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नई दिल्ली। बिहार के समस्तीपुर में पीएम नरेंद्र मोदी ने कर्पूरी ठाकुर को लेकर राजद और कांग्रेस पर निशाना साधा है। इस पर पलटवार करते हुए कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने पीएम मोदी से तीन सवाल पूछे हैं। इसमें से एक सवाल है कि क्या जनसंघ और आरएसएस ने मिलकर कर्पूरी ठाकुर की सरकार नहीं गिराई थी?
जयराम रमेश ने एक्स पर पोस्ट में लिखा कि कर्पूरी ठाकुर जी ने 1978 में पिछड़ों को 26 प्रतिशत आरक्षण देकर सामाजिक न्याय की ऐतिहासिक नींव रखी थी। क्या यह सही नहीं है कि आपकी पार्टी के वैचारिक पूर्वज –जनसंघ और आरएसएस ने उनकी आरक्षण नीति का खुलकर विरोध किया था? क्या उस समय जनसंघ,आरएसएस ने सड़कों पर कर्पूरी ठाकुर जी के खिलाफ अपमानजनक और घृणा से भरे नारे नहीं लगाए गए थे? क्या उस दौर में जनसंघ, आरएसएस के प्रमुख नेताओं ने कर्पूरी ठाकुर सरकार को अस्थिर करने और गिराने में अहम भूमिका नहीं निभाई थी? जयराम रमेश ने यह भी पूछा कि क्या प्रधानमंत्री आज उस ऐतिहासिक गलती के लिए अपने वैचारिक पूर्वजों, जनसंघ और आरएसएस की ओर से माफी मांगेंगे?
जयराम रमेश ने पूछा कि क्या आपने कांग्रेस पार्टी की जाति जनगणना की माँग को “अर्बन नक्सल एजेंडा” कहकर दलितों, पिछड़ों, अति–पिछड़ों और आदिवासियों के अधिकारों का अपमान नहीं किया? क्या आपकी सरकार ने संसद (20 जुलाई 2021) और सर्वोच्च न्यायालय (21 सितंबर 2021) में जाति जनगणना करने से इनकार नहीं किया? बहुसंख्यक वंचित वर्गों के करोड़ों लोगों की इस वैध माँग को आपकी सरकार ने लंबे समय तक जानबूझकर नज़रअंदाज़ किया – क्या आप इससे इंकार करेंगे?
इसके साथ ही जयराम रमेश ने अपने तीसरे सवाल में पूछा कि आपने और आपके ‘ट्रबल इंजन’ सरकार ने बिहार के जातिगत सर्वे के बाद पिछड़ों, अति पिछड़ों, दलितों और आदिवासियों के आरक्षण को 65% करने के विधानसभा प्रस्ताव को 9वीं अनुसूची में क्यों नहीं डाला? कांग्रेस सरकार ने 1994 में तमिलनाडु के 69% आरक्षण को जैसे 9वीं अनुसूची में शामिल कर सुरक्षा दी थी, वैसे ही बिहार के 65% आरक्षण को सुरक्षा क्यों नहीं दी?



