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इंदौर। सोमवार का दिन इंदौर के लिए बहुत खास रहा कि सीएम डॉ.मोहन यादव ने चार ओवरब्रिजों की सौगात दी, लेकिन इस खुशी के मौके पर जो हंगामा हुआ वह शहर के माथे पर कलंक लगा गया। जिस ओवरब्रिज का नाम पहले से तय था, वहां ब्रांडिंग भी उसी नाम से की गई थी, उसका सिलालेख कैसे गलत हो गया?
फूटी कोठी ओवरब्रिज का नाम बंजारा समाज के महान संत सेवालाल महाराज के नाम पर रखा जाना तय हुआ था। इसी वजह से कार्यक्रम में बंजारा समाज के कई संतों तथा समाजजनों को आमंत्रित किया गया था। जब समाज के लोग कार्यक्रम स्थल पर पहुंचे तो वहां सिलालेख पर फूटी कोठी फ्लाईओवर का नाम देख नाराज हो गए। फिर क्या था जमकर हंगामा हुआ। हंगामा इतना कि मंत्री कैलाश विजयवर्गीय को समाज के लोगों के बीच जाकर उन्हें समझाना पड़ा। बात इतने से भी नहीं बनी और नारेबाजी चलती रही, तब मंत्री विजयवर्गीय ने मंच से कहा कि ब्रिज का नाम संत सेवालाल महाराज के नाम पर ही है। सिलालेख में गलती हो गई है, सुधार ली जाएगी। इसके बाद जब बंजारा समाज के एक संत संबोधन देने आए तो उन्होंने भी लोगों को समझाया कि नाम गलत हो गया है, सही हो जाएगा।
सीएम को भी देनी पड़ी सफाई
जब सीएम मंच पर आए तो भी कुछ लोग नारे लगाने लगे। इस दौरान सीएम ने कहा कि फूटी कोठी को कौन जानता है। फूटी कोठी मतलब किस्मत फूटी। यह ब्रिज महान संत सेवालाल महाराज के नाम पर ही है। उन्होंने संत सेवालाल के नाम के जयकारे भी लगवाए। इसके साथ ही सीएम ने देश में बंजारा समाज के योगदान की भी चर्चा की।
बड़ा सवाल-इतनी बड़ी गलती हुई कैसे
इस घटनाक्रम के बाद यह सवाल उठ रहा है कि आखिर इस तरह की गलती हुई कैसे? क्या आईडीए ने जिन अधिकारियों अनिल चुघ और कपिल भल्ला को जिम्मेदारी दी थी उनकी गलती है या फिर इन अधिकारियों से किसी रणनीति के तहत यह गलती कराई गई। कहा तो यहां तक जा रहा है कि इस गलती के कारण कुछ नेताओं को अपनी राजनीति चमकाने का मौका भी मिल गया। अब यह आईडीए की जिम्मेदारी है कि इसके दोषियों पर कार्रवाई करे। अगर आईडीए चुप बैठ जाता है तो यह अर्थ लगाना आसान होगा कि ऐसी गलती किसी रणनीति के तहत की गई है।



