अर्द्धेन्दु भूषण
इंदौर। पिछले कुछ दशकों से इंदौर शहर में नए ‘रईसों’ की बाढ़ सी आ गई। सोने की मोटी चेन, ब्रेसलेट, ब्रांडेड जीन्स, शर्ट, शूज और महंगी गाड़ियों से उतरते किसी को देख लीजिए तो सहज ही अंदाजा हो जाता है कि ये वो वाले ‘रईस’ हैं।
👉 यह भी पढ़ें:
- आखिर हर बार क्यों ‘जीत’ जाते हैं भूमाफिया, शासन-प्रशासन, कायदे-कानून पर कैसे पड़ जाते हैं भारी?
- भूमाफियाओं के आगे एक बार फिर सब ने टेके घुटने, अयोध्यापुरी की जमीन नहीं बचा सका प्रशासन
- योजना 171 और 77 के प्लॉट धारकों के बहाने भूमाफियाओं को फायदा पहुंचाने की तैयारी!
- बंटी नागर सुसाइड केस : मौके का फायदा उठाने वाले चला रहे फर्जी कहानी, परिजनों के बयान के बाद ही होगा कोई खुलासा
- डायमंड कॉलोनी विवाद के बाद फिर निशाने पर भूमाफिया दीपक मद्दा, कलेक्टर के आदेश पर खुलने लगीं पुरानी फाइलें
- डायमंड कॉलोनी विवाद से पीछा छुड़ाने की कोशिश में जुटा भूमाफिया दीपक मद्दा, पुलिस को भी बरगलाने की कोशिश
पहले मुझे पता नहीं था। जब ऐसे लोग हर सरकारी दफ्तर, बड़े राजनीतिक और सामाजिक आयोजनों में नजर आने लगे तो मैंने किसी से पूछ लिया। उन्होंने बताया कि भिया बहुत बड़े ‘रईस’ हैं। उन्होंने फलां-फलां कॉलोनी काटी है, फलां-फलां बिल्डिंग बनाई है। मुझे बताया गया कि इन्हें कॉलोनाइजर और बिल्डर कहा जाता है।
फिर क्या हुआ, एक दिन ऐसे ही चमक-दमक वाले एक ‘रईस’ को पुलिस वाले पकड़ कर ले जाते दिखे। अखबारों में भी उनका फोटो छपा। फिर मैंने एक सज्जन से पूछा कि यह तो कॉलोनाइजर और बिल्डर हैं न, इन्हें क्यों पकड़ा गया? फिर मुझे बताया गया कि जिन सज्जन को पकड़ा गया है, उन्हें जमीनों और बिल्डिंगों में जमकर घोटाला किया है।
इसके कुछ सालों बाद अचानक सरकार जागी और भूमाफियाओं के नाम से एक अभियान शुरू किया। मुझे लगा कि यह कोई नई चीज होगी। जब पुलिस उन्हीं सोने की मोटी चेन, ब्रेसलेट और महंगी गाड़ियों वाले ‘रईसों’ को पकड़ने लगी तो फिर मैं आश्चर्य में पड़ गया। एक पुलिस वाले ने बताया कि ये सभी भूमाफिया हैं। इन्होंने आम जनता के साथ ही सरकार को भी करोड़ों का चूना लगाया है। तब पहली बार भूमाफिया शब्द से मेरी पहचान हुई।
सरकार ने पूरा जोर लगा दिया। कई भूमाफिया अंदर गए। फिर बाहर भी आए, लेकिन आम जनता का कुछ खास भला नहीं हो पाया। कई तो इस अभियान में भी थाने जाकर ही लौट आए। इसके बाद इनकी बिल्डिंगें तनती रहीं, कॉलोनियां कटती रहीं और हमारे जैसे आम लोग इनके हाथों ठगे जाते रहे।
इनकी ‘रईसी’ की धमक ऐसी कि हर सरकारी विभाग में इन के कारिंदे हैं। हर नेता के ये दुलारे हैं और हर महफिल के ये प्यारे हैं। इनके बगैर महंगे रेस्टोरेंट, पब, बार, फार्म हाउस सब सूने ही रहते। आपकी हो सकती है, कम से कम मेरी तो इतनी औकात नहीं कि एक ही शाम पर लाखों उड़ा दें।
‘जमीन’ से जुड़े एक मेरे मित्र हैं। उनके साथ मैं एक शादी में गया था, तो उन्होंने एक ऐसे ही ‘रईस’ से मिलवाया। बाद में कोने में ले जाकर मेरी कान में बोले-जानते हो, पहले ये लूना पर चला करते थे। जमीनों ने इन पर इतनी कृपा बरसाई की अब मर्सिडीज से नीचे उतरते नहीं। पहले एलआईजी के छोटे मकान में रहते थे, अब शहर के पॉश इलाके में बड़ा सा बंगला है।
सचमुच पुलिस भले ही इनसे कितनी भी खुन्नस निकाले। प्रशासन कितना भी इनके पीछे हाथ धोकर पड़े, मेरी नजर में ये इंदौर की शान हैं। जरा सोचिए, अगर ये भूमाफिया नहीं होते तो इंदौर शहर आखिर ‘रईस’ कैसे दिखता।
दो पुलिसवालों से झगड़ा करना कोई बड़ी गलती थोड़े ही है। पुलिस वाले इनके काम में बाधा डालने ही क्यों गए थे?
अब पुलिस की सख्ती के बीच कई ‘रईसों’ की कुंडली फिर से खंगाली जा रही है। सुना है कुछ को थाने भी पूछताछ के लिए बुलाया गया है, फिर भी ये उम्मीद से हैं।
कई सरकारी तूफान देख चुके बेचारे इन ‘रईसों’ को कॉन्फिडेंस है कि एक और सही…यह भी टल जाएगा।



