इंदौर। कुख्यात भूमाफिया दिलीप सिसोदिया उर्फ दीपक जैन मद्दा जेल से बाहर आते ही फिर सक्रिय हो गया है। वह सहकारिता विभाग के एक इंस्पेक्टर के साथ विवादित गृह निर्माण संस्थाओं की सूची बनवाने में जुट गया है। इसके साथ ही आईडीए द्वारा छोड़ी गई स्कीम 171 के प्लॉटों को निपटाने की कोशिश भी शुरू कर दी है। मद्दा को अब इस काम में पुलिस के लाइजनर जय सिंह जैन के अलावा इंदौर के एक मंत्री के पीए का भी सहयोग मिल रहा है।
उल्लेखनीय है कि ईडी के मनी लॉन्ड्रिंग केस में जेल में बंद दीपक जैन मद्दा पिछले महीने दीपावली से पहले ही जमानत पर बाहर आया है। शहर के कई बड़े जमीन घोटालों का यह आरोपी इतने मुकदमे लदने और जेल में जाने के बाद भी नहीं सुधरा। अब तो जेल से बाहर आते ही उसके हौसले और बुलंद हो गए। सूत्र बताते हैं कि लाइजनर जयसिंह जैन ने उसे पुलिस से बचाने की पूरी गारंटी ले ली है। इसके बाद मद्दा और घपले में जुट गया।
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सहकारिता विभाग में फिर बनाई पैठ
वैसे तो दीपक मद्दा जमीन से जुड़े हर विभाग में अपनी पैठ रखता है, लेकिन जेल जाने के बाद अफसर और बाबू उससे बचने लगे थे। अब एक मंत्री के पीए के माध्यम से वह फिर से विभागों में पकड़ बनाने लगा है। सहकारिता विभाग भोपाल में पदस्थ बाबू संजय कुचनकर इन दिनों इंदौर में इंस्पेक्टर है। सूत्र बताते हैं कि मद्दा अब संजय के माध्यम से कर्मचारी गृह निर्माण संस्था सहित कई अन्य संस्थाओं में सदस्यों की सूची बनवाने में जुट गया है। मद्दा ने सबसे विवादित सूर्या गृह निर्माण संस्था की जमीनों को निपटाने में भी जुट गया है। इसमें उसकी मदद प्रशासन तथा सहकारिता विभाग के अफसर कर रहे हैं।
स्कीम 171 के विवादित प्लॉटों का खेल शुरू
इंदौर विकास प्राधिकरण द्वारा स्कीम 171 छोड़ देने के बाद दीपक जैन मद्दा को और खेलने का मौका मिल गया। सूत्र बताते हैं कि मद्दा ने यहां करीब 150 प्लॉट फर्जी तरीके से बेचे हैं। नसीम हैदर सहित कई और नामों से फर्जी रजिस्ट्रियां कर दी हैं। इसके अलावा भी यहां कई जमीनें ऐसी हैं जिनमें मद्दा की सांठगांठ है। अब वह इन जमीनों को निपटाने में लग गया है। मद्दा फिर अपने पुराने रफ्तार से ही आगे बढ़ रहा है। शायद संबंधित विभाग और अफसरों को कुछ और एफआईआर का इंतजार होगा। जब एफआईआर दर्ज होगी तो फिर शुरू होगा जेल जाने और बाहर आने का खेल।
जेल में कर ली एक कुख्यात गुंडे से दोस्ती
सूत्र बताते हैं कि जेल में मद्दा की मुलाकात अंडरवर्ल्ड डॉन छोटा राजन के गुर्गे अरुण तिवारी से हुई। मद्दा ने उससे दोस्ती कर ली और अब उसके दम पर बाहर के काम निपटाने की कोशिश कर रहा है। अरुण छोटा राजन का इतना करीबी है कि दाउद इब्राहिम का पता लगाने के लिए इसे पाकिस्तान भेजा गया था। मुंबई में गिरोहों के साथ काम के दौरान उसने महाराष्ट्र, राजस्थान, गुजरात, हरियाणा, पंजाब, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश, उड़ीसा, बिहार, असम, पश्चिम बंगाल, नागालैण्ड आदि प्रदेशों में नेटवर्क खड़ा कर लिया।



