राजनीतिक शुचिता के लिए पहचाने वाली भाजपा के नेताओं के आचरण इन दिनों चिन्ता में डाल रहे हैं। चिन्तामणि मालवीय जैसे कई नेता समय-समय पर अपने व्यवहार से भाजपा को परेशानी में डालते रहे हैं, लेकिन ताज्जुब इस बात का है कि पार्टी आलाकमान को इसकी परवाह नहीं है।
इन दिनों रतलाम जिले की आलोट विधानसभा सीट से भाजपा विधायक चिंतामणि मालवीय खूब चर्चा में हैं। इसका कारण उनके द्वारा महिला कांग्रेस अध्यक्ष रीना बोरासी को 10 करोड़ का मानहानि का नोटिस भेजना है।
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जरा यह भी जान लेते हैं कि चिंतामणि ने आखिर ऐसा क्यों किया? दरअसल रीना बोरासी ने पिछले दिनों चिंतामणि मालवीय पर यौन शोषण और अवैध कब्जे के गंभीर आरोप लगाए थे।
अब अगर मामले को गंभीरता से देखा जाए तो रीना बोरासी की बात हवा में नहीं थी। रीना बोरासी ने कुछ दिनों पहले राज्यपाल मंगुभाई पटेल से मुलाकात की थी। इसके बाद उन्होंने मीडिया में बयान देते हुए मालवीय पर गंभीर आरोप लगाए थे।
चिन्तामणि मालवीय को ये आरोप बर्दाश्त नहीं हुए और उन्होंने इन आरोपों को निराधार बताते हुए 10 करोड़ रुपए के मानहानि का नोटिस जारी कर दिया। मालवीय का कहना है कि रीना बोरासी ने बिना किसी ठोस प्रमाण और चुनावी रंजिश के चलते यह राजनीतिक द्वेष वाले आरोप लगाए हैं।
खैर, आरोपों के बुनियाद हैं या नहीं, यह तो जांच-पड़ताल का मामला है। सबसे बड़ी चिन्ता इस बात की है कि लोकसभा से लेकर सड़क तक पूरे देश में नारी सम्मान की बात करने वाली भाजपा के किसी विधायक पर अगर ऐसे आरोप लगे हैं, पार्टी क्या कर रही है?
इतने बड़े आरोप लगने के बाद भी यह खबर कहीं नहीं आई कि भाजपा प्रदेश अध्यक्ष या पार्टी के किसी वरिष्ठ पदाधिकारी ने इस मामले में चिन्तामणि की खैर-खबर ली हो।
अगर आप इन आरोपों की जांच नहीं करते और अपने चिन्तामणि जैसे विधायकों पर कोई एक्शन नहीं लेते, तो आपको नारी शक्ति बिल लाकर और नारी शक्ति वंदन अभियान चलाकर जनता के सामने नौटंकी करने की जरूरत नहीं।
अरे, भाजपा वालों कुछ तो चिन्ता कर लो…नारी का मामला है…



