नई दिल्ली। संसद की कार्यवाही को लेकर सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच टकराव लगातार जारी है। शुक्रवार को भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस नेताओं राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे के उन आरोपों पर निशाना साधा, जिनमें केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के संसद में उपस्थित न होने को लेकर सवाल उठाए गए थे। BJP का कहना है कि विपक्ष के लगातार विरोध-प्रदर्शन के कारण सदन सामान्य रूप से नहीं चल पा रहा है।
BJP ने विपक्ष से सदन को सुचारु रूप से चलने देने की अपील की और कहा कि कार्यवाही सामान्य होने पर गृह मंत्री के सदन में आने की बात कही गई है।
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दूसरी ओर, विपक्ष कई मुद्दों को लेकर सरकार पर दबाव बना रहा है। इनमें चुनावी व्यवस्था, मतदाता सूची और प्रस्तावित विधायी बदलावों से जुड़े सवाल भी शामिल हैं। राहुल गांधी ने मतदाता सूची से जुड़े मुद्दे पर संसद में चर्चा की मांग की है।

इसी बीच विपक्षी दलों ने FCRA से जुड़े विधेयक को लेकर भी आपत्ति जताई है। कांग्रेस सहित विपक्ष का आरोप है कि प्रस्तावित प्रावधानों के प्रभाव को लेकर गंभीर सवाल हैं। सरकार और विपक्ष के बीच इस मुद्दे पर आगे भी राजनीतिक बहस तेज होने के संकेत हैं।
संसद में जारी गतिरोध का असर विधायी कामकाज पर पड़ना स्वाभाविक है। ऐसे में आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि सरकार और विपक्ष किसी सहमति तक पहुंच पाते हैं या नहीं।
आप क्या सोचते हैं? क्या विपक्ष का विरोध लोकतांत्रिक दबाव बनाने का जरूरी तरीका है या संसद की कार्यवाही बाधित करना जनता के हित में नहीं है? अपनी राय कमेंट में बताएं।



