उत्तराखंड में अंतिम मतदाता सूची में 9.31 लाख वोटर बाहर होने के बाद विशेष अभियान शुरू किया गया है। यह कदम मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के तहत लिया गया है, जिससे नाम कटे या छूटे हुए मतदाताओं को दोबारा नामांकन का अवसर मिलेगा।
उत्तराखंड में अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन और कुल मतदाता संख्या
उत्तराखंड के मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. बीवीआरसी पुरुषोत्तम ने 3 अक्टूबर 2026 को अंतिम मतदाता सूची जारी की। इस सूची में कुल 71,58,949 मतदाता शामिल हैं, जिसमें 37,37,701 पुरुष, 34,21,036 महिलाएं और 212 थर्ड जेंडर मतदाता हैं।
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यह सूची विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया के बाद तैयार हुई है, जिसका उद्देश्य मतदाता सूची को अधिक सटीक और विश्वसनीय बनाना था।

मतदाता सूची से 9.31 लाख मतदाताओं का नाम बाहर होना
विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान कुल 9,31,685 मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से काटे गए। यह कटौती पुराने और डुप्लीकेट नामों को हटाने की प्रक्रिया का हिस्सा है। इस वजह से कुल मतदाताओं की संख्या में कमी आई है।
इस प्रक्रिया से पहले 8 जून 2026 को राज्य में कुल 79,60,762 मतदाता दर्ज थे, जो अंतिम सूची में घटकर 71,58,949 रह गए हैं। इससे मतदाता संख्या में कुल 8,01,813 की शुद्ध कमी हुई है।
विशेष गहन पुनरीक्षण से नए मतदाताओं का जुड़ाव
अंतिम मतदाता सूची में दावे-आपत्तियों के निस्तारण के बाद कुल 1,29,872 नए मतदाता जोड़े गए हैं। इनमें से 72,656 युवा मतदाता 18 से 19 वर्ष की आयु के हैं, जो पहली बार वोट डालने के पात्र हैं।
यह जुड़ाव चुनावी प्रक्रिया को अधिक व्यापक बनाने और युवा मतदाताओं को शामिल करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

विशेष अभियान के तहत छूटे हुए मतदाताओं को मौका
जिन मतदाताओं के नाम अंतिम मतदाता सूची से कट गए हैं या जो सूची में शामिल नहीं हो पाए हैं, उनके लिए निर्वाचन विभाग ने विशेष अभियान शुरू किया है।
इस अभियान के अंतर्गत प्रभावित लोग फॉर्म-6 भरकर दोबारा अपनी नामांकन प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं। यह अभियान मतदाता सूची को और अधिक समावेशी बनाने के लिए आवश्यक है।
अभियान की समयावधि और प्रक्रिया
यह विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान भारत निर्वाचन आयोग के निर्देश पर 1 जुलाई 2026 की अर्हता तिथि के आधार पर 8 जून 2026 से शुरू हुआ था। 14 जुलाई 2026 को ड्राफ्ट सूची जारी की गई।
आपत्तियों के निस्तारण के बाद 3 अक्टूबर 2026 को अंतिम सूची प्रकाशित की गई। इस व्यापक प्रक्रिया से मतदाता सूची की विश्वसनीयता और पारदर्शिता बढ़ी है।
मतदाता सूची पुनरीक्षण का आम आदमी पर प्रभाव
मतदाता सूची का सटीक और अपडेटेड होना लोकतांत्रिक प्रक्रिया के लिए अनिवार्य है। इससे चुनावों में धोखाधड़ी की संभावना कम होती है और सही मतदाता ही मतदान कर पाते हैं।
विशेष अभियान के जरिए छूटे मतदाताओं को जोड़ा जाना चुनावी भागीदारी को बढ़ावा देगा और सभी नागरिकों को मतदान का अधिकार सुनिश्चित करेगा।



