भोपाल। मध्यप्रदेश की राजनीति में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व को लेकर समय-समय पर उठने वाली चर्चाओं के बीच शनिवार को भोपाल में केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह के एक बयान ने राजनीतिक हलकों में चर्चाओं का बाजार गर्म कर दिया है। गोपालक सम्मेलन में शाह ने मुख्यमंत्री मोहन यादव और उनकी पूरी टीम की खुलकर तारीफ की। इसके साथ ही प्रदेश में दूध उत्पादन को 50 लाख लीटर प्रतिदिन तक पहुंचाने के लक्ष्य को हासिल करने में मोहन यादव के साथ “कंधे से कंधा मिलाकर” काम करने का भरोसा भी दिया।
पूरी टीम को ही बधाई दे गए शाह
अमित शाह ने कहा कि मध्य प्रदेश सरकार ने गोपालकों के हित में अनेक महत्वपूर्ण फैसले लिए हैं। इसके लिए मैं मुख्यमंत्री और उनकी पूरी टीम को हृदयपूर्वक साधुवाद और बधाई देना चाहता हूं। शाह ने कहा कि मैं मुख्यमंत्री जी से यह कहने भी आया हूं कि आपने 50 लाख लीटर दूध उत्पादन का लक्ष्य तो घोषित कर दिया है, लेकिन यह लक्ष्य कठिन है। फिर भी मैं आपको विश्वास दिलाता हूं कि मैं कंधे से कंधा मिलाकर इस लक्ष्य को सिद्ध कराने में आपके साथ रहूंगा और मध्य प्रदेश के गोपालकों के साथ भी खड़ा रहूंगा।
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अटकलों के बीच इस बयान के मायने
शाह का यह बयान ऐसे समय आया है, जब मध्यप्रदेश की राजनीति में मुख्यमंत्री के नेतृत्व को लेकर अटकलों का दौर चलता रहा है। शाह के बयान का राजनीतिक महत्व केवल मुख्यमंत्री की तारीफ तक सीमित नहीं है। उन्होंने मोहन यादव सरकार के सामने एक स्पष्ट और दीर्घकालिक लक्ष्य का उल्लेख किया और कहा कि केंद्र की ओर से उस लक्ष्य को हासिल कराने में सहयोग दिया जाएगा। क्या यह मोहन यादव के नेतृत्व पर भरोसे का संकेत है? भाजपा में फिलहाल यही चर्चा हो रही है कि अमित शाह ने मोहन यादव के काम पर मुहर लगा दी है।
विघ्नसंतोषियों को नहीं हो रहा संतोष
उल्लेखनीय है कि सीएम की कुर्सी पर नजरें गड़ा कर बैठे भाजपा के कई विघ्नसंतोषियों को गृह मंत्री के बयान से झटका लगा है। ऐसे लोग जल्द ही परिवर्तन की बात कह रहे थे और बड़ी उम्मीद से थे। राजनीतिक जानकार कह रहे हैं कि गृह मंत्री ने सीधे तौर पर कुछ नहीं कहा है, लेकिन यह संदेश जरूर दे दिया है कि केंद्रीय नेतृत्व मोहन यादव के काम से संतुष्ट है। कंधे से कंधा मिलाकर चलने की बात के यही मायने हैं कि आगे भी केंद्र मोहन यादव के साथ काम करने को तैयार है। हालांकि राजनीति में कब क्या हो जाए कहा नहीं जा सकता, लेकिन इतना तो तय है कि गृह मंत्री के बयान से बेचारे विघ्नसंतोषियों के चेहरे फिलहाल जरूर उतर गए हैं।



