इंदौर। भागीरथपुरा में गंदे पानी से मौतों की रिपोर्ट सामने आने के बाद कांग्रेस अब आग में हाथ सेंकने का काम कर रही है। यह आग कांग्रेस ने नहीं लगाई, बल्कि खुद ब खुद लगी है। जनता को तो उम्मीद थी कि विपक्ष इस मुद्दे पर सरकार की ईंट से ईंट बजा देगी, लेकिन विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार सिर्फ बयानबाजी में ही जुटे हुए हैं।
अगस्त में ही हो गया था खुलासा
प्राप्त जानकारी के अनुसार अगस्त माह में सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति सुशील कुमार गुप्ता की अध्यक्षता वाले एक सदस्यीय जांच आयोग ने करीब 600 पन्नों की अंतिम रिपोर्ट मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ में पेश की। उस समय रिपोर्ट सीलबंद थी और उसे सार्वजनिक नहीं किया गया था, लेकिन इस रिपोर्ट के मुख्य-मुख्य बिन्दु मीडिया में आ गए थे। इसमें साफ तौर पर कहा गया था सिर्फ अधिकारियों को ही टारगेट किया गया है। इसके बाद भी कांग्रेस चुप बैठी रही।
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पूरी रिपोर्ट आने के बाद भी सिर्फ बयान
28 सितंबर 2026 को हाईकोर्ट ने रिपोर्ट को सार्वजनिक करने का रास्ता साफ करते हुए उसे अदालत की आधिकारिक वेबसाइट पर अपलोड करने के निर्देश दिए। 30 सितंबर 2026 को रिपोर्ट हाईकोर्ट की वेबसाइट पर अपलोड होकर सार्वजनिक हो गई। पूरी रिपोर्ट अधिकृत तौर पर सामने आने के बाद भी नेता प्रतिपक्ष सिंघार प्रेस कॉन्फ्रेंस लेकर सरकार पर निशाना साध रहे हैं।
जनता के हित में कांग्रेस ने क्या किया?
यहां सबसे बड़ा सवाल यह है कि कांग्रेस ने रिपोर्ट सार्वजनिक होने के बाद भी जनता के हित में क्या किया? सत्ता पक्ष से मायूस जनता को कांग्रेस से कम से कम इतनी उम्मीद अभी भी है कि वह उनके लिए सरकार की नींद हराम कर देगी। विडंबना यह कि कांग्रेस ने ऐसा कुछ नहीं किया। अगर सचमुच कांग्रेस जनता कि हितैषी होती और सरकार के खिलाफ जाना चाहती तो कोई भी नेता भागीरथपुरा क्यों नहीं गया? सिंघारजी को भी यह प्रेस कॉन्फ्रेंस भागीरथपुरा में ही करनी चाहिए थी। ऐसा कर वह जनता में भरोसा पैदा कर सकते थे कि कांग्रेस उनके साथ खड़ी है।
कितनी मदद कर पाएगा मीडिया
सिंघारजी को भी यह पता है कि इस मामले में मीडिया उनकी मदद कितनी कर पाएगा। जब अखबार के पन्नों से राहुल गांधी का बालाघाट दौरा गायब हो सकता है तो नेता प्रतिपक्ष के बयानों के क्या मायने? क्या कांग्रेस भाजपा सरकार को कटघरे में खड़े करने का एक अच्छा मौका नहीं गंवा रही है?
राहुल गांधी ने भी इसे गंभीर माना था
भागीरथपुरा गंदा पानी कांड को लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने भी काफी गंभीर माना था। इसीलिए वे 17 जनवरी 2026 को इंदौर के भागीरथपुरा पहुंचे थे। उन्होंने दूषित पानी से प्रभावित परिवारों और मृतकों के परिजनों से मुलाकात की तथा अस्पताल में भर्ती पीड़ितों से भी मिले। तब उन्होंने सरकार को बुरी तरह घेरा था। इसके बावजूद एमपी के नेता प्रतिपक्ष और अन्य कांग्रेस नेता इसकी गंभीरता को समझ नहीं पाए।
मिलीजुली कुस्ती के लगते हैं आरोप
कांग्रेस के इसी रवैये के कारण उसके नेताओं पर मिलीजुली कुस्ती खेलने के आरोप लगते रहे हैं। इस कांड की गंभीरता तब और बढ़ जाती है जब यह नगरीय प्रशासन विभाग के मंत्री कैलाश विजयवर्गीय की विधानसभा में हुआ है। यह वही विभाग है, जिस पर शहरों में जनता को शुद्ध पीने का पानी पहुंचाने की जिम्मेदारी है। ऐसे मुद्दे को भी अगर कांग्रेस नहीं भुना पाए तो ईश्वर ही उसका मालिक है।



