इंदौर। भाजपा प्रदेश संगठन ने पार्षद जीतू यादव को फिर से महापौर परिषद में वापस ले लिया है। इससे पहले संगठन ने उनका पार्टी से निष्कासन खत्म किया था। अब इस फैसले के खिलाफ पार्षद कमलेश कालरा धरने पर बैठ गए हैं।
उल्लेखनीय है कि पार्षद कमलेश कालरा से हुए कथित विवाद के बाद एमआईसी सदस्य जीतू यादव को पार्टी से बाहर कर दिया था। इस मामले में पुलिस से जीतू यादव को क्लिन चिट मिल गई थी। इसके बाद काफी जद्दोजहद के बाद उनकी भाजपा में वापसी हुई। कल यानी शुक्रवार को भाजपा प्रदेश संगठन ने जीतू यादव को महापौर परिषद में वापस लेने का फैसला लिया था।
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संगठन के फैसले का विरोध क्यों
इस मामले में बड़ा सवाल यह है कि जब पुलिस से क्लिन चिट मिलने के बाद जीतू यादव की भाजपा में वापसी हुई। यह फैसला भी प्रदेश संगठन का था। इसके बाद संगठन ने जीतू की महापौर परिषद में भी वापसी कराई। इसका मतलब साफ है कि प्रदेश संगठन जीतू यादव को कालरा से हुए विवाद में दोषी नहीं मान रहा।
इंदौर में संगठन का कोई डर नहीं
प्रदेश संगठन के फैसले का पार्षद कमलेश कालरा विरोध कर रहे हैं। इसका मतलब साफ है कि इंदौर में संगठन का कोई डर नहीं। जिस पार्षद, नेता व कार्यकर्ता को जो मर्जी कर रहा है। इंदौर कालिख कांड के बाद तो कार्यकर्ताओं और नेताओं के हौसले और बढ़ गए हैं।
प्रदेश अध्यक्ष को लेना चाहिए संज्ञान
भाजपा के नेता कह रहे हैं कि इस तरह से तो संगठन चलाना मुश्किल है। इस मामले में प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल को संज्ञान लेकर कड़ा मैसेज देना चाहिए। अगर यही हाल रहा तो कल पार्टी का कोई भी नेता संगठन के फैसले के खिलाफ धरने पर बैठ जाएगा। इसलिए यह जरूरी है कि मामले को समझ कर तुरंत इस पर एक्शन लेना चाहिए।
सिर्फ बड़े आयोजनों से नहीं चलेगा संगठन
भाजपा के नेता कह रहे हैं कि प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल इंदौर में बड़े आयोजन करवा कर ही खुश हो रहे हैं। लाखों-करोड़ों खर्च कर हो रहे ऐसे आयाजनों की सफलता पर तालियां बजाने से कुछ नहीं होने वाला। प्रदेश अध्यक्ष को देखना चाहिए कि इंदौर में संगठन की क्या स्थिति है।
पार्षद बेस्ड कर दें पार्टी
भाजपा नेताओं का यह भी कहना है कि जिस तरह वर्तमान में विधायक बेस्ट पार्टी चल रही है, उसी तरह से अब इसे पार्षद बेस्ड कर देना चाहिए। पार्षद जो कहे वही सही है, बाकी नेता गलत हैं। पार्टी के वरिष्ठ नेता कह रहे हैं कि इस तरह से तो इंदौर में संगठन चलाना मुश्किल है।
चार नंबर कर रहा था पुरजोर विरोध
उल्लेखनीय है कि भोपाल में इंदौर के कुछ नेता और विधायक शुक्रवार को प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल से मिले थे। इसके बाद जीतू यादव की एमआईसी में वापसी हुई थी। पार्षद जीतू यादव, विधायक रमेश मेंदोला के खास हैं। उनके प्रयासों से ही जीतू की भाजपा में वापसी हुई थी। जीतू यादव की वापसी का सबसे ज्यादा विरोध चार नंबर खेमा कर रहा था, लेकिन उनकी नहीं सुनी गई।
महापौर भी कर रहे थे खेला
करीब 18 महीने बाद जीतू यादव का निष्कासन समाप्त हुआ था। जिस दिन यह आदेश आया उसके कुछ ही घंटों पहले महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने बड़ा खेला कर दिया। उन्होंने करीब 18 महीने से खाली जीतू यादव के विभाग की जिम्मेदारी निरंजन सिंह गुड्डू को सौंप दी। इसके पीछे महापौर का तर्क था कि काम का नुकसान हो रहा था। यहां बड़ा सवाल यह है कि जब काम का नुकसान हो रहा था, तो यह फैसला पहले क्यों नहीं लिया गया?
जीतू यादव को पुलिस से क्लिन चिट
भाजपा संगठन ने तो जीतू यादव को बिना घटनाक्रम की ठीक से जांच-पड़ताल किए ही सिर्फ आरोपों पर पार्टी से बाहर कर दिया था। लेकिन, इस विवाद की जांच में पुलिल के हाथ कुछ नहीं लगा। पुलिस जांच में पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलने के बाद जीतू यादव का नाम पूरक चालान से हटा दिया था। पुलिस ने कोर्ट में पेश किए गए पूरक चालान में स्पष्ट किया है कि घटना के दौरान जीतू यादव की मौजूदगी या उनकी प्रत्यक्ष भूमिका के प्रमाण नहीं मिले हैं। पुलिस की क्लिन चिट के बाद जीतू यादव की पार्टी में वापसी हुई है।



