मध्य प्रदेश के श्योपुर में आयोजित रीना मीणा जनसंवाद कार्यक्रम के दौरान मंच पर भारी हंगामा देखने को मिला। दरअसल ग्राम रायपुरा में आयोजित सीएम जनविश्वास जनसंवाद में अफसरों के रवैये पर सवाल खड़े हुए। इस दौरान जनपद पंचायत अध्यक्ष रीना आशीष मीणा ने मंच से ही अधिकारियों की कार्यशैली पर तीखा आक्रोश व्यक्त किया।
रीना मीणा जनसंवाद मंच पर क्यों नाराज हुईं?
दरअसल कार्यक्रम में पहुंचे राजनीतिक नेताओं की आवभगत में प्रशासनिक अधिकारी लगातार व्यस्त दिखाई दिए। इसलिए रीना मीणा ने अफसरों को जनता के मूल कार्यों की अनदेखी करने पर जमकर फटकार लगाई।
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इसके अलावा उनका स्पष्ट कहना था कि यह सरकारी शिविर आम ग्रामीणों की समस्याओं के निवारण के लिए था। लिहाजा इसे नेताओं और अफसरों का आपसी मिलन समारोह नहीं बनाया जाना चाहिए।

नेताओं के स्वागत पर अफसरों को लगाई तीखी फटकार
गौरतलब है कि मंच पर नेताओं के आते ही सभी प्रशासनिक अधिकारी सम्मान में तुरंत खड़े हो गए थे। इसी बात पर भड़कते हुए जनपद अध्यक्ष ने बेहद कड़े शब्दों में नाराजगी जताई।
इसके बाद उन्होंने अधिकारियों से सवाल किया कि नेता आया है या तुम्हारा बाप आया है, जो सब खड़े हो जाते हो? नतीजतन मंच पर मौजूद सभी अधिकारी और कर्मचारी पूरी तरह असहज नजर आने लगे।
चूड़ियां पहनने का तंज और जनपद सीईओ का हस्तक्षेप
बहरहाल रीना मीणा ने अधिकारियों पर तंज कसते हुए कहा कि यदि नेताओं से इतना डर लगता है तो चूड़ियां पहन लो। इसके अलावा उन्होंने मंच से ही अफसरों को चूड़ियां लाकर देने की बात भी कही।
इस बीच कार्यक्रम में मौजूद जनपद पंचायत के सीईओ एस. एस. भटनागर ने उन्हें शांत कराने का प्रयास किया। हालांकि जनपद अध्यक्ष ने अफसरों को जनहित में निष्पक्ष होकर काम करने की दो टूक नसीहत दी।
रीना मीणा जनसंवाद घटनाक्रम के प्रमुख बिंदु
- यह पूरा मामला श्योपुर जिले के ग्राम रायपुरा में आयोजित सरकारी शिविर का है।
- जनपद अध्यक्ष रीना आशीष मीणा ने अफसरों पर नेताओं की चापलूसी करने का आरोप लगाया।
- उन्होंने प्रशासनिक व्यवस्था में जनता के मुद्दों को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की मांग उठाई।
प्रशासनिक जवाबदेही और वायरल वीडियो की चर्चा
दरअसल 29 अगस्त 2026 को सामने आए इस घटनाक्रम का वीडियो इंटरनेट पर बहुत तेजी से चर्चा में आ गया। इसके अलावा ग्रामीण क्षेत्रों में सरकारी कार्यक्रमों के वास्तविक उद्देश्यों को लेकर भी विमर्श छिड़ गया है।
नतीजतन इस तीखी नोकझोंक के बाद जिले के प्रशासनिक हलकों में भी हड़कंप मच गया है। फिलहाल जनता के काम में हीलाहवाली करने वाले अधिकारियों के आचरण पर सवाल उठ रहे हैं।



