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भोपाल। जब भाजपा ने डॉ.मोहन यादव को मध्यप्रदेश का सीएम बनाया था, तो दिल्ली से एमपी में किस्मत आजमाने आए कई नेताओं के चेहरे उतर गए थे। लेकिन, भाजपा ने कुछ सोच समझकर ही यह फैसला लिया था। भाजपा के पास कोई यादव नेता नहीं था, जो यूपी-बिहार से लेकर अन्य ओबीसी सीटों पर अपना प्रभाव जमा सके। मोहन यादव को अब तक कई विधानसभा चुनावों में ओबीसी चेहरे के रूप में उतारा गया और हर जगह उन्होंने अपना कमाल दिखाया। बिहार में तो लोगों के सिर मोहन का जादू सिर चढ़कर बोला और 21 सीटें एनडीए की झोली में आ टपकीं।
भाजपा ने मोहन यादव को बिहार में स्टार प्रचारक बनाया था और करीब 25 विधानसभा सीटों पर उन्होंने प्रचार किया। इनमें से 21 सीटें एनडीए के खाते में आई हैं। बिहार में जहां लालू प्रसाद यादव के परिवार का यादव समाज के वोटों पर कब्जा है, उसमें एमपी के सीएम मोहन यादव सेंध लगाने में सफल रहे। इनमें से अधिकांश सीटें राजद के गढ़ वाली थीं। बिहार में यादव समुदाय की आबादी लगभग 12% है। बिहार में हुई मोहन यादव की सभाओं में खूब भीड़ आई। वे पीएम मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व और बिहार में हुए विकास के कार्यों के अलावा पौराणिक उदाहरणों से बिहार की जनता को कनेक्ट करते रहे। पटना शहर से लेकर सीमांचल, मिथिलांचल और मगध तक, डॉ. यादव की रैलियों में आई भीड़ ने स्थानीय समीकरण बदल दिए। इसका असर सीधे तौर पर वोट प्रतिशत में दिखाई दिया।
अन्य राज्यों में दिखा था मोहन मैजिक
मोहन यादव को भाजपा ने इससे पहले कई विधानसभा चुनावों में जिम्मेदारी सौंपी थी और वे सब में सफल रहे। दिल्ली में भी 12 में से 11 सीटों पर दिलाई जीत दिलाई थी। हरियाणा में भिवानी, दादरी, तोशाम, बवानीखेड़ा जैसी सीटों पर उनके रोड शो निर्णायक साबित हुए। जम्मू–कश्मीर की सांबा सीट पर उनकी रैली के बाद भाजपा ने 30 हजार से अधिक वोटों से जीत हासिल की।
अब भाजपा में राष्ट्रीय ओबीसी चेहरा बने
उल्लेखनीय है कि देश की 54 फीसदी ओबीसी आबादी भाजपा के लिए बड़ा आधार है। अब तक उत्तरप्रदेश और बिहार जैसे राज्यों के लिए भाजपा के पास कोई बड़ा ओबीसी चेहरा नहीं था। मध्यप्रदेश में कई चेहरे थे, लेकिन यादव नेता का अभाव भाजपा को हमेशा खलता रहा। मोहन यादव में भाजपा ने अपना वह चेहरा दिखा और यही वजह है कि वे अब पूरे देश में भाजपा में ओबीसी के बड़े नेता बन चुके हैं।



