Ken-Betwa Link Project: मध्य प्रदेश के छतरपुर में केन-बेतवा लिंक परियोजना (Ken-Betwa Link Project) समेत अन्य विकास परियोजनाओं के विरोध में चल रहे चर्चित ‘चिता आंदोलन’ को रविवार सुबह पुलिस ने समाप्त करा दिया। आंदोलन का नेतृत्व कर रहे सामाजिक कार्यकर्ता अमित भटनागर को पुलिस मेडिकल जांच के लिए अपने साथ ले गई।
प्रदर्शनकारियों का दावा है कि अमित भटनागर पिछले 12 दिनों से आमरण अनशन पर बैठे थे और उन्हें उनकी इच्छा के विरुद्ध धरना स्थल से हटाया गया। वहीं प्रशासन ने आंदोलन में शामिल अन्य लोगों से भी धरना स्थल खाली कराया और कई प्रदर्शनकारियों को बसों के जरिए उनके घर भेज दिया।
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पुलिस का क्या कहना है?
छतरपुर के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक आदित्य पटले के अनुसार, अमित भटनागर की तबीयत लगातार बिगड़ रही थी। इसी कारण उन्हें शांतिपूर्वक मेडिकल जांच के लिए अस्पताल ले जाया गया। प्रशासन का कहना है कि कार्रवाई स्वास्थ्य सुरक्षा को ध्यान में रखकर की गई।

क्यों हो रहा था ‘चिता आंदोलन’?
यह आंदोलन केन-बेतवा लिंक परियोजना, मझगवां, रुन्झ, नेगुवां और एनटीपीसी परियोजनाओं से प्रभावित लोगों की ओर से चलाया जा रहा था। प्रदर्शनकारी भूमि अधिग्रहण, मुआवजा, पुनर्वास और कथित अनियमितताओं को लेकर करीब दो सप्ताह से धरने पर बैठे थे।
चिताओं पर लेटकर, फांसी का फंदा और जल सत्याग्रह से जताया विरोध
इस आंदोलन ने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींचा। विरोध दर्ज कराने के लिए प्रदर्शनकारियों ने कई प्रतीकात्मक तरीके अपनाए—
- लकड़ी की चिताओं पर लेटकर प्रदर्शन किया।
- महिलाओं ने प्रतीकात्मक फांसी का फंदा लगाकर विरोध जताया।
- कई लोग नदी में खड़े होकर जल सत्याग्रह करते रहे।
इन तस्वीरों और वीडियो ने सोशल मीडिया पर भी व्यापक चर्चा बटोरी।
प्रदर्शनकारियों के आरोप
आंदोलनकारियों का आरोप है कि कई प्रभावित परिवारों को अब तक पूरा मुआवजा नहीं मिला है। उनका कहना है कि कई पात्र लोगों को पुनर्वास पैकेज से वंचित रखा गया, जबकि लाभार्थियों की सूची में भी कथित गड़बड़ियां की गईं। ग्रामीणों ने मुआवजा वितरण में भ्रष्टाचार के आरोप भी लगाए हैं।

प्रशासन का दावा- सभी मांगों का समाधान हो चुका
छतरपुर कलेक्टर पार्थ जायसवाल का कहना है कि धरने में शामिल अधिकांश लोग पन्ना जिले की परियोजनाओं से प्रभावित हैं। उनके अनुसार, प्रभावित परिवारों की सभी मांगों का समाधान किया जा चुका है और कोई मुद्दा लंबित नहीं है।
क्या है Ken-Betwa Link Project?
केन-बेतवा लिंक परियोजना देश की पहली नदी जोड़ो (River Linking Project) योजना है। केंद्र सरकार के अनुसार, लगभग 44,600 करोड़ रुपये की इस परियोजना से मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के 13 जिलों में सिंचाई और पेयजल सुविधा का विस्तार होगा।
हालांकि, परियोजना के डूब क्षेत्र में आने वाले कई गांवों और हजारों परिवारों के संभावित विस्थापन को लेकर शुरुआत से ही इसका विरोध होता रहा है। यही वजह है कि यह परियोजना विकास और विस्थापन के बीच संतुलन को लेकर लगातार बहस का विषय बनी हुई है।
आपका क्या मानना है?
क्या केन-बेतवा लिंक परियोजना जैसे बड़े विकास कार्यों के लिए प्रभावित परिवारों को बेहतर मुआवजा और पुनर्वास सुनिश्चित किए बिना आगे बढ़ना उचित है? या फिर देश के विकास के लिए ऐसी परियोजनाएं जरूरी हैं? अपनी राय कमेंट बॉक्स में जरूर साझा करें।



