इंदौर। छात्रों की गूंज कार्यक्रम के माध्यम से कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भाजपा सरकार की दुखती रग पर हाथ रख दिया है। यह वही युवा हैं जिन्होंने जंतर-मंतर पर भाजपा सरकार की नींद हराम कर दी थी। राहुल गांधी ने इस मौके को लपका और इसी का नतीजा है कि आज भाजपा के कानों में जेन जी यानी छात्रों की आवाज गूंजने लगी है।
कार्यक्रम से पहले ही इंदौर का सियासी माहौल गर्म रहा। कार्यक्रम के आयोजन को लेकर स्थल, अनुमति, अतिरिक्त शुल्क और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कांग्रेस और भाजपा के बीच आरोप-प्रत्यारोप हुए। पहले कार्यक्रम 12 सितंबर को नेहरू स्टेडियम में प्रस्तावित था, लेकिन अनुमति नहीं मिलने के बाद इसे 19 सितंबर के लिए आगे बढ़ाया गया और क्षेत्रीय पार्क के सामने वैकल्पिक स्थल तय किया गया।
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भाजपा ने कदम-कदम पर अटकाए रोड़े
कार्यक्रम से पहले भाजपा ने कदम-कदम पर रोड़े अटकाए। कार्यक्रम के दिन तक यह सिलसिला जारी रहा। पुलिस-प्रशासन से लेकर राजनीतिक रूप से भी कार्यक्रम खराब करने की कोशिश की गई। कार्यक्रम से ठीक पहले शहर में ‘झूठ की गूंज’ नाम से पोस्टर लगाए जाने को लेकर भी विवाद हुआ। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि भाजपा से जुड़े लोगों ने कार्यक्रम में बाधा डालने के लिए यह अभियान चलाया।
पुलिस की शर्तों की भी रही जमकर चर्चा
सुरक्षा व्यवस्था भी कार्यक्रम की चर्चा का हिस्सा रही। पुलिस ने कार्यक्रम के लिए 31 सुरक्षा शर्तें निर्धारित की थीं, जिनमें भीड़ नियंत्रण, प्रवेश-निकास, स्वयंसेवकों, सीसीटीवी, चिकित्सा और आपात व्यवस्था से जुड़ी शर्तें शामिल थीं। सुरक्षा संबंधी दस्तावेज में 1991 में राजीव गांधी की हत्या के बाद बनी जे.एस. वर्मा आयोग की रिपोर्ट का भी उल्लेख था। कांग्रेस ने इन शर्तों को लेकर आपत्ति जताई, जबकि पुलिस की ओर से इसे सुरक्षा व्यवस्था का हिस्सा बताया गया।
राहुल के कार्यक्रम से पहले भाजपा ने बनाया माहौल
राहु गांधी के कार्यक्रम से पहले भाजपा ने 17 सितंबर को राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन का इंदौर में आयोजन रखा था। इसमें सरकार और संगठन ने पूरी ताकत लगा दी। रोड शो भी हुआ और जमकर शक्ति प्रदर्शन हुआ। यह कार्यक्रम अचानक तय किया गया था, क्योंकि राहुल गांधी दो दिन बाद इंदौर आने वाले थे।
राहुल ने अंधभक्तों पर साधा निशाना
छात्रों से सवाल-जवाब के दौरान राहुल ने कहा- सिस्टम नहीं चाहता कि स्टूडेंट्स सवाल पूछें, इसलिए वह अंधभक्त पैदा करता है। राहुल गांधी ने एक छात्र से पूछा कि आपको लगता है कि हिंदुस्तान के एवरेज स्टूडेंट को रोजगार मिल सकता है? इसपर छात्र ने जवाब दिया, “बिल्कुल सर, मिल सकता है। मिलना चाहिए। बहुत सारी भर्तियां खाली हैं, भर्तियां नहीं होती हैं।” राहुल ने पूछा, “तो फिर क्यों नहीं मिलता? इसपर छात्र ने कहा, “यहां पर सिस्टम ऐसा है। हम लोग आंदोलन करते हैं कि भर्तियां निकालिए, रिजल्ट रोक दिए जाते हैं। बहुत सारे पद निकलते ही नहीं हैं।
राहुल बोले- सिस्टम की टॉप लेयर पर 6 लोग
राहुल गांधी ने स्क्रीन पर स्लाइड दिखाई और कहा, “तीन फ्रेंड ने सिस्टम की बात की। सिस्टम क्या है, ये सिस्टम है, देश पर सिस्टम का कब्जा। सिस्टम में कई लेयर हैं। टॉप लेवल पर 6 लोग बैठे हैं। इसे मोदी चलाते हैं, धमकाने का काम, उन्हें मारने का काम, पैलेट गन मारने का काम शाह चलाते हैं।
सिस्टम चलाने वालों के बच्चे विदेश में पढ़ रहे
राहुल गांधी ने कहा कि सिस्टम को चलाने वालों के बच्चों को देखिए, वे इंदौर में पढ़ रहे हैं या विदेश में। ये देश के युवाओं को अंधभक्त बनाना चाहते हैं। अपने बच्चों को पढ़ने के लिए बाहर भेजेंगे। राहुल गांधी ने कहा कि हमने शुरुआत में ही कहा था कि स्टूडेंट देश को बनाता है और शिक्षा देश की नींव है। शिक्षा हर स्टूडेंट का हक है। स्कूल में मिड-डे मील से लेकर कॉलेज और कॉलेज से रोजगार तक पहुंचाना सरकार की जिम्मेदारी है। राहुल गांधी ने कहा कि परीक्षाओं के दौरान कुछ अभ्यर्थियों से भी गलतियां हुई हैं, लेकिन कहीं न कहीं उनका सिस्टम पर भरोसा खत्म हो गया है। इस पर छात्रों की ओर से आवाज आई, “सर, हम सिस्टम से हार गए।”
सिस्टम को स्टूडेंट से खतरा, क्योंकि वह सवाल पूछता है
राहुल गांधी ने कहा कि सिस्टम को स्टूडेंट से खतरा है, क्योंकि स्टूडेंट सवाल पूछता है। उन्होंने कहा कि छात्र सवाल करता है कि अमित शाह के बेटे क्रिकेट एसोसिएशन के चेयरमैन कैसे बन गए? वह सवाल करता है कि हिंदुस्तान के पूरे बिजनेस को दो लोगों ने कैसे कैप्चर कर लिया? छात्र यह भी पूछता है कि न्यायपालिका और दूसरी संस्थाएं अपना काम क्यों नहीं करतीं और चुनाव आयोग अपना काम क्यों नहीं करता? राहुल ने कहा, “इसीलिए सिस्टम स्टूडेंट नहीं चाहता, सिस्टम अंधभक्त चाहता है।” उन्होंने कहा कि अंधभक्त स्टूडेंट के विपरीत होता है। जहां स्टूडेंट सवाल पूछता है और जिज्ञासु होता है, वहां अंधभक्त अपनी ही दुनिया में रहता है।
शिक्षा लग्जरी नहीं, हर स्टूडेंट का हक
राहुल गांधी ने कहा कि स्टूडेंट देश का फाउंडेशन होता है और वही देश को बनाता है। शिक्षा कोई लग्जरी नहीं है, बल्कि हर स्टूडेंट का हक है। उन्होंने कहा कि किंडरगार्टन से मिड-डे मील, स्कूल, कॉलेज और फिर रोजगार तक पहुंचाने की जिम्मेदारी सरकार की है। राहुल ने कहा कि सरकार को शिक्षा का सिस्टम चलाना चाहिए, लेकिन देश में इसका उलटा हो रहा है। उन्होंने कहा कि शिक्षा देश की नींव है और सरकार की जिम्मेदारी है कि हर छात्र को शिक्षा और रोजगार के अवसर मिलें।



