इंदौर-उज्जैन मेट्रोपॉलिटन रीजन के सुनियोजित विकास के लिए प्रशासन ने 42 सेक्टरों पर केंद्रित विस्तृत मास्टर प्लान तैयार किया है। इसके तहत मालवा अंचल के बुनियादी ढांचे को विश्वस्तरीय रूप दिया जाएगा। दरअसल, सरकार ने पूरे इलाके का सटीक सिचुएशन एनालिसिस और विजन डॉक्यूमेंट तैयार करना शुरू कर दिया है।
छह जिलों और 38 तहसीलों तक फैला दायरा
इस महत्वाकांक्षी परियोजना में कुल छह जिलों को शामिल किया गया है। इनमें इंदौर, उज्जैन, देवास, धार, शाजापुर और रतलाम जिले शामिल हैं। दरअसल, इस रीजन के तहत 38 तहसीलें और 2,781 गांव आएंगे।
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इसके अलावा, इस पूरे क्षेत्र का भौगोलिक दायरा 16,000 वर्ग किलोमीटर से अधिक तय हुआ है। नतीजतन, इस विशाल योजना से लगभग सवा करोड़ की आबादी को सीधा लाभ मिलेगा।

इंदौर-उज्जैन मेट्रोपॉलिटन रीजन में 60 मिनट कनेक्टिविटी का विजन
दरअसल, परियोजना का मुख्य उद्देश्य सभी प्रमुख आर्थिक केंद्रों के बीच यात्रा का समय 60 मिनट तक सीमित करना है। इसके लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 48 किलोमीटर लंबे ग्रीनफील्ड 6-लेन कॉरिडोर का भूमिपूजन किया है।
गौरतलब है कि इस आधुनिक सड़क परियोजना पर लगभग 2,935 करोड़ रुपये खर्च होंगे। इसके अलावा, यह मार्ग धार्मिक और औद्योगिक क्लस्टरों को आपस में तेजी से जोड़ेगा।
पीथमपुर से देवास तक वाई-शेप मेट्रो नेटवर्क
यातायात को सुगम बनाने के लिए मेट्रो विस्तार की विस्तृत डीपीआर तैयार की गई है। इसके तहत पीथमपुर से इंदौर होते हुए उज्जैन और देवास की तरफ वाई-शेप ट्रैक बिछाया जाएगा।
वहीं, पब्लिक ट्रांसपोर्ट मजबूत होने से आम यात्रियों को तेज और सुरक्षित विकल्प मिलेगा। इसलिए पूरे मालवा क्षेत्र की कनेक्टिविटी को इस नेटवर्क से भारी मजबूती मिलेगी।

इंदौर-उज्जैन मेट्रोपॉलिटन रीजन में औद्योगिक पार्क और नए अवसर
मालवा क्षेत्र को ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने के लिए विशेष तैयारी की गई है। इसके लिए प्रशासन ने 13,500 हेक्टेयर से अधिक का विशाल औद्योगिक लैंड बैंक तैयार किया है।
इसके अलावा, रीजन में 14 नए औद्योगिक पार्क विकसित किए जाएंगे।
- पीथमपुर को इलेक्ट्रिक व्हीकल और उन्नत इंजीनियरिंग हब बनाना।
- उज्जैन की विक्रम उद्योगपुरी को मुख्य एंकर सिटी के रूप में विकसित करना।
- रतलाम में नया लॉजिस्टिक्स और ट्रेड नोड स्थापित करना।
बहरहाल, इस औद्योगिक विस्तार से स्थानीय युवाओं के लिए लगभग 5 लाख नए रोजगार के अवसर बनेंगे।
सिंहस्थ 2028 की तैयारी और लैंड पूलिंग मॉडल
दरअसल, संपूर्ण विकास कार्यों की गति आगामी सिंहस्थ 2028 को ध्यान में रखकर तेज की गई है। सरकार ने इसके लिए मध्यप्रदेश महानगरीय क्षेत्र नियोजन एवं विकास अधिनियम के तहत वैधानिक अधिकार तय किए हैं।
वहीं, किसानों की भागीदारी बढ़ाने के लिए अभिनव लैंड पूलिंग मॉडल लागू किया गया है। इसके तहत किसानों को 60 प्रतिशत विकसित जमीन वापस लौटाई जाएगी। नतीजतन, स्थानीय किसान भी इस आर्थिक तरक्की में सीधे साझेदार बनेंगे।



