना बिल्कुल तय है। इसके साथ ही बाजार में बनने वाले पनीर, मावा, दही और मिठाइयों के दामों में भी तेजी दर्ज की जाएगी।
इंदौर में दूध की सप्लाई बाधित होने से गहरा सकता है संकट
गौरतलब है कि इंदौर जिले में रोजाना लगभग 12 से 12.5 लाख लीटर दूध का संकलन होता है। वहीं शहर में प्रतिदिन करीब 12.5 से 13 लाख लीटर दूध की खपत दर्ज की जाती है।
इसलिए यदि किसानों ने हड़ताल शुरू की, तो शहर की दैनिक आपूर्ति व्यवस्था पूरी तरह चरमरा सकती है। बहरहाल प्रशासनिक अधिकारी किसानों और व्यापारियों के बीच बातचीत करवाकर मामले को सुलझाने के प्रयास में जुटे हैं।



