चालू वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में भारत की GDP ग्रोथ 7.8 प्रतिशत दर्ज की गई है। दरअसल सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) ने 31 अगस्त 2026 को ये आधिकारिक आंकड़े जारी किए। इसके अलावा यह वृद्धि दर भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के 7.0 प्रतिशत के अनुमान से 80 आधार अंक अधिक रही है।
आरबीआई के अनुमान से आगे निकली भारत की GDP ग्रोथ
दरअसल केंद्रीय बैंक ने पहली तिमाही के लिए 7.0 प्रतिशत वृद्धि का अनुमान लगाया था। हालांकि वास्तविक आंकड़ों ने विश्लेषकों और वित्तीय संस्थानों की उम्मीदों को काफी पीछे छोड़ दिया। इसके साथ ही पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही के 6.9 प्रतिशत के मुकाबले विकास दर में उल्लेखनीय तेजी आई है।
गौरतलब है कि पिछली तिमाही यानी जनवरी-मार्च 2026 में यह दर 8.6 प्रतिशत दर्ज की गई थी। इसके बावजूद वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच 7.8 प्रतिशत की यह बढ़त बेहद मजबूत मानी जा रही है।

सर्विस और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर ने दी अर्थव्यवस्था को रफ्तार
दरअसल चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में ग्रॉस वैल्यू ऐडेड (GVA) 8.2 प्रतिशत की दर से बढ़ा। इसके अलावा विनिर्माण क्षेत्र (Manufacturing) ने 9.2 प्रतिशत की प्रभावशाली वृद्धि दर्ज की। वहीं सेवा क्षेत्र (Services) ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 10 प्रतिशत की दोहरे अंकों वाली बढ़त हासिल की।
इसके साथ ही कृषि और संबद्ध क्षेत्रों में 3.6 प्रतिशत की स्थिर वृद्धि देखने को मिली है। नतीजतन औद्योगिक उत्पादन और घरेलू मांग में लगातार सुधार से पूरे आर्थिक तंत्र को गति मिली।
स्थिर मूल्यों पर अर्थव्यवस्था का आकार 81 लाख करोड़ के पार
दरअसल स्थिर मूल्यों पर देश की वास्तविक जीडीपी बढ़कर ₹81.36 लाख करोड़ पहुंच गई। वहीं पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में यह आकार ₹75.46 लाख करोड़ रहा था। इसके अलावा चालू मूल्यों पर नॉमिनल जीडीपी 10.3 प्रतिशत बढ़कर ₹88.27 लाख करोड़ दर्ज की गई।
- वास्तविक जीडीपी पहली तिमाही में बढ़कर ₹81.36 लाख करोड़ दर्ज की गई।
- नॉमिनल जीडीपी 10.3 प्रतिशत की दर से बढ़कर ₹88.27 लाख करोड़ पर पहुंची।
- रियल जीवीए 8.2 प्रतिशत की बढ़त के साथ ₹73.82 लाख करोड़ दर्ज किया गया।
नतीजतन बुनियादी ढांचा क्षेत्र में सरकारी पूंजीगत व्यय बढ़ने से व्यापारिक गतिविधियों को बड़ा संबल मिला।
मजबूत भारत की GDP ग्रोथ से आम लोगों को मिलेगा लाभ
दरअसल तेज आर्थिक विकास से देश में नए रोजगार और स्वरोजगार के बेहतर अवसर बनते हैं। इसके अलावा जब विनिर्माण और सेवा क्षेत्र में तेजी आती है, तो वेतन वृद्धि और उपभोग क्षमता बढ़ती है। वहीं मांग मजबूत रहने से निजी क्षेत्र के नए निवेश को भी लगातार प्रोत्साहन मिलता है।
हालांकि कच्चे तेल की कीमतों और मुद्रास्फीति पर सतर्क नजर बनाए रखना जरूरी होगा। इसलिए विशेषज्ञों का मानना है कि मजबूत घरेलू मांग आने वाले समय में मुख्य सहारा बनेगी।
वैश्विक दबावों के बीच कायम रही घरेलू बाजार की मजबूती
दरअसल अंतरराष्ट्रीय तनाव और जिंसों की कीमतों में अस्थिरता के बावजूद भारतीय बाजार मजबूत बना रहा। इसके अलावा निर्यात मोर्चे पर विपरीत परिस्थितियों के बाद भी घरेलू उपभोग ने विकास को संभाला। वहीं वित्तीय स्थिरता बनाए रखने में भारतीय रिज़र्व बैंक की रणनीतियों ने भी बड़ी भूमिका निभाई।
बहरहाल चालू वित्त वर्ष की आगामी तिमाहियों में भी भारतीय अर्थव्यवस्था की यह सकारात्मक गति बने रहने की संभावना है।



