किसानों के आंदोलन से पहले सरकार ने उज्जैन लैंड पूलिंग एक्ट लिया वापस, देर रात जारी की अधिसूचना

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भोपाल। उज्जैन के सिंहस्थ क्षेत्र में जमीनों के स्थायी अधिग्रहण को लेकर लाया गया लैंड पूलिंग एक्ट आखिरकार सरकार ने वापस ले लिया है। सरकार ने किसान संघों के साथ 17 नवंबर को हुई बैठक में यह फैसला लिया था, लेकिन अब तक अधिसूचना जारी नहीं हुई थी। इसके बाद 26 दिसंबर को बड़े आंदोलन की तैयारी में थे, लेकिन इससे पहले ही 16 दिसंबर की देर रात सरकार ने अधिसूचना जारी कर दी।

उल्लेखनीय है कि इस एक्ट का किसान संघों द्वारा लगातार विरोध किया जा रहा था। 17 नवंबर को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मौजूदगी में सीएम हाउस में भारतीय किसान संघ के पदाधिकारियों के साथ बैठक हुई थी। बैठक में बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल भी मौजूद थे। बैठक के बाद किसान संघ के पदाधिकारियों ने दावा किया था कि लैंड पूलिंग एक्ट वापस लिया जाएगा। हालांकि उस समय मुख्यमंत्री की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया था। बैठक दो दिन बाद 19 नवंबर को सरकार ने एक संशोधन आदेश जारी किया। इसमें कहा गया कि अब स्थायी अधिग्रहण बिल्डिंग निर्माण के लिए नहीं होगा, बल्कि केवल सड़क, नाली जैसे बुनियादी विकास कार्यों के लिए ही जमीन ली जाएगी, लेकिन इस संशोधन पर भी भारतीय किसान संघ और कांग्रेस ने आपत्ति जताई और पूरे एक्ट को वापस लेने की मांग पर अड़े रहे।

किसान संघ लगातार कर रहे थे विरोध

लैंड पूलिंग योजना में सरकार ने सिंहस्थ क्षेत्र में स्थायी निर्माण के लिए किसानों की भूमि लैंड पूलिंग के तहत लेने का प्रावधान किया था। इसमें किसानों को भूमि का एक हिस्सा विकसित करके दिया जाता और शेष का मुआवजा मिलता लेकिन इसके लिए वे तैयार नहीं थे। चौतरफा विरोध को देखते हुए लैंड पूलिंग योजना में संशोधन किया गया था, जिसमें केवल सड़क, नाली, पानी की टंकी आदि स्थायी निर्माण के लिए भूमि लेने का प्रविधान था। इस पर भी किसान तैयार नहीं थे। इसके बाद सरकार ने पूरी लैंड पूलिंग योजना को ही निरस्त कर दिया।

चार नगर विकास योजनाएं हुई थीं तैयार

वर्ष 2028 में होने वाले सिंहस्थ में करोड़ों की संख्या में श्रद्धालुओं के आने की संभावना को देखते हुए सरकार ने सिंहस्थ क्षेत्र में स्थायी अधोसंरचना निर्माण के लिए सिंहस्थ क्षेत्र के लिए उज्जैन विकास प्राधिकरण के माध्यम से चार नगर विकास योजना आठ, नौ, दस और 11 तैयार की थी। इसमें किसानों की भूमि लैंड पूलिंग के प्रविधान के अनुसार ली जाती। एक हिस्सा विकसित कर किसान को दिया जाता और शेष का मुआवजा मिलता। इसके बाद भूमि पर उसका कोई अधिकार नहीं रह जाता। किसान इसके विरोध में थे। भारतीय किसान संघ मध्य प्रदेश ने इसे लेकर आंदोलन किया।

भाजपा आलाकमान तक पहुंचा था मामला

किसान संघ और स्थानीय संगठन सिंहस्थ के नाम पर लैंड पूलिंग के माध्यम से किसानों की जमीन लेने का विरोध कर रहे थे। यह बात भाजपा आलाकमान यानी अमित शाह से लेकर कई वरिष्ठ नेताओं तक भी पहुंची थी। सरकार की ओर से सिहंस्थ में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के आने का हवाला देकर व्यवस्था बनाने की बात रखी गई तो अन्य कुंभ का उदाहरण देकर लैंड पूलिंग के बिना व्यवस्था बनाए जाने की बात उठी। उधर, किसान पूरी तरह से लैंड पूलिंग योजना को निरस्त करने पर अड़े थे।

सरकार ने बनाई थी ऐसी योजना

उज्जैन सिंहस्थ क्षेत्र में लगभग 2,800 हेक्टेयर भूमि है। इसमें साढ़े आठ सौ हेक्टेयर शासकीय और शेष निजी भूमि है। सरकार बड़ी संख्या में आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा को देखते हुए यहां जन सुविधा की दृष्टि से स्थायी निर्माण करना चाहती थी। इसके लिए किसानों की भूमि लैंड पूलिंग के तहत लेना प्रस्तावित था। इसमें जिसकी भूमि ली जाती, उसे एक निश्चित क्षेत्र में स्थायी निर्माण करके सरकार देती और बाजार मूल्य से शेष भूमि का भुगतान भी किया जाता।

26 दिसंबर को आंदोलन की थी तैयारी

भारतीय किसान ने उज्जैन में 26 दिसंबर से डेरा डालो-घेरा डालो आंदोलन की घोषणा कर दी थी। संगठन के प्रदेश अध्यक्ष कमल सिंह आंजना ने कहा था कि किसान प्रशासनिक कार्यालयों का घेराव करेंगे और चरणबद्ध आंदोलन चलाया जाएगा। इस आंदोलन से पहले ही नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने इस संबंध में आदेश जारी कर दिया है।

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