👉 यह भी पढ़ें:
- Bihar : बांकीपुर उपचुनाव के बीच राजद को तगड़ा झटका, प्रवक्ता मृत्युंजय तिवारी ने दिया इस्तीफा
- Bihar के बांकीपुर उप चुनाव में जेजेडी उम्मीदवार वीणा मानवी का नामांकन रद्द, तेज प्रताप यादव ने षड्यंत्र बताया
- Bihar में विधवा पेंशन के 1100 रुपए लेने बैंक पहुंची महिला के खाते में 740 करोड़, बैलेंस देख बिगड़ी तबीयत
- इंदौर के यशवंत क्लब के कश्मकश भरे चुनाव में गौरानी–सचदेवा पैनल की जीत, पम्मी छाबड़ा के पैनल ने भी दी जोरदार टक्कर
- यशवंत क्लब के चुनाव रविवार 28 जून को : हर साल 10 सदस्यों को मिलेगी सदस्यता, एजीएम ने प्रस्ताव किया पारित
- नीतीश कुमार बने जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष, पार्टी की बैठक में लगी मुहर, बिहार की कमान एक बार फिर कुशवाह के हाथ
0:00 left
पटना। बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजे आ गए हैं और वहां की जनता ने एक बार फिर एनडीए को अपना भारी समर्थन दिया है। एनडीए की जीत में इस बार महिलाओं का बहुत बड़ा हाथ है। इसके साथ ही बिहार की जनता ने स्पष्ट कर दिया है कि अब वे जंगलराज नहीं चाहते। जनता ने एक सिरे से विपक्ष के वोट चोरी के आरोपों को भी नकार दिया है। खबर लिखे जाने तक एनडीए 202 सीटों पर आगे थी, जबकि महागठबंधन को मात्र 35 सीटें मिलती दिख रही थीं और अन्य 6 सीटों पर आगे थे।
बिहार विधानसभा चुनाव के पूरे कैंपेन को याद कीजिए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह से लेकर सबने यही बार–बार दोहराया कि अगर महागठबंधन की वापसी होगी तो फिर जंगलराज आ जाएगा। जाति–जाति में बंटे बिहार में लोग भले ही अपने जाति के लोगों को सत्ता पर काबिज चाहते हैं, लेकिन उनके दिमाग से अब भी लालू यादव के जंगलराज का डर नहीं हटा है।
जीविका दीदी योजना ने दिखाया कमाल
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने चुनाव से पहले जीविका दीदी योजना का एलान किया था। इसके तहत सरकार की ओर से 1.5 करोड़ से अधिक महिलाओं को 10 हजार रुपये की सहायता राशि भेजी गई थी। शायद इसी कारण महिलाएं बूथ पर पहुंची और एनडीए के पक्ष में मतदान किया। आंकड़ों के मुताबिक महिलाओं का मतदान प्रतिशत 71.6 फीसदी रहा था, जबकि पुरुषों का मतदान प्रतिशत 62.8 फीसदी ही रहा।
विपक्ष के पास कोई खास मुद्दा नहीं
महागठबंधन के पास नीतीश कुमार या एनडीए के खिलाफ कोई खास मुद्दा नहीं था। राहुल गांधी ने वोटर अधिकार यात्रा निकाली। हर सभा में वोट चोरी के आरोप लगाए, लेकिन लोगों को यह बड़ा मुद्दा नहीं लगा। लोगों को इससे बड़ा मुद्दा की उनकी जानमाल की रक्षा कैसे होगी? व्यापारियों को जंगलराज याद आ गया, जब उनकी दुकानों से नई गाड़ियां तक कट्टे की नोंक पर उठा कर ले जाई जाती थीं। पीएम मोदी ने भी अपनी हर सभा में कट्टे का जिक्र जरूर किया और जंगलराज की तुलना ने नीतीश कुमार के सुशासन से की।
फेल हो गए चुनावी रणनीतिकार पीके
इस चुनाव में दो नए चेहरे भी थे। एक तो चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर और लालू यादव के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव। परिणाम बता रहे हैं कि दोनों बेअसर रहे। विशेषकर प्रशांत किशोर जो कई बड़े नेताओं को चुनाव जीतवाने का दावा करते रहे हैं, शायद अपने गृह प्रदेश बिहार को ठीक से समझ नहीं पाए।
पीएम मोदी को निशाना बनाना पड़ा भारी
महागठबंधन के सहयोगी दल कांग्रेस ने चुनाव के दौरान वोट चोरी को बड़ा मुद्दा बनाया। राहुल गांधी की वोटर अधिकार यात्रा के दौरान दरभंगा में उनके मंच से प्रधानमंत्री की मां के खिलाफ अपशब्द कहे जाने का मामला भी उछला। इसके बाद राहुल गांधी ने छठ पूजा को लेकर पीएम मोदी के डांस वाली टिप्पणी की। इसे पीएम मोदी सहित पूरी भाजपा ने मंचों से भुनाया। इसका असर भी मतदाताओं पर पड़ा।
एनडीए ने गढ़ा नया जातीय समीकरण
एनडीए ने इस चुनाव में नया जातीय समीकरण गढ़ने की कोशिश की। पारंपरिक मुस्लिम–यादव (MY) समीकरण को काटते हुए महिला और ईबीसी (अत्यंत पिछड़ा वर्ग) समूहों पर जोर दिया, जिससे एक नया ‘ME’ (महिला–ईबीसी) फैक्टर बना। नीतीश कुमार ने ईबीसी में अपना मजबूत आधार बनाए रखा, जबकि भाजपा ने सवर्णों को मजबूत किया। लोजपा (रामविलास) और हम (एस) ने दलितों और पिछड़ा वर्ग की अपील को बढ़ाया। इस चुनाव में करीब 14 लाख नए युवा मतदाता जुड़े, जिन्होंने राजद को नकारते हुए एनडीए के पक्ष में मतदान किया।



