इंदौर। वार्ड 60 की कांग्रेस पार्षद सुनहरा अंसाफ अंसारी का नामांकन और निर्वाचन शून्य घोषित कर दिया गया है। नामांकन में जानकारी छुपाने के आरोप के खिलाफ कोर्ट में चल रहे केस में आज फैसला सुनाया गया।
मुन्ना अंसारी ने लगाई थी चुनाव याचिका
एडवोकेट विजय शर्मा ने बताया कि 6 जुलाई 2022 को नगर निगम के चुनाव में सुनहरा अंसारी को वार्ड 60 का पार्षद निर्वाचित किया गया था। इसके खिलाफ इफ्तेखार मुन्ना अंसारी ने 29 अगस्त 2022 को चुनाव याचिका प्रस्तुत की थी। इस पर न्यायमूर्ति विनोद कुमार शर्मा ने आज निर्णय दिया है।
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संपत्ति और संपत्ति कर की जानकारी छुपाई
एडवोकेट शर्मा ने बताया कि न्यायालय द्वारा पाया गया कि इनके द्वारा असत्य जानकारी देकर नाम निर्वाचन भरा गया था। कोर्ट ने नाम निर्वाचन और निर्वाचन दोनों को शून्य घोषित कर दिया है। इन्होंने निर्वाचन पत्र में कई संपत्ति की जानकारी नहीं दी। इसके अलावा संपत्ति कर की बकाया जानकारी भी छुपाई।
कोर्ट में प्रस्तुत किए थे फर्जी दस्तावेज
एडवोकेट शर्मा ने बताया कि पार्षद को सभी करों की जानकारी होती है। इसके बावजूद उन्होंने जानकारी छुपाई। संपत्ति की जानकारी भी छुपाई। शर्मा ने बताया कि बचाव पक्ष ने कोर्ट में कई फर्जी दस्तावेज प्रस्तुत किए थे। याचिका में लगाए गए दोनों आरोपों को कोर्ट ने सही मानते हुए यह फैसला सुनाया। लगभग तीन साल ट्रायल के बाद यह फैसला आया।
दूसरे प्रत्याशी को नहीं मिला फायदा
कोर्ट ने सुनेहरा अंसारी का निर्वाचन निरस्त कर दिया, लेकिन चुनाव याचिका में दूसरे प्रत्याशी यासमीन अंसारी को सीधे विजेता घोषित करने की मांग स्वीकार नहीं की। अदालत ने स्पष्ट किया कि निर्वाचित उम्मीदवार का चुनाव शून्य घोषित किया जाता है, जबकि दूसरे प्रत्याशी को निर्वाचित घोषित करने के लिए आवश्यक कानूनी आधार इस मामले में सिद्ध नहीं हुए। इस प्रकार चुनाव याचिका आंशिक रूप से स्वीकार की गई। याचिकाकर्ता की पत्नी ने सुनेहरा के खिलाफ चुनाव लड़ा था, लेकिन वे जीत नहीं पाई थी।



