नई दिल्ली। नीट पेपर लीक मामले को लेकर जंतर-मंतर पर पिछले दिनों हुए प्रदर्शन पर सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को आदेश जारी किए हैं। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की पीठ ने अपने आदेश में कहा कि किसी भी प्रदर्शनकारी छात्र पर कोई कार्रवाई नहीं होनी चाहिए। चीफ जस्टिस ने इससे पहले सुनवाई के दौरान अपनी टिप्पणी में कहा था कि लोकतंत्र में प्रदर्शन होते रहते हैं। उन्होंने कहा कि मामलों की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच हो।
सुप्रीम कोर्ट ने देशभर में किसी भी छात्र के खिलाफ कठोर कार्रवाई पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने 18 साल से कम के छात्रों को तुंरत रिहा करने के आदेश दिया है। हालांकि, आपराधिक इतिहास वाले प्रदशर्नकारियों को कोई राहत नहीं मिलेगी। कोर्ट ने कहा है कि प्रदर्शन से जुड़े सभी सीसीटीवी फुटेज, ड्रोन रिकॉर्डिंग, वायरलेस संचार और अन्य संबंधित रिकॉर्ड सुरक्षित रखें जाएं।
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डिजिलट डेटा और जानकारी सार्वजनिक न करें
अदालत ने कहा कि प्रदर्शनकारी छात्रों का डिजिटल डेटा और व्यक्तिगत जानकारी सार्वजनिक नहीं की जाएगी। कोर्ट ने केंद्र और सात राज्यों को नोटिस भी जारी किया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सरकारों का पक्ष जानने के बाद गठित होगी हाई लेवल कमेटी। कोर्ट ने कहा कि वह हालिया घटनाओं की पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी जांच कराएगा।
चीफ जस्टिस ने कही जिम्मेदारी तय करने की बात
चीफ जस्टिस ने सुनवाई के दौरान कहा कि जिसने भी ज्यादती की है उसके खिलाफ कानून अपना काम करेगा। उन्होंने कहा कि इसकी जांच पूरी तरह से निष्पक्ष और स्वतंत्र होनी चाहिए। चीफ जस्टिस ने कहा कि अगर जिम्मेदारी तय नहीं की गई तो जांच का कोई मतलब नहीं।
सुनवाई के दौरान पेलेट गन जिक्र
सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि सभी पिटीशन में कुछ आरोप हैं, लेकिन अगर आप मोटे तौर पर देखें तो एक आरोप है पेलेट गन का इस्तेमाल, जिसकी वजह से 19 साल के लड़के की आंखों की रोशनी चली गई। इलेक्ट्रिक बैटन के इस्तेमाल के मामले के आरोप हैं। एक युवती को आईसीयू में भर्ती कराया गया। कील वाली लाठियों के इस्तेमाल से जान का खतरा का आरोप है। एक मीडियाकर्मी पर हमले का भी मामला है। उस पर बेरहमी से हमला किया गया। फिर सिविल ड्रेस में पुलिस ने हिंसा का आरोप है। एक और मामला जिसमें युवती को बिना उकसावे के पुलिसवाले ने थप्पड़ मारा था।
सीजेआई ने कहा-मैं नहीं समझता कि छात्रों ने हिंसा की
केंद्र और दिल्ली सरकार की तरफ से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता पेश हुए। उन्होंने कहा कि सरकार छात्रों पर बल प्रयोग को हल्के में नहीं ले रही है। ऐसे में कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन इस प्रदर्शन के दौरान 250 पुलिसकर्मी भी घायल हुए हैं। सही जांच कर सच्चाई बाहर आनी चाहिए। चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने मेहता को टोकते हुए कहा कि इसीलिए हम चाहते हैं कि जांच हो। तब मेहता ने कहा कि मैं नहीं समझता कि छात्रों ने हिंसा की। इसमें असमाजिक तत्व घुसे होंगे। उन्होंने कहा कि हमें असामाजिक तत्वों का डेटा पेश करेंगे। उन्होंने दावा किया ऐसे लोग प्रदर्शन में शामिल थे जो हत्या, रेप और NDPS केसों में शामिल थे।



