भोपाल। मध्यप्रदेश के सीएम डॉ.मोहन यादव की संपत्तियों को लेकर इंडियन एक्सप्रेस अखबार में 23 जून को एक समाचार प्रकाशित हुआ था, जिसमें उनकी संपत्तियों में वृद्धि की बात कही गई है। सच तो यह है कि इस खबर के माध्यम से भ्रम फैलाने की कोशिश की जा रही है। सच तो यह है कि उनकी संपत्तियों में कोई वृद्धि नहीं हुई है।
उल्लेखनीय है कि 23 जून 2026 को प्रकाशित समाचार में मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव एवं उनके परिवार को उनके रिश्तेदारों द्वारा किए जा रहे स्वतंत्र व्यवसाय एवं भूमि क्रय-विक्रय से जोड़कर भ्रम उत्पन्न करने का प्रयास किया गया है। इसमें सीएम तथा उनके रिश्तेदारों की संपत्तियों में बड़े पैमाने पर वृद्धि का जिक्र किया गया है।
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चुनावी हलफनामे में दर्ज है सब
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की कृषि भूमि में कोई वृद्धि नहीं हुई है। नवंबर 2023 में उनके स्वामित्व एवं आधिपत्य की कुल कृषि भूमि 17.967 एकड़ थी, जो जून 2026 में भी 17.967 एकड़ ही है।जो पूर्व से ही चुनावी हलफनामें में घोषित है। सीमा यादव की कृषि भूमि भी लगभग यथावत है। नवंबर 2023 में उनके पास 12.287 एकड़ कृषि भूमि थी, जो जून 2026 में 12.292 एकड़ है। अधिकांश भूमि डॉ. मोहन यादव जी के मुख्यथमंत्री बनने से काफी पहले, वर्ष 2008 से 2019 के बीच खरीदी गई थी।
सिद्धि विनायक देवकॉन के सारे शेयर त्याग चुके हैं सीएम
सिद्धि विनायक देवकॉन प्राइवेट लिमिटेड के संबंध में भ्रामक प्रस्तुति की गई है। यह कंपनी वर्ष 2008 में कृषि कार्यों के लिए स्थापित हुई थी। डॉ. मोहन यादव एवं सीमा यादव वर्ष 2017 में ही इसके निदेशक पद से अलग हो चुके थे तथा मार्च 2026 में अपने सभी शेयर भी त्याग चुके हैं। कंपनी के पास नवंबर 2023 में 68.43 एकड़ भूमि थी, जो जून 2026 में घटकर 65.69 एकड़ रह गई है।
बेटे वैभव की जमीन सीएम बनने से पहले की
पुत्र वैभव यादव द्वारा खरीदी गई भूमि मुख्यमंत्री बनने से पहले खरीदी गई थी। ग्राम सांवरखेड़ी में 2019 से मार्च 2023 के बीच 16.38 एकड़ कृषि भूमि का क्रय किया गया था। यह खरीद मुख्यमंत्री पद ग्रहण करने तथा उज्जैन मास्टर प्लान-2035 लागू होने से पहले की गई थी। पुत्रवधू शालिनी यादव द्वारा खरीदी गई भूमि मास्टर प्लान क्षेत्र के बाहर कृषि भूमि वर्ष 2025 में ग्राम गंगेड़ी में खरीदी गई लगभग 10 एकड़ भूमि कृषि भूमि है तथा विकसित या व्यावसायिक क्षेत्र में नहीं आती।
रिश्तेदार अपने-अपने व्यवसाय करते हैं
मुख्यमंत्री के रिश्तेदार अपने-अपने व्यवसाय एवं आर्थिक गतिविधियाँ स्वतंत्र रूप से संचालित करते हैं। उनके किसी भी निजी लेन-देन या व्यवसाय को मुख्यमंत्री से जोड़ना तथ्यात्मक रूप से गलत है।
सीएम बनने से पहले लागू हुआ मास्टर प्लान
उज्जैन मास्टर प्लान-2035 मुख्यमंत्री बनने से पहले लागू हो चुका था। यह मास्टर प्लान मई 2023 से प्रभावशील है, जबकि डॉ. मोहन यादव ने 13 दिसंबर 2023 को मुख्यमंत्री पद ग्रहण किया। अतः सड़क, हाईवे या विकास योजनाओं को मुख्यमंत्री बनने के बाद विशेष रूप से प्रभावित करने काआरोप निराधार है।
कॉन्फ्लिक्ट ऑफ इंटरेस्ट’ का आरोप तथ्यहीन
डॉ. मोहन यादव की संपत्तियों का पूरा विवरण विधानसभा निर्वाचन 2023 के शपथ-पत्र में सार्वजनिक रूप से उपलब्ध है। किसी भी प्रकार के पद के दुरुपयोग अथवा हितों के टकराव का आरोप बेबुनियाद है। उपलब्ध अभिलेखों एवं सार्वजनिक तथ्यों से स्पष्ट है कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, उनकी पत्नी एवं उनके परिवार की अधिकांश भूमि मुख्यमंत्री बनने से पूर्व की है।



