कोलकाता। पश्चिम बंगाल राज्यसभा के उपचुनाव के लिए भाजपा ने अपने उम्मीदवारों की लिस्ट जारी कर दी है। भाजपा ने सुष्मिता देव, सुखेंदु शेख रॉय और प्रकाश बराइक को उम्मीदवार बनाया है। इन तीनों नेताओं ने उम्मीदवारों के नाम की घोषणा के कुछ ही देर पहे भाजपा ज्वाइन किया था।
उल्लेखनीय है तीनों राज्यसभा सांसदों ने पिछले महीने इस्तीफा दे दिया था। गुरुवार को पश्चिम बंगाल के भाजपा प्रदेश अध्यक्ष और राज्यसभा सदस्य समिक भट्टाचार्य ने सुखेंदु शेखर रॉय, सुष्मिता देव और प्रकाश चिक बराइक को पार्टी में शामिल कराया। भट्टाचार्य ने कहा कि इसका मतलब यह नहीं है कि भाजपा तृणमूल के किसी भी सदस्य के लिए अपने दरवाजे खोल देगी। तीनों नेताओं का रिकॉर्ड बेदाग है और तृणमूल में रहते हुए उन पर भ्रष्टाचार का कोई आरोप नहीं है।
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जून में तीनों ने राज्यसभा से दिया था इस्तीफा
उल्लेखनीय है कि सुखेंदु शेख ने 8 जून को राज्यसभा से इस्तीफा दिया, उसके बाद देव ने 10 जून को और बराइक ने 11 जून को इस्तीफा दिया। वह पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों से काफी पहले से तृणमूल नेतृत्व के आलोचक रहे थे। अगस्त 2024 में कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में एक जूनियर डॉक्टर के दुष्कर्म और हत्या के मामले में ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली सरकार की आलोचना करते हुए उन्होंने पार्टी से दूरी बना ली थी।
तीनों सीटें जीत सकती है भाजपा
पश्चिम बंगाल विधानसभा में मौजूदा संख्या समीकरण के अनुसार, बीजेपी के उम्मीदवारों के तीनों सीटों पर जीत हासिल करने की संभावना है। विधानसभा में भाजपा के पास 208 विधायक हैं। भाजपा के उम्मीदवार को हराने के लिए विपक्षी उम्मीदवार को कम से कम 70 वोटों की आवश्यकता होगी। हालांकि आधिकारिक तौर पर तृणमूल के पास 80 विधायक हैं, लेकिन उनमें से 60 निष्कासित विधायक ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले बागी लेकिन बहुमत गुट के हैं, जबकि शेष 20 ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी का समर्थन करते हैं।
बड़ाईक बोले- हम सिर्फ विकास चाहते हैं
राज्यसभा उम्मीदवार बनाए जाने के बाद प्रकाश चिक बड़ाईक ने कहा कि पश्चिम बंगाल में पिछले 49 वर्षों में, 34 साल के वाम शासन और 15 साल के तृणमूल शासन के दौरान कई विकास कार्य पूरे नहीं हो सके। राज्य और केंद्र सरकार के बीच तालमेल की कमी रही। पांच साल तक 100 दिन रोजगार योजना का पैसा रुका रहा और गरीबों के लिए कई योजनाएं प्रभावित हुईं। बड़ाईक ने आगे कहा कि इस बजट में उत्तर बंगाल में एम्स, कई मेडिकल कॉलेज, सिलीगुड़ी से दिल्ली तक बुलेट ट्रेन और हासीमारा में एयरपोर्ट का प्रस्ताव है। हम सिर्फ विकास चाहते हैं। अगर पहले ही राज्य और केंद्र के बीच बेहतर तालमेल होता, तो ये समस्याएं पैदा नहीं होतीं।
विधानसभा चुनाव के बाद लगातार झटका
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बाद से ही पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी को लगातार झटका लगा है। इसकी शुरुआत विधानसभा चुनाव के नतीजों के ठीक बाद हुई, जहां विधायक ऋतब्रत बनर्जी की अगुवाई में विधायकों के एक बड़े गुट ने बगावत का झंडा बुलंद कर दिया। इस अंदरूनी फूट के कारण विधानसभा के भीतर ही ममता बनर्जी को अपनों के तीखे तेवर झेलने पड़े।बगावत सिर्फ विधानसभा तक सीमित नहीं रही, बल्कि जल्द ही इसका असर लोकसभा पर भी दिखने लगा। पार्टी के करीब 20 लोकसभा सांसदों ने ऋतब्रत बनर्जी के बागी खेमे का समर्थन करते हुए संसद में अपने बैठने की व्यवस्था तक अलग करने की मांग कर डाली और फिर एक छोटे दल में विलय का एलान कर दिया। अब बगावत का यह सिलसिला राज्यसभा तक पहुंच गया है।



