भोपाल। मध्यप्रदेश में राज्यसभा चुनाव के लिए भाजपा और कांग्रेस की तरफ से उम्मीदवारों की घोषणा हो चुकी है। भाजपा उम्मीदवार तरुण चुघ और रजनीश अग्रवाल ने आज यानी शनिवार को नामांकन भी दाखिल कर लिया है। इधर, कांग्रेस ने राहुल गांधी की पसंद मीनाक्षी नटराजन को अपना उम्मीदवार बनाया, जिसको लेकर पार्टी में जमकर विरोध है। ऐसे में माना जा रहा है कि कहीं भाजपा अंतिम समय में अपनी तीसरा उम्मीदवार उतारकर कांग्रेस के साथ कहीं खेला न कर दे।
उल्लेखनीय है कि राज्यसभा की तीन सीटों के लिए 18 जून 2026 को चुनाव होने हैं। कांग्रेस की एक सीट पर अब तक दिग्विजय सिंह काबिज थे, लेकिन उनके इनकार के बाद कई कांग्रेसी नेताओं की नजर इस सीट पर थी। सबसे ज्यादा कोशिश पूर्व सीएम कमलनाथ कर रहे थे, लेकिन कांग्रेस आलाकमान ने राहुल गांधी की पसंद मीनाक्षी नटराजन को मैदान में उतार दिया। इसके बाद से कांग्रेस में असंतोष की चिंगारी भड़क गई है।
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कांग्रेस की कलह का भाजपा को फायदा
कांग्रेस की आपसी कलह का फायदा भाजपा उठा सकती है। खुद भाजपा से राज्यसभा के टिकट के लिए कोशिश कर रहे बड़बोले मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने पिछले दिनों कहा था भाजपा अपना तीसरा उम्मीदवार भी उतार सकती है। हालांकि विजयवर्गीय इसके लिए न तो अधिकृत हैं और न उनकी बात पर कोई भरोसा करता है, लेकिन फिर भी यह माना जा रहा है कि भाजपा आलाकमान भी ऐसा सोच सकती है।
आखिर क्यों हो रहा नटराजन का विरोध
उल्लेखनीय है कि 2009 में मंदसौर से लोकसभा सांसद रहीं मीनाक्षी नटराजन, राहुल गांधी से जुड़ी रही हैं। वे लंबे समय से राहुल गांधी के कोर ग्रुप का हिस्सा रही हैं, लेकिन पिछले कई सालों से मध्य प्रदेश की सक्रिय और गुटीय राजनीति में उनकी पकड़ नहीं के बराबर रही है। यही वजह है कि उनकी उम्मीदवारी की घोषणा होते ही विरोध शुरू हो गया। सोशल मीडिया से लेकर जमीनी स्तर पर भी कांग्रेसी उनका विरोध कर रहे हैं।
भाजपा की नजर कांग्रेस के असंतुष्टों पर
कांग्रेस में चल रही इस उठापटक पर भाजपा की पूरी तरह नजर है। अगर कांग्रेस ने अपने विधायकों को एकजुट नहीं कर पाती है तो निश्चित ही भाजपा अपना तीसरा उम्मीदवार उतारने पर विचार कर सकती है। इसके बाद यह तय है कि कांग्रेस को क्रॉस वोटिंग का सामना करना पड़ेगा और वह अपनी सीट गंवा भी सकती है।
कांग्रेस के नरेश ज्ञानचंदानी ने उठाए सवाल
मीनाक्षी नटराजन की उम्मीदवारी पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और हुजूर विधानसभा से दो बार प्रत्याशी रह चुके नरेश ज्ञानचंदानी ने इस फैसले पर सवाल उठाए हैं। नरेश ज्ञानचंदानी ने एक्स पर पोस्ट करते हुए कांग्रेस नेतृत्व के फैसले पर आपत्ति जताई। उन्होंने राहुल गांधी और प्रियंका गांधी को टैग करते हुए लिखा कि मध्य प्रदेश से राज्यसभा उम्मीदवार के चयन में पार्टी से बड़ी चूक हुई है।
कमलनाथ समर्थक विधायकों पर भी नजर
राज्यसभा चुनाव में दिग्विजय सिंह के बाहर होने के बाद पूर्व सीएम कमलनाथ की इच्छा थी कि वे राज्यसभा चले जाएं। उनके समर्थक भी यही चाहते थे। कहा यह भी जा रहा था कि पार्टी अपनी सीट सुरक्षित रखने और संभावित क्रॉस वोटिंग की आशंका को कम करने के लिए कमलनाथ को राज्यसभा भेज सकती है। अब मीनाक्षी नटराजन के उम्मीदवार बनने के बाद कमलनाथ समर्थक विधायकों पर पार्टी की नजर है।
भाजपा ने कांग्रेस पर साधा निशाना
मीनाक्षी नटराजन की उम्मीदवारी के विरोध पर भाजपा ने कांग्रेस पर निशाना साधा है। भाजपा के प्रदेश मीडिया प्रभारी आशीष अग्रवाल ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए कहा कि कांग्रेस में अंतर्कलह और गुटबाजी कोई नई बात नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि जब पार्टी के अपने नेता ही शीर्ष नेतृत्व के फैसलों पर सवाल उठा रहे हैं, तो यह संगठन की स्थिति को दर्शाता है।
मध्यप्रदेश में क्या है राज्यसभा का गणित
मध्यप्रदेश विधानसभा में कुल विधायकों की संख्या 230 है। इसमें भाजपा के पास 164 विधायक हैं, जबकि कांग्रेस के पास यह संख्या 65 ही है। इसी गणित के आधार पर दो सीट भाजपा और एक सीट कांग्रेस जीत पाएगी। ऐसे में क्रॉस वोटिंग होती है तो कांग्रेस की मुसीबत बढ़ जाएगी। कांग्रेस के 65 में से तीन विधायक वोट नहीं डाल पाएंगे। दतिया विधायक राजेंद्र भारती की विधानसभा सदस्यता जा चुकी है। विजयपुर विधायक मुकेश मल्होत्रा राज्यसभा चुनाव में मतदान नहीं कर पाएंगे। बीना विधायक निर्मला सप्रे को लेकर कांग्रेस दुविधा में है। कांग्रेस को राज्यसभा सीट जीतने के लिए 58 विधायकों का समर्थन चाहिए, जबकि पार्टी के पास वर्तमान में 62 विधायक हैं। ऐसे में थोड़ी भी गड़बड़ी परिणाम बदल सकती है।


