Parliament Monsoon Session 2026 ; All Party Meeting: संसद के मानसून सत्र 2026 से एक दिन पहले बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में विपक्षी एकजुटता और संसदीय नियमों को लेकर बड़ा विवाद सामने आया। टीएमसी (TMC) के कथित बागी सांसदों को बैठक में बुलाए जाने के विरोध में कई विपक्षी दलों ने बैठक से वॉकआउट कर दिया।
विपक्षी दलों का आरोप है कि जब तक सांसदों के अलग गुट या विलय को लेकर औपचारिक फैसला नहीं हुआ है, तब तक उन्हें अलग मान्यता देना संसदीय नियमों और संवैधानिक प्रक्रिया के खिलाफ है।
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महुआ मोइत्रा ने क्या कहा?
टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने दावा किया कि कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, डीएमके, झारखंड मुक्ति मोर्चा, आम आदमी पार्टी, नेशनल कॉन्फ्रेंस, वाम दलों और शिवसेना (यूबीटी) समेत कई विपक्षी दलों ने विरोध जताते हुए सर्वदलीय बैठक से बाहर निकलने का फैसला किया।
उन्होंने आरोप लगाया कि एक कथित गैर-मान्यता प्राप्त गुट को बैठक में शामिल किया गया। महुआ मोइत्रा के मुताबिक, संसदीय रिकॉर्ड में अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस की मौजूदा ताकत 28 सांसद दिखाई गई है, जबकि कथित 20 बागी सांसदों के अलग होने को लेकर लोकसभा अध्यक्ष की ओर से अभी अंतिम मंजूरी नहीं दी गई है।
उन्होंने यह भी कहा कि इन सांसदों की अयोग्यता से जुड़ी याचिकाएं लंबित हैं। महुआ मोइत्रा ने 91वें संविधान संशोधन का हवाला देते हुए सवाल उठाया कि जब अलग गुट बनने की कोई संवैधानिक गुंजाइश नहीं है, तो इन सांसदों को सर्वदलीय बैठक में किस आधार पर आमंत्रित किया गया।

‘संविधान की रक्षा के लिए वॉकआउट’
कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने कहा कि उनकी पार्टी ने संविधान की रक्षा के लिए बैठक से वॉकआउट किया है। उनका तर्क था कि अंतिम फैसला आने से पहले ही किसी निष्कर्ष पर पहुंचना असंवैधानिक है।
वहीं, शिवसेना (यूबीटी) सांसद अरविंद सावंत ने भी कथित बागी सांसदों को दी गई मान्यता पर सवाल उठाते हुए कहा कि इसका कानूनी आधार स्पष्ट होना चाहिए।

AAP ने भी उठाए सवाल
आम आदमी पार्टी के सांसद एनडी गुप्ता ने भी संसदीय मान्यता और सीट आवंटन को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि उनकी पार्टी से जुड़े एक अलग मामले में भी सांसदों के अलग किए जाने को लेकर याचिका लंबित है, लेकिन इसके बावजूद उन्हें अलग सीटें आवंटित की गई हैं।
उन्होंने इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया और संसदीय परंपराओं के लिए गंभीर मुद्दा बताया।
20 जुलाई से शुरू होगा संसद का मानसून सत्र
संसद का मानसून सत्र 20 जुलाई 2026 से 13 अगस्त 2026 तक चलेगा। इस दौरान दोनों सदनों की कुल 19 बैठकें प्रस्तावित हैं।
केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने सत्र की घोषणा करते हुए कहा था कि मानसून सत्र के दौरान राष्ट्रीय महत्व के मुद्दों पर सार्थक चर्चा और बहस होगी तथा महत्वपूर्ण निर्णय लिए जाएंगे।
लेकिन सत्र शुरू होने से पहले ही सर्वदलीय बैठक में विपक्ष के वॉकआउट ने संकेत दे दिया है कि आने वाले दिनों में संसद के अंदर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच टकराव देखने को मिल सकता है।
क्या मानसून सत्र में और बढ़ेगा सियासी टकराव?
सर्वदलीय बैठक से विपक्ष के वॉकआउट के बाद अब बड़ा सवाल यह है कि क्या संसद का मानसून सत्र 2026 भी हंगामेदार रहने वाला है? क्या बागी सांसदों की मान्यता का विवाद सदन की कार्यवाही को प्रभावित करेगा या सरकार और विपक्ष के बीच इस मुद्दे पर कोई समाधान निकल पाएगा?
आपको क्या लगता है—क्या किसी सांसद या गुट को मान्यता देने से पहले अंतिम संवैधानिक और कानूनी प्रक्रिया पूरी होना जरूरी है? क्या विपक्ष का सर्वदलीय बैठक से वॉकआउट सही कदम था? अपनी राय कमेंट में जरूर बताएं।



