राहुल गांधी ने राष्ट्रपति को लिखा पत्र, दुष्यंत गौतम को राज्यपाल न बनने दें की मांग को लेकर एक बार फिर से राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को पत्र भेजकर बीजेपी नेता दुष्यंत गौतम को सिक्किम का राज्यपाल बनाए जाने के फैसले पर आपत्ति जताई है। उन्होंने इस नियुक्ति पर पुनर्विचार करने और जांच पूरी होने तक दुष्यंत गौतम को पदभार ग्रहण करने से रोकने की अपील की है।
राहुल गांधी ने राष्ट्रपति को लिखा पत्र और उसकी मुख्य मांग
राहुल गांधी ने अंकिता भंडारी हत्याकांड मामले की सीबीआई जांच पूरी होने तक दुष्यंत गौतम को सिक्किम के राज्यपाल पद पर नियुक्त न किए जाने की मांग की है। उन्होंने अपने पत्र में कहा है कि भारतीय संविधान के तहत राज्यपाल पद पर रहते हुए किसी व्यक्ति के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही नहीं की जा सकती। इसलिए, इस मामले में जांच प्रभावित हो सकती है। राहुल गांधी ने कहा कि यह निर्णय महिलाओं की सुरक्षा के प्रति सरकार की उदासीनता दर्शाता है।
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उन्होंने राष्ट्रपति से आग्रह किया कि सरकार को इस नियुक्ति पर पुनर्विचार करने और जांच पूरी होने तक दुष्यंत गौतम को पदभार ग्रहण करने से रोकने की सलाह दी जाए। राहुल गांधी ने साथ ही यह भी बताया कि अंकिता भंडारी के परिवार वाले और कई अन्य लोग इस मामले में दुष्यंत गौतम की संलिप्तता पर संदेह रखते हैं।

अंकिता भंडारी हत्याकांड का मामला और विवाद
सितंबर 2022 में उत्तराखंड के ऋषिकेश में 19 वर्षीय रिसॉर्ट रिसेप्शनिस्ट अंकिता भंडारी की हत्या हुई थी। आरोप है कि उसने एक ‘VIP’ के लिए अपनी गरिमा से समझौता करने से इनकार किया था, जिसके बाद उसकी हत्या कर दी गई। इस मामले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) जांच कर रही है, लेकिन चार साल बाद भी यह सवाल बना हुआ है कि वह VIP कौन था।
अंकिता के माता-पिता और नेताओं ने आरोप लगाया है कि दुष्यंत गौतम इस मामले से जुड़े हो सकते हैं। हालांकि, दुष्यंत गौतम ने इन आरोपों को खारिज किया है। इस विवाद ने राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर गहरा असर डाला है, खासकर महिलाओं की सुरक्षा और न्याय के मुद्दे पर।
इंडिया गेट पर राहुल गांधी का समर्थन और धरना
14 अक्टूबर 2026 को, दुष्यंत गौतम की राज्यपाल नियुक्ति के विरोध में अंकिता भंडारी के माता-पिता ने नई दिल्ली के इंडिया गेट पर धरना शुरू किया था। इसी मौके पर राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा भी धरने में शामिल हुए। उन्होंने परिवार के साथ खड़े होकर मामले में न्याय की मांग की।
यह धरना राजनीतिक और सामाजिक समर्थन का प्रतीक बन गया है, जिससे इस मामले पर जनता का ध्यान केंद्रित हुआ है। इस दौरान राहुल गांधी ने कहा कि महिलाओं की सुरक्षा के लिए उचित कदम उठाना सरकार की जिम्मेदारी है।
उत्तराखंड सरकार का रुख और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की प्रतिक्रिया
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कांग्रेस पर इस मामले को राजनीतिक मुद्दा बनाने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने पहले ही सीबीआई जांच की मांग स्वीकार कर ली है और जांच पूरी गंभीरता से चल रही है।
धामी ने बताया कि दोषियों को सलाखों के पीछे पहुंचाने के लिए सभी कदम उठाए गए हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस का मकसद सिर्फ इस संवेदनशील मामले को राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल करना है। मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने दोषियों की जमानत याचिकाएं खारिज कर दी हैं।
राज्यपाल पद पर नियुक्ति का कानूनी और राजनीतिक महत्व
राज्यपाल पद भारतीय संवैधानिक पद है, जहां नियुक्त व्यक्ति को विशेष कानूनी संरक्षण प्राप्त होता है। ऐसे पद पर रहते हुए आपराधिक मुकदमे की कार्यवाही रोक दी जाती है। इसलिए, दुष्यंत गौतम की नियुक्ति पर सवाल उठना स्वाभाविक है, जब तक जांच पूरी नहीं हो जाती।
राजनीतिक रूप से भी यह मामला महिलाओं की सुरक्षा, न्याय की उपलब्धता और सत्ता के दुरुपयोग के मुद्दे को उजागर करता है। इस नियुक्ति से विपक्षी दलों ने सरकार की आलोचना तेज कर दी है। इससे आम जनता में भी सवाल उठ रहे हैं कि क्या न्याय प्रणाली पूरी निष्पक्षता से काम कर पा रही है।
आगे क्या हो सकता है इस मामले में
इस विवाद के बीच, जांच एजेंसियां मामले की तह तक पहुंचने का प्रयास जारी रखेगीं। अगर जांच में दुष्यंत गौतम के खिलाफ ठोस सबूत मिलते हैं, तो उनकी नियुक्ति पर पुनर्विचार हो सकता है। वहीं, राजनीतिक दबाव और सार्वजनिक आक्रोश के कारण इस मामले की संवेदनशीलता बढ़ गई है।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की प्रतिक्रिया और केंद्र सरकार का रुख इस मामले में निर्णायक होगा। आम जनता की उम्मीद है कि न्याय मिलेगा और महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित होगी। इस मामले से देश में संवैधानिक पदों की नियुक्ति प्रक्रिया पर भी चर्चा शुरू हो गई है।



