जंतर-मंतर पर हुए युवा प्रदर्शन के बाद विपक्षी राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है। आम आदमी पार्टी (AAP) के वरिष्ठ नेता मनीष सिसोदिया ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया है कि उसने शिक्षा व्यवस्था को लेकर आंदोलन कर रहे युवाओं का समर्थन करने के बजाय उनका मजाक उड़ाया।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर किए गए एक पोस्ट में सिसोदिया ने कहा कि देश का Gen Z और युवा वर्ग मौजूदा शिक्षा व्यवस्था और परीक्षा प्रणाली से परेशान है, लेकिन जब हजारों युवा केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर जंतर-मंतर पहुंचे तो कांग्रेस ने उनकी भावनाओं को समझने के बजाय उनका मजाक बनाया।
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सिसोदिया ने आरोप लगाया कि CBSE, NEET और CUET जैसी महत्वपूर्ण परीक्षाओं की विश्वसनीयता पर लगातार सवाल उठ रहे हैं, लेकिन कांग्रेस इस मुद्दे पर युवाओं के साथ खड़ी नजर नहीं आई।
उन्होंने लिखा, “कांग्रेस और उसके समर्थक इस बात से परेशान हैं कि देश का युवा बिना किसी राजनीतिक झंडे के अपनी आवाज़ उठाने लगा है। पूरे दिन सोशल मीडिया पर इन युवाओं का मजाक उड़ाया गया, लेकिन किसी बड़े कांग्रेस नेता ने उनकी मांगों का खुलकर समर्थन नहीं किया।”
यह बयान उस समय आया जब कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व में जंतर-मंतर पर शिक्षा व्यवस्था में कथित गड़बड़ियों और परीक्षा प्रबंधन को लेकर प्रदर्शन किया गया। प्रदर्शनकारियों ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग करते हुए सरकार को अल्टीमेटम भी दिया।
दिलचस्प बात यह है कि इसी दिन यूथ कांग्रेस ने भी शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर अलग प्रदर्शन किया। इसके बावजूद विपक्षी दलों के बीच एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह विवाद केवल शिक्षा व्यवस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि युवाओं के बीच राजनीतिक प्रभाव और नेतृत्व की लड़ाई का संकेत भी हो सकता है।
सबसे बड़ा सवाल…
क्या युवाओं के आंदोलनों को राजनीतिक दलों के समर्थन की जरूरत है, या नई पीढ़ी अब बिना किसी पार्टी के झंडे के अपनी लड़ाई लड़ना चाहती है?
आपकी क्या राय है? क्या कांग्रेस ने युवाओं के मुद्दों को गंभीरता से नहीं लिया, या यह सिर्फ एक राजनीतिक आरोप है? अपनी राय कमेंट में जरूर बताएं।



