नेपाल में बाढ़ के कारण मचे भारी हाहाकार के बीच राहत और बचाव कार्य युद्धस्तर पर जारी हैं। दरअसल विदेश मंत्रालय ने काठमांडू और आसपास के क्षेत्रों से अब तक 149 से अधिक भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकाल लिया है। इस बीच आपदा प्रभावित इलाकों में फंसे अन्य लोगों की तलाश लगातार की जा रही है।
नेपाल में बाढ़ के बीच भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकाला गया
दरअसल काठमांडू में आई भीषण तबाही के बाद भारतीय दूतावास और स्थानीय प्रशासन ने तुरंत मोर्चा संभाला। इसके अलावा 28 अगस्त को कैलाश मानसरोवर यात्रा से लौटे 21 तीर्थयात्रियों का दल सुरक्षित नई दिल्ली पहुंचा। बहरहाल विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने खुद इन सभी यात्रियों से मुलाकात की और उनका हालचाल जाना।
इसके साथ ही महाराष्ट्र के नागपुर समेत अन्य जिलों के 102 से अधिक तीर्थयात्रियों को सुरक्षित निकाला गया। गौरतलब है कि इन यात्रियों को बिहार सरकार की मदद से सीतामढ़ी बॉर्डर के रास्ते भारत लाया गया। इसके बाद पटना रेलवे स्टेशन से विशेष व्यवस्था के जरिए सभी को उनके गृह राज्य रवाना किया गया।

भारतीय वायुसेना ने ‘ऑपरेशन राहत’ के तहत भेजी सामग्री
दरअसल भारत सरकार ने नेपाल में मानवीय सहायता पहुंचाने के लिए ‘ऑपरेशन राहत’ शुरू किया है। इस अभियान के तहत भारतीय वायुसेना के सी-130जे हरक्यूलिस विमानों की चार विशेष उड़ानें काठमांडू भेजी गईं। नतीजतन इन उड़ानों के माध्यम से कुल 68.5 टन आपातकालीन राहत सामग्री नेपाल पहुंचाई जा चुकी है।
इसके अलावा भारतीय सेना की 13 सदस्यीय विशेषज्ञ टनल रेस्क्यू टीम भी नेपाल में तैनात की गई है। वहीं मेडिकल और फॉरेंसिक विशेषज्ञों का दल भी अत्याधुनिक उपकरणों के साथ राहत कार्यों में सहयोग कर रहा है। इसलिए मलबे और सुरंगों में फंसे लोगों को निकालने के अभियान में तेजी आई है।
लापता लोगों की तलाश के लिए 24 घंटे हेल्पलाइन सक्रिय
इस बीच विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि संचार व्यवस्था ठप होने से कई लोगों से संपर्क नहीं हो पा रहा है। दरअसल 275 भारतीय नागरिक और 128 भारतीय मूल के विदेशी नागरिक अभी लापता बताए जा रहे हैं। हालांकि दूतावास लगातार नेपाली एजेंसियों के साथ मिलकर उनकी तलाश में जुटा है।
इसके लिए भारत सरकार और दूतावास स्तर पर कई महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं:
- विदेश मंत्रालय ने नई दिल्ली में 24 घंटे संचालित होने वाला विशेष कंट्रोल रूम स्थापित किया है।
- काठमांडू और बीजिंग स्थित भारतीय दूतावास लगातार इमरजेंसी हेल्पलाइन नंबर संचालित कर रहे हैं।
- लापता नागरिकों के परिजनों को सटीक जानकारी देने के लिए दोनों देशों की टीमें समन्वय बना रही हैं।

नेपाल में बाढ़ से भारी तबाही और जनजीवन अस्त-व्यस्त
नेपाल में बाढ़ और भूस्खलन के कारण अब तक 781 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है। इसके अलावा राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अनुसार 2,500 से अधिक लोग अभी भी लापता हैं। दरअसल नेपाल-तिब्बत सीमा पर ग्लेशियर टूटने के बाद भारी मात्रा में पानी और कीचड़ नीचे की ओर बहा था।
नतीजतन इस जलप्रलय की चपेट में आकर कई प्रमुख सड़कें, पुल और जलविद्युत परियोजनाएं पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गईं। इसके साथ ही मध्य नेपाल के कई कस्बे मलबे में तब्दील हो चुके हैं। बहरहाल नेपाली सेना के 5,000 जवानों समेत 11,000 से अधिक सुरक्षाकर्मी राहत अभियान में रात-दिन जुटे हुए हैं।
सीमावर्ती इलाकों में प्रशासन की सतर्कता और भविष्य की तैयारी
दरअसल बिहार और उत्तर प्रदेश से लगे सीमावर्ती इलाकों में भी अतिरिक्त सतर्कता बरती जा रही है। इसके अलावा सीमा चौकियों पर डॉक्टरों और सहायता दलों को तैनात किया गया है ताकि लौटने वाले नागरिकों को तुरंत चिकित्सा मिल सके। नतीजतन सीमा पर पहुंचते ही लोगों को भोजन और परिवहन की सुविधा दी जा रही है।
फिलहाल दोनों देशों के अधिकारी प्रभावित क्षेत्रों से हर एक नागरिक को सुरक्षित बाहर निकालने पर ध्यान दे रहे हैं। इसके बाद क्षतिग्रस्त बुनियादी ढांचे और संपर्क मार्गों को बहाल करने की प्रक्रिया शुरू होगी।



