इंदौर। अपर आयुक्त (राजस्व) के एआई से फर्जी आदेश बनवाने के मामले की जांच अभी चल रही है। पता चला है कि इसमें दो बाबू और एक पटवारी का हाथ है। अब इनके खिलाफ सख्त एक्शन की तैयारी है।
उल्लेखनीय है कि खजराना क्षेत्र की जमीन पर कब्जे को लेकर चल रहे विवाद में अपर आयुक्त (राजस्व ) की अदालत के नाम से एक फर्जी आदेश एआई से तैयार करवा लिया गया था। आदेश तैयार कर उसे तहसीलदार न्यायालय में पेश कर दिया गया। वहां पता चला कि यह आदेश फर्जी है तो पुलिस में शिकायत की गई।
👉 यह भी पढ़ें:
- IAS भरत यादव ने संभाला जनसंपर्क सचिव का पदभार, कई विभागों में निभा चुके हैं महत्वपूर्ण भूमिका
- भूमाफियाओं के आगे एक बार फिर सब ने टेके घुटने, अयोध्यापुरी की जमीन नहीं बचा सका प्रशासन
- विधायक गोलू शुक्ला के पंडितजी से अभद्रता पड़ी भारी, एरोड्रम थाने के टीआई सहित सात पुलिसकर्मी सस्पेंड
- पतंजलि गाय के घी का एक बैच असुरक्षित, मध्यप्रदेश में बाजार से वापस लेने के आदेश
- यशवंत क्लब में निर्माण टेंडर पर विवाद : जो सदस्य हर फैसले में रहे साथ, वही अब उठा रहे आपत्ति
- इंदौर एलिवेटेड कॉरिडोर पर हाईकोर्ट में अंतिम सुनवाई पूरी, अब अंतिम आदेश का इंतजार
फर्जी आदेश तहसीलदार न्यायालय में पेश
7 अगस्त को अपर आयुक्त का फर्जी आदेश तहसीलदार न्यायालय में पेश कर उसके आधार पर जमीन का कब्जा दिलाने की मांग की गई। इसके बाद 20 अगस्त को आदेश के आधार पर कब्जा दिलाने के लिए राजस्व अधिकारियों की टीम गठित कर दी गई। टीम को जमीन का कब्जा दिलाने की कार्रवाई करनी थी।
हाईकोर्ट पहुंचा मामला तो उठे सवाल
23 अगस्त को मामला हाईकोर्ट पहुंचा। सुनवाई के दौरान आदेश की सत्यता पर सवाल उठे। इसके बाद प्रशासन ने आदेश की जांच शुरू की। 24 अगस्त को जांच में आदेश के फर्जी होने की बात सामने आई और कब्जे की कार्रवाई रोक दी गई। इसके संबंधित अधिकारियों से पूछताछ की गई। पुलिस को भी मामले की जानकारी दी गई।
डीसीपी ने कहा-वकील के खिलाफ केस दर्ज
एडिशनल डीसीपी जोन चार दिशेष अग्रवाल ने बताया कि तहसीलदार जूनी इंदौर ने पंढरीनाथ थाने में एक आवेदन प्रस्तुत किया था। इसमें कहा गया था कि पुष्प रत्न रियलटी प्राइवेट लिमिटेड अंकित जैन की तरफ से अधिवक्ता आशीष अग्रवाल ने जमीन पर कब्जे का एक कूटरचित दस्तावेज प्रस्तुत किया। यह अपर आयुक्त राजस्व के कार्यालय से जारी होना बताया गया। इसके आधार पर वकील आशीष अग्रवाल पर केस दर्ज किया गया। यह करीब 50 हजार वर्गफुट की जमीन पर कब्जे का मामला है।
दो बाबू और एक पटवारी शामिल
इस पूरे मामले में दो बाबू और एक पटवारी की भूमिका संदिग्ध बताई जा रही है। सूत्र बताते हैं कि बाबू अखिलेश त्यागी और राजकिशोर इस पूरे प्रकरण में शामिल हैं। इसके अलावा पटवारी प्रभात मिश्रा भी इनका सहयोगी बताया जा रहा है। राजकिशोर पिछले 15 साल से एक ही जगह पदस्थ है और पहले भी वह विवादों में रहा है।
बाबुओं ने चेक नहीं किए कागजात
जब वकील आशीष अग्रवाल फर्जी आदेश लेकर तहसीलदार के न्यायालय में पहुंचा, तब भी इन बाबुओं ने कागज ठीक से चेक नहीं किए। दोनों ने आदेश निकाल दिए। अगर मामला पकड़ा नहीं जाता तो फर्जी आदेश पर ही कब्जा मिल गया होता।
राऊ से हटाया गया था त्यागी
बाबू अखिलेश त्यागी पहले भी विवादों में रहा है। वह राऊ में था तब उसके खिलाफ ठेका लेने से लेकर कई तरह की शिकायतें हुई थीं। इसके बाद उसे वहां हटा दिया गया था। बताया जाता है कि त्यागी और राजकिशोर दोनों सीमांकन के लिए खुलेआम पैसे लेते हैं।



