समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने बैंकिंग व्यवस्था पर 12 गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने बैंकिंग सेक्टर, आईडीबीआई बैंक के रणनीतिक पुनर्गठन, नोटबंदी और डिजिटल फ्रॉड जैसे मुद्दों पर केंद्र सरकार से जवाब मांगा है। ये सवाल बैंकिंग व्यवस्था की कमजोरी और आम जनता की सुरक्षा को लेकर हैं।
आईडीबीआई बैंक विनिवेश को लेकर उठाए सवाल
अखिलेश यादव ने आईडीबीआई बैंक में केंद्र सरकार की 30.48% और एलआईसी की 30.24% हिस्सेदारी बेचने के फैसले की कड़ी आलोचना की। उन्होंने इसे सार्वजनिक संपत्तियों की बेची जाने वाली प्रक्रिया करार दिया। उनका तर्क है कि इससे आम जनता की संपत्ति खतरे में पड़ सकती है।
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इसके अलावा, उन्होंने कहा कि इस तरह के कदम बैंकिंग सेक्टर की स्थिरता को प्रभावित कर सकते हैं, जिससे आम लोगों की जमा पूंजी सुरक्षित नहीं रह पाएगी।
बैंकिंग सुरक्षा और डिजिटल फ्रॉड पर सवाल
बैंकिंग व्यवस्था में बढ़ते साइबर धोखाधड़ी और डिजिटल फ्रॉड पर भी अखिलेश यादव ने चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि बैंकिंग घोटाले लगातार बढ़ रहे हैं और सरकार इस दिशा में प्रभावी कदम नहीं उठा रही।
इसके कारण आम जनता के पैसों की सुरक्षा सवालों के घेरे में है। उन्होंने यह भी कहा कि डिजिटल लेनदेन में सुरक्षा उपायों को मजबूत करने की जरूरत है ताकि लोगों को होने वाले नुकसान को रोका जा सके।
नोटबंदी के बाद बैंकिंग संकट पर सवाल खड़े किए
सपा प्रमुख ने नोटबंदी के बाद बैंकिंग सेक्टर में आई कैश किल्लत और डिजिटल धोखाधड़ी में वृद्धि पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि नोटबंदी के वादे पूरे नहीं हुए और इसके उलट इससे बैंकिंग व्यवस्था पर दबाव बढ़ा।
उन्होंने यह भी कहा कि नोटबंदी के बाद डिजिटल फ्रॉड के मामले तेज़ी से बढ़े, जो सरकार की नीतियों की विफलता को दर्शाता है।
निर्मला सीतारमण ने अखिलेश यादव के आरोपों को खारिज किया
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोशल मीडिया पर अखिलेश यादव के आरोपों को सिरे से खारिज किया। उन्होंने इन सवालों को “मगरमच्छ के आंसू” बताते हुए कहा कि ये आरोप गलत हैं।
वित्त मंत्री ने यह भी कहा कि 2004 के बाद समाजवादी पार्टी ने UPA सरकार का समर्थन किया था, जब सरकारी बैंकों को भारी नुकसान हुआ था। उन्होंने फोन बैंकिंग और क्रोनी कैपिटलिज्म का हवाला देते हुए कहा कि NPA बढ़ने का जिम्मेदार वह दौर था।
आईडीबीआई बैंक और एलआईसी की हिस्सेदारी पर वित्त मंत्री का बयान
निर्मला सीतारमण ने बताया कि जनवरी 2019 में LIC ने ₹21,624 करोड़ निवेश कर आईडीबीआई बैंक में 51% नियंत्रक हिस्सेदारी ली, जो कि उस समय फंसे हुए कर्जों से निपटने के लिए जरूरी था।
उन्होंने कहा कि यह कदम बैंकिंग सेक्टर को मजबूत करने के लिए उठाया गया था और NDA शासनकाल में बैंकिंग क्षेत्र में सुधार हुआ है।



