👉 यह भी पढ़ें:
- Ketan Agarwal Murder Case : केतन की मां ने पीएम मोदी को भेजा ईमेल, कहा-मेरे बेटे को इंसाफ दिलाइए
- PM Modi का बड़ा ऐलान! भारत-न्यूजीलैंड बने Strategic Partners, FTA, Direct Flights और ₹35,000 करोड़ व्यापार लक्ष्य पर ऐतिहासिक समझौता
- PM Modi in Australia: MCG से पीएम मोदी का बड़ा विजन, 2036 Olympics और New India पर दिया बड़ा संदेश!
- PM Modi Australia Visit: भारत-ऑस्ट्रेलिया के बीच हुए बड़े समझौते! रक्षा, यूरेनियम, गगनयान और व्यापार पर ऐतिहासिक फैसले, क्या बदल जाएगी इंडो-पैसिफिक की ताकत?
- PM Modi Australia Visit: क्या भारत बनेगा दुनिया का नया भरोसेमंद पार्टनर? ऊर्जा संकट के बीच मेलबर्न से पीएम मोदी का बड़ा संदेश
- PM Modi Gets Indonesia’s Highest Civilian Award: इंडोनेशिया ने प्रधानमंत्री मोदी को दिया सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘Bintang Adipurna’, भारत के लिए ऐतिहासिक सम्मान
0:00 left
नई दिल्ली। पीएम नरेंद्र मोदी इन दिनों ब्रिक्स समिट में भाग लेने रूस के कजान शहर में हैं। बुधवार को वहां उन्होंने चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात की। मुलाकात के बाद पीएम मोदी ने फिर से शांति की बात दोहराई। उन्होंने कहा कि एलएसी पर शांति और स्थिरता हमारी प्राथमिकता है। मुझे विश्वास है कि हम आगे भी खुले मन से चर्चा करेंगे।
उल्लेखनीय है कि पीएम मोदी और जिनपिंग के बीच करीब पांच साल बाद पहली औपचारिक बैठक हुई है। इससे पहले मोदी और जिनपिंग के बीच आखिरी बार 2019 में द्विपक्षीय मुलाकात हुई थी। 2020 में गलवान झड़प के बाद दोनों देशों के रिश्ते बेहद तनावपूर्ण हो गए थे। मोदी और जिनपिंग के बीच आखिरी बार 2022 में इंडोनेशिया के बाली में जी20 समिट के दौरान मुलाकात हुई थी, लेकिन औपचारिक बातचीत नहीं हुई थी।
बैठक की तस्वीरें शेयर करते हुए पीएम मोदी ने लिखा कि कजान ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से अलग हटकर आज राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात की। भारत–चीन संबंध हमारे देशों के लोगों के लिए और क्षेत्रीय और वैश्विक शांति और स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण हैं। आपसी विश्वास, आपसी सम्मान और आपसी संवेदनशीलता द्विपक्षीय संबंधों का मार्गदर्शन करेंगे। इधर, शी जिनपिंग ने कहा कि दोनों पक्षों के लिए ज्यादा कम्युनिकेशन और सहयोग करना, हमारे मतभेदों और असहमतियों को उचित रूप से संभालना और एक–दूसरे की विकास आकांक्षाओं को पूरा करने में सुविधा प्रदान करना महत्वपूर्ण है। हम अंतरराष्ट्रीय संबंधों में बहु–ध्रुवीकरण और लोकतंत्र को बढ़ावा देने में योगदान देना चाहते हैं।



