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मादुरो की गिरफ्तारी के बाद ट्रंप प्रशासन का सख्त रुख, अब क्यूबा को चेतावनी—अमेरिकी विदेश मंत्री के बयान से बढ़ा तनाव
वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी के बाद अमेरिका की ट्रंप सरकार के तेवर और तीखे हो गए हैं। इस कार्रवाई के बाद अब अमेरिका ने दक्षिण अमेरिका के अन्य देशों को भी सख्त संदेश देना शुरू कर दिया है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने क्यूबा को खुली चेतावनी देते हुए कहा है कि वेनेजुएला की घटना के बाद अगर वह क्यूबा सरकार में होते, तो निश्चित तौर पर चिंतित होते।

रुबियो ने क्यूबा की सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा, “क्यूबा पूरी तरह तबाह हो चुका है। वहां एक अयोग्य सरकार है, जिसे एक वृद्ध व्यक्ति चला रहा है। क्यूबा की कोई मजबूत अर्थव्यवस्था नहीं बची है। यह एक असफल देश बन चुका है।”
रुबियो ने यह भी दावा किया कि वेनेजुएला के राष्ट्रपति मादुरो की सुरक्षा में तैनात कई गार्ड क्यूबा से थे और क्यूबा ने कई मामलों में वेनेजुएला पर प्रभावी नियंत्रण बना रखा था। उन्होंने आरोप लगाया कि क्यूबा ने वेनेजुएला को अपनी कॉलोनी बनाने की कोशिश की। रुबियो ने कहा, “अगर मैं हवाना में रहता और सरकार का हिस्सा होता, तो मौजूदा घटनाक्रम को देखते हुए मैं निश्चित रूप से चिंतित होता।”
गौरतलब है कि अमेरिका और क्यूबा के रिश्ते दशकों से तनावपूर्ण रहे हैं। 1960 के दशक में फिदेल कास्त्रो की सरकार के दौरान दोनों देशों के संबंध बिगड़ गए थे, जिसके बाद अमेरिका ने क्यूबा पर कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगाए। बराक ओबामा के कार्यकाल में रिश्तों को सुधारने की कोशिश जरूर हुई, लेकिन ट्रंप और बाद में बाइडन प्रशासन के दौरान संबंध फिर से तल्ख हो गए।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी क्यूबा को लेकर सख्त बयान दे चुके हैं। उन्होंने क्यूबा को एक “असफल राष्ट्र” बताते हुए कहा कि अमेरिका का लक्ष्य क्यूबा के नागरिकों और वहां से पलायन कर चुके लोगों की मदद करना है। ट्रंप ने कहा, “क्यूबा की हालत अच्छी नहीं है। वहां के लोग वर्षों से मुश्किलें झेल रहे हैं। यह एक ऐसा मुद्दा है, जिस पर हम आगे गंभीरता से चर्चा करेंगे।”
मादुरो की गिरफ्तारी के बाद अमेरिका का यह आक्रामक रुख संकेत दे रहा है कि लैटिन अमेरिका में भू-राजनीतिक तनाव आने वाले दिनों में और गहराने वाला है।



