इंदौर। डायमंड गृह निर्माण संस्था की गुत्थी सुलझाने में पुलिस जुटी हुई है, लेकिन यह सुलझ नहीं रही। अगर डायमंड कॉलोनी में पुलिसकर्मियों की पिटाई नहीं होती तो पुलिस सक्रिय भी नहीं होती। भूमाफियाओं की पहुंच का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि पीटने के बाद भी पुलिसकर्मियों ने मुंह पर ताला मार लिया था। वह तो पुलिस कमिश्नर ने सख्ती दिखाई नहीं तो यह मामला सामने भी नहीं आता।
असली हीरो से 8 घंटे पूछताछ
इंदौर के कनाड़िया रोड स्थित डायमंड गृह निर्माण भ-घोटाले में पुलिस की जांच अब बड़े बिल्डरों तक पहुंच गई है। एसएस ग्लोबल ग्रुप के विशाल खंडेलवाल को थाने बुलाकर करीब 7 से 8 घंटे पूछताछ की गई। इससे पहले संयम इंफ्र से जुड़े दीपक जैन मद्दा से भी घंटों पूछताछ हो चुकी है।
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500 करोड़ की जमीन का है विवाद
उल्लेखनीय है कि यह विवाद भूरी टेकरी के पास डायमंड कॉलोनी की करीब 17 एकड़ जमीन से जुड़ा है, जिसकी कीमत 500 करोड़ रुपये से अधिक आंकी गई है। 1974 में यह जमीन शालीग्राम के नाम थी, बद में हाजी एंड कंपनी के शेख इब्राहिम ने इसे लिया और डायमंड गृह निर्माण सोसायट बनाकर प्लॉट काटे गए। रिपोर्ट्स के अनुसार इसमें से करीब 7 एकड़ जमीन बाद में संयम इंफ्रा फर्म ने ले ली, जिसके डायरेक्टर प्रतीक संघवी और जयश्री संघवी है। हालांकि इस सौदे का वर्ष अलग-अलग स्रोतों में अलग बताया गया है, कुछ रिपोर्ट 2003 तो कुछ 2016 का जक्र करती हैं।
दो पुलिसकर्मियों की हुई थी पिटाई
22 जून 2026 की रात डायमंड कॉलोनी के रहवासियों और संयम इंफ्रा से जुड़े लोगों के बीच झगड़ा हुआ था। मौके पर पहुंचे द पुलिसकर्मियों, विजय सिकरवार और आशीष शर्मा, पर पथराव हुआ और एक के सिर पर डंडा भी मारा गया। शुरुआत में मुख्य आरोपी मोहसिन अली का नाम एफआईआर में दर्ज नहीं हुआ, जिसके बाद मीडिया में सवाल उठे। पुलिस कमिश्नर संतोष सिंह ने इसके बाद सख्ती दिखाते हुए ठोस एफआईआर दर्ज कराई और चार आरोपियों को गिरफ्तार किया।
घोटाले की जड़ में क्या है?
• एक पूर्व कोर्ट आदेश में सोसायटी के पक्ष में हुई रजिस्ट्री को शून्य घोषित किया गया था, जिसके आधार पर सहकारिता विभाग ने सोसायटी के लिक्विडेशन की प्रक्रिया शुरू की थी।
• इसी को आधार बनाकर कथित तौर पर भूमाफियओं ने जमीन पर कब्जे किए।
• वहीं 20 दिसबर 2024 को अपर सत्र न्यायाधीश जितेंद्रसिंह कुशवाह ने एक अलग फैसले में हाजी एंड कंपनी पर फर्जी पावर ऑफ अटॉर्नी से जमीन खरीदने के आरोप को खारिज कर दिया था, जिससे यह पुष्ट हुआ कि संयम इंफ्रा की 7 एकड़ जमीन डायमंड गृह निर्माण सोसायटी का ही हिस्सा है।
पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई
पुलिस ने पहले भाजपा नेता पकज संघवी के भतीजे व कंपनी पार्टनर प्रतीक संघवी से करब 8 घंटे पूछताछ कर नोटिस देकर छोड़ा गया। इसके बाद जमीन का सौदा करने वाली फर्म संयम इंफ्रा से जुड़े दीपक जैन मद्दा को बुलाकर पूछताछ की गई और दस्तावेज खंगाले गए। ताजा घटनाक्रम में इस जमीन पर रेशो डील करने वाले बिल्डर विशाल खंडेलवाल को थाने बुलाकर 7 से 8 घंटे पूछताछ की गई। पुलिस ने पुष्टि की है कि खंडेलवाल ने स्वीकार किया है कि उन्होंने इस विवादित 7 एकड़ जमीन पर आवासीय प्रोजेक् का अनुबंध संयम इंफ्रा के साथ किया था। गौरतलब है कि इससे पहले खंडेलवाल ने मीडिया से कहा था कि इस जमीन से उनका कोई लेना-देना नहीं है। सहकारिता विभग ने भी ठंडे बस्ते में पड़ी अपनी जांच नए सिरे से शुरू कर दी है।
आम लोगों और सोसाइटी सदस्य पर असर
इस पूरे मामले में सबसे ज्यादा नुकसान डायमंड गृह निर्माण सोसायटी के उन सदस्यों को हो रहा है, जिनकी जमीन को लेकर कानूनी अनिश्चितता बनी हुई है। लिक्विडेशन प्रक्रिया, कब्जों और अब पुलिस जांच के बीच सोसायटी और आसपास के निवासियों में भी असुरक्षा का माहौल है।
जांच की चनौतियां
मामले में सबसे बड़ी चुनौती जमीन के मालिकाना हक की परतें खलना है, क्योंकि 1974 से अब तक इस जमीन के कई हाथ बदले हैं और अलग-अलग कोर्ट आदेश भी समने आए हैं। शुरुआती एफआईआर में मुख्य आरोपी का नाम गयब होना भी जांच की निष्पक्षता पर सवाल खड़े कर चुका है। फिलहाल किसी स्वतंत्र कनूनी विशेषज्ञ की आधिकारिक टिप्पणी सामने नहीं आई है, इसलिए इस पहलू पर पुष्ट जानकारी मिलने पर ही आगे अपडेट किया जाएगा।
आगे क्या हो सकता है?
सहकारिता विभाग की नए सिरे से जांच और पुलिस की पूछताछ के आधार पर आने वाले दिनों में और लोगों को नोटिस मिल सकते हैं। यह भी संभव है कि जमीन के दस्तावेज की गहराई से पड़ताल के बाद कछ और नाम सामने आएं। कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह पहले ही इस मामले में खडेलवाल का नाम उठा चुके हैं, जिससे मामले में राजनीतिक एंगल भी बना हुआ है।
विभागों की लापरवाही हो रही उजागर
डायमंड गृह निर्माण भू-घोटाला अब सिर्फ एक जमीन विवाद नहीं रह गया, बल्कि यह दिखाता है कि किस तरह पुराने कोर्ट आदेशों, सहकारिता विभाग की प्रक्रियाओं और निजी कंपनियों के सौदों के बीच की खामियों का फायदा उठाया जा सकता है। पुलिस की पूछताछ अब जमीन के सदे में शामिल हर कड़ी तक पहुंच रही है, चहे वह जमीन बेचने वाली फर्म हो या प्रोजेक्ट बनाने वाला बिल्डर। आने वाले दिनों में सहकारिता विभाग की जांच रिपोर्ट और पुलिस की आगे की कार्रवाई से यह साफ होगा कि इस 500 करोड़ की जमीन का असली हकदार कौन है, और किसने नियमों को दरकिनार कर फायदा उठाया।
देवी अहिल्या संस्था में भी विशाल सक्रिय
सूत्र बताते हैं कि विशाल खंडेलवाल देवी अहिल्या संस्था में भी सक्रिय है। इस जमीन पर एक बड़े जेल रिटर्न भूमाफिया का वह साथ दे रहा है। विशाल वहां प्लॉटधारकों को धमकी भी दे रहा था और भूमाफिया के लिए प्लॉट खाली कराने की कोशिश में जुटा था। इस मामले में विशाल का साथ अंकित यादव दे रहा था। दोनों सहकारिता विभाग के अधिकारियों पर दबाव बना रहे थे कि अगर देवी अहिल्या का काम नहीं किया तो तुम लोग लोकायुक्त और ईओडब्ल्यू में फंसोगे। ये लोग अपने किसी बडे कनेक्शन का हवाला भी दे रहे थे।



