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इंदौर। भागीरथपुरा के गंदे पानी से इंदौर शहर की स्वच्छता पर धब्बा लगने के बाद नगर निगम में बड़े पैमाने पर फेरबदल हुए। दिलीप कुमार यादव की जगह नए आईएएस क्षितिज सिंघल की निगमायुक्त के रूप में तैनाती हुई है। सिंघल की नियुक्ति ऐसे समय हुई है, जब इंदौर के सारे नेता अफसरों पर टूट पड़े हैं। गंदे पानी से मौत की जिम्मेदारी भी नगर निगम अफसरों पर डाल दी गई है। ऐसे में यहां के राजनीतिक चक्रव्यूह से खुद को बचाकर नगर निगम के दामन पर लगे दाग मिटाना बहुत बड़ी चुनौती है।
जब इंदौर के निगमायुक्त शिवम वर्मा को कलेक्टर बना दिया गया था, तब दिलीप कुमार यादव की यहां तैनाती हुई थी। कहा जाता है कि वे सीएम के खास थे। सच्चाई तो पता नहीं, लेकिन उन्होंने यहां आते ही नेताओं से पंगे लेने शुरू कर दिए। अब उन्हें कहां से निर्देश मिलते थे कहा नहीं जा सकता, लेकिन उनकी कार्यप्रणाली काफी विवादों में रही। इसके विपरित शिवम वर्मा नगर निगम की व्यवस्था सुधारने में सफल रहे। कहा तो यह भी जाता है कि जब कहीं से सपोर्ट नहीं मिल रहा था, तब भी शिवम वर्मा अपनी मेहनत और समझदारी से इंदौर को सफाई में आठवीं बार नंबर वन लेकर आए।
यहां की राजनीति से खुद को बचाना मुश्किल
इंदौर में किसी भी अफसर का काम करना आसान नहीं है। एक तो प्रदेश की व्यावसायिक राजधानी होने के कारण प्रदेश के मुखिया की नजर भी रहती है, ऊपर से इंदौर के नेता अपने-अपने हिसाब से काम कराना चाहते हैं। अधिकांश अधिकारी लोकल पॉलिटिक्स के चक्कर में ही बदनाम हो जाते हैं और काम भी नहीं कर पाते। ऐसे में सबसे पहले सिंघल साहब को इंदौर की राजनीति को समझना होगा। इसके साथ ही इंदौर की जरूरत के हिसाब से जनता के करीब भी जाना होगा। मनीष सिंह जैसे निगमायुक्त ने कैसे इंदौर के जनप्रतिनिधियों और जनता को साथ लेकर शहर क सफाई में नंबर वन का खिताब दिलाया था।
यादव न जनता के हुए, न नेताओं के
यहां से काफी कम समय के कार्यकाल के बाद रवाना हुए दिलीप कुमार यादव का कार्यकाल काफी विवादों में रहा। उनका कामकाज न तो जनता को समझ आया और न ही नेताओं को। आते ही विधायक मालिनी गौड़, मधु वर्मा जैसे शहर की नब्ज समझने वाले नेताओं से पंगा लेना किसी को समझ नहीं आया। उनके कई फैसलों से जनता भी नाराज थी। ऐसे में उनके अच्छे काम भी भागीरथपुरा के गंदे पानी में बह गए।
उज्जैन नगर निगम में किया था अच्छा काम
क्षितिज सिंघल 2014 बैच के भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी हैं। उन्होंने यूपीएससी 2013 में देशभर में 83वीं रैंक हासिल की थी। राजस्थान के मूल निवासी क्षितिज सिंघल ने अपनी उच्च रैंक के साथ प्रशासनिक सेवा में मजबूत शुरुआत की। आईएएस में चयन के बाद उन्हें ओडिशा कैडर आवंटित किया गया था। आईएएस शीतला पाटले से विवाह के बाद वे मध्यप्रदेश कैडर में आए। क्षितिज सिंघल ने उज्जैन और सिवनी में महत्वपूर्ण प्रशासनिक जिम्मेदारियां निभाईं हैं। उनके कार्यकाल के दौरान जटिल समस्याओं के त्वरित समाधान और प्रशासनिक सख्ती के लिए उनकी पहचान बनी। उज्जैन नगर निगम आयुक्त के रूप में उनका कार्यकाल विकास कार्यों को गति देने वाला माना जाता है। वे बिजली कंपनी में भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं।



