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भोपाल। लोकसभा चुनाव के दौरान भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने कहा था कि भाजपा अब आत्मनिर्भर हो चुकी है, उसे किसी सहारे की जरूरत नहीं। इसके बाद से संघ और भाजपा के बीच खटपट की बातें चलती रहीं। अब संघ ने पहली बार माना है कि कुछ है जरूर, लेकिन यह पारिवारिक मामला है और इसे मिल बैठकर सुलझा लिया जाएगा।
केरल में संघ के कार्यक्रम के दौरान आरएसएस के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर का इस संबंध में दिया गया बयान काफी कुछ कह रहा है। उनसे जब भाजपा और संघ के बीच समन्वय की कमी के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने कहा कि आरएसएस के 100 साल पूरे हो रहे हैं। यह एक लंबी यात्रा है। लंबी यात्रा में कार्यात्मक मामले सामने आते हैं। हमारे पास उन्हें दूर करने के लिए एक मैकेनिज्म है। हमारी औपचारिक और अनौपचारिक मुलाकातें चलती रहती हैं। आंबेकर ने इस बात का भी संकेत दिया कि बैठक में समन्वय के मुद्दों और हाल के लोकसभा चुनावों के दौरान भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा के बयान के बाद आरएसएस कैडर के उत्साह में हुई कमी को लेकर भी चर्चा हुई है।
पहली बार संघ ने सीधे तौर पर नहीं किया इनकार
आंबेकर ने कहा कि भाजपा और संघ का लक्ष्य एक है। यह पूछे जाने पर कि क्या भाजपा को संगठन स्तर पर पर्याप्त आरएसएस प्रचारक नहीं मिल रहे, आंबेकर ने कहा कि भाजपा में बहुत सारे स्वयंसेवक और प्रचारक हैं। किसी प्रचारक को कैसे और कहां रखना है, यह संघ तय करता है। इसमें कोई समस्या नहीं है। आंबेकर के बयानों से यही अर्थ लगाया जा रहा है कि भाजपा और संघ में खटपट की बात सही है और ऐसा पहली बार है जब सीधे तौर पर संघ ने इससे इनकार नहीं किया है।



