नई दिल्ली। तृणमूल कांग्रेस के बागी सांसदों ने रविवार को दिल्ली में लोकसभा स्पीकर ओम बिरला से उनके आवास पर मुलाकात की। टीएमसी के बागी सांसदों ने नेशनलिस्ट सिटिज़न्स पार्टी में विलय की बात कही है।
दिल्ली में लोकसभा स्पीकर ओम बिरला से मुलाकात के बाद बागी सांसद सुदीप बंद्योपाध्याय ने कहा कि बागी नेताओं ने नेशनलिस्ट सिटिज़न्स पार्टी के साथ विलय किया है, यह एक राजनीतिक पार्टी है, एक मान्यता प्राप्त क्षेत्रीय पार्टी है। ़ रविवार को काकोली घोष दस्तीदार, सुदीप बंदोपाध्याय और शताब्दी रॉय सहित टीएमसी के बागी सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात की। इन बागी सांसदों ने लोकसभा के भीतर खुद के लिए अलग बैठने की व्यवस्था करने की औपचारिक मांग की है।
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बागी गुट ने किया 20-22 सांसद का दावा
बागी गुट का दावा है कि उनके साथ टीएमसी के 28 में से 20 से 22 लोकसभा सांसद मौजूद हैं। उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष से संसद के भीतर उन्हें असली टीएमसी विधायी दल के रूप में मान्यता देने की अपील की है। स्पीकर से मिलने से पहले इन बागी सांसदों ने भाजपा के पश्चिम बंगाल प्रभारी और केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के दिल्ली आवास पर जाकर लंबी रणनीति बैठक की। इस बैठक में सयानी घोष और माला रॉय भी शामिल थीं। बागी खेमे की सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने दावा किया कि दो और सांसद बागी खेमे में शामिल होने वाले हैं, जिससे लोकसभा में इस गुट में सदस्यों की संख्या बढ़कर 22 हो जाएगी।
नेशनलिस्ट सिटिजन पार्टी में विलय की चर्चा
पार्टी के बागी सांसदों ने ‘नेशनलिस्ट सिटिजन पार्टी’ नाम की क्षेत्रीय पार्टी में विलय कर लिया है। अब ये बागी नेता केंद्र में भाजपा के नेतृत्व वाले नेशनल डेमोक्रेटिक अलायंस (एनडीए) को समर्थन दे सकते हैं। ऐसा करने से अलग संसदीय समूह बनाने से जुड़ी तकनीकी और कानूनी अड़चनों को दूर करने में मदद मिलेगी। नेशनलिस्ट सिटिजन पार्टी का मुख्य राजनीतिक फोकस पश्चिम बंगाल, असम और त्रिपुरा पर होगा।
सागरिका घोष ने बागियों पर साधा निशाना
वहीं तृणमूल कांग्रेस की राज्यसभा सांसद सागरिका घोष ने बागी नेताओं पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि दलबदल विरोधी कानून के तहत ऐसा कोई कानूनी प्रावधान नहीं है जिसके तहत कोई “अलग गुट” सदन के भीतर काम कर सके, जबकि वे उस पार्टी के चुनाव चिह्न पर जीती हुई अपनी सीटें भी अपने पास रखे रहें। घोष ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि कोई सांसद या विधायक अयोग्य घोषित होने से तभी बच सकता है जब राजनीतिक दलों का औपचारिक विलय हो, और वह भी केवल कुछ खास शर्तों के तहत।



