सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को शनिवार को दिल्ली के जंतर-मंतर से पुलिस द्वारा अस्पताल ले जाए जाने के बाद राजनीतिक और सामाजिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। अब रविवार को वांगचुक की ओर से एक लिखित संदेश सामने आया है, जिसमें उन्होंने खुद को ‘अवैध हिरासत’ में रखे जाने का आरोप लगाया है।
वांगचुक का यह संदेश उनकी पत्नी गीतांजलि के माध्यम से सामने आया। संदेश में उन्होंने लोगों से 20 जुलाई को प्रस्तावित संसद मार्च में शामिल होने और इसे सफल बनाने की अपील की है।
👉 यह भी पढ़ें:
- Jantar Mantar : सोनम वांगचुक से मिले अरविंद केजरीवाल, कहा-बात नहीं सुनी तो सरकार नहीं बचेगी
- Jantar Mantar Protest पर सियासी संग्राम! मनीष सिसोदिया का कांग्रेस पर बड़ा हमला, बोले- ‘युवाओं की आवाज से क्यों घबरा गई कांग्रेस?’
- आबकारी घोटाले में क्लीन चिट मिलने के बाद जंतर-मंतर पर गरजे अरविन्द केजरीवाल- जज साहब ने मोदी जी और भाजपा के झूठ पर तमाचा मारा
- जंतर-मंतर से अरविंद केजरीवाल का भाजपा पर हमला-मोदीजी के ‘जहां झुग्गी-वहां मकान’ का मतलब ‘जहां झुग्गी-वहां मैदान था’
- वक्फ संसोधन बिल के खिलाफ दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन, कई विपक्षी दलों के नेता भी पहुंचे
- दिल्ली ; सोनम वांगचुक को नहीं मिली जंतर मंतर पर विरोध प्रदर्शन की अनुमति
‘आज़ादी का दूसरा आंदोलन, भय मुक्त भारत’
सोनम वांगचुक की ओर से जारी संदेश में कहा गया है—
‘आज़ादी का दूसरा आंदोलन, भय मुक्त भारत, अन्याय मुक्त भारत। 20 जुलाई को होने वाले संसद मार्च को सफल बनाएं।’
इस संदेश के जरिए लोगों से संसद मार्च में बड़ी संख्या में शामिल होने की अपील की गई है। वांगचुक के समर्थकों का कहना है कि यह मार्च उनके आंदोलन और उनकी मांगों को राष्ट्रीय स्तर पर मजबूती देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकता है।
अस्पताल ले जाए जाने के बाद अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल
वहीं, सोनम वांगचुक को अस्पताल ले जाने के बाद अभिजीत दीपके ने अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू कर दी है। इससे आंदोलन को लेकर तनाव और बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।
वांगचुक के समर्थक उनकी हिरासत और आंदोलन से जुड़े घटनाक्रम को लेकर सवाल उठा रहे हैं। दूसरी ओर, प्रशासन की कार्रवाई को लेकर भी चर्चा तेज है।
20 जुलाई का संसद मार्च क्यों है अहम?
सोनम वांगचुक की ओर से 20 जुलाई के संसद मार्च को सफल बनाने की अपील के बाद अब सभी की नजरें इस प्रदर्शन पर टिकी हैं। यह देखना अहम होगा कि संसद मार्च में कितने लोग शामिल होते हैं और सरकार इस पूरे घटनाक्रम पर क्या प्रतिक्रिया देती है।
सोनम वांगचुक लंबे समय से लद्दाख के अधिकारों, पर्यावरण संरक्षण और संवैधानिक सुरक्षा जैसे मुद्दों को लेकर अपनी आवाज उठाते रहे हैं। उनके आंदोलन से जुड़े घटनाक्रमों पर देशभर में लगातार चर्चा होती रही है।
क्या 20 जुलाई का संसद मार्च बनेगा बड़ा आंदोलन?
सोनम वांगचुक की ओर से सामने आए इस संदेश के बाद अब सवाल उठ रहा है कि क्या 20 जुलाई का संसद मार्च एक बड़े जनआंदोलन का रूप ले सकता है? क्या सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच बातचीत से कोई समाधान निकलेगा?
आपको क्या लगता है—क्या सोनम वांगचुक के आंदोलन की मांगों पर सरकार को गंभीरता से बातचीत करनी चाहिए? क्या 20 जुलाई का संसद मार्च लद्दाख के मुद्दों को राष्ट्रीय बहस के केंद्र में ला पाएगा? अपनी राय कमेंट में जरूर बताएं।



