👉 यह भी पढ़ें:
- इंदौर निगम के सहायक राजस्व अधिकारी के यहां लोकायुक्त का छापा, आय से 1.73 करोड़ अधिक मिली संपत्ति
- इंदौर नगर निगम के 103.42 करोड़ के फर्जी बिल घोटाले में ईडी ने पेश किया 20 हजार पन्नों का चालान, ठेकेदार समेत 32 आरोपी
- बिजली कंपनी इंजीनियर के यहां लोकायुक्त का छापा, आय से 258% ज्यादा प्रॉपर्टी, बेटे, बहू, दामाद के नाम करोड़ों की फैक्ट्री
- Sikkim Tunnel Rescue: सिक्किम की निर्माणाधीन सुरंग में बड़ा हादसा, 8 मजदूरों की मौत की पुष्टि; 27 लोगों के फंसे होने की आशंका, रेस्क्यू ऑपरेशन जारी
- Oman Gulf Attack: 3 भारतीय नाविकों की मौत पर भड़का देश, Shashi Tharoor ने अमेरिका से पूछा- ‘क्या भारतीय अब आसान निशाना बन गए हैं?’
- Bengal Politics Shocker: TMC विधायक मदन मित्रा पर ED का बड़ा एक्शन! भर्ती घोटाले में सोना-नकदी रिश्वत का खेल? 7 ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी
0:00 left
कोल्ड्रिफ कफ सिरप से बच्चों की मौत: ईडी ने श्रीसन फार्मा और तमिलनाडु ड्रग कंट्रोल अधिकारियों के ठिकानों पर छापेमारी
कोल्ड्रिफ कफ सिरप से कई बच्चों की मौत के मामले में प्रवर्तन निदेशालय ने बड़ी कार्रवाई की है। ईडी ने श्रीसन फार्मा के चेन्नई स्थित ठिकानों और तमिलनाडु ड्रग कंट्रोल विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के आवासों पर धन शोधन निवारण अधिनियम के तहत छापेमारी की है।
सूत्रों के अनुसार, छापेमारी उन ठिकानों पर की गई है जो तमिलनाडु औषधि नियंत्रण कार्यालय और उससे जुड़े अधिकारियों से संबंधित हैं।

ग़ौरतलब है कि मध्य प्रदेश और राजस्थान में हाल के दिनों में बच्चों की मौत कोल्ड्रिफ कफ सिरप पीने के बाद हुई थी। जांच में पाया गया कि इन मौतों का कारण किडनी फेल होना था।
यह सिरप श्रीसन फार्मा कंपनी द्वारा निर्मित है। कंपनी के मालिक 73 वर्षीय जी. रंगनाथन को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है।
केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन की जांच में कंपनी और तमिलनाडु खाद्य एवं औषधि प्रशासन दोनों के द्वारा मानकों के गंभीर उल्लंघन का खुलासा हुआ। जांच में पाया गया कि श्रीसन फार्मा ने खराब बुनियादी ढांचे और सुरक्षा चूकों के बावजूद एक दशक से अधिक समय तक उत्पादन जारी रखा।
कांचीपुरम स्थित श्रीसन फार्मा के संयंत्र में राष्ट्रीय औषधि सुरक्षा नियमों के कई उल्लंघन पाए गए। जांच के बाद यह भी पता चला कि सिरप में डाइएथिलीन ग्लाइकॉल की घातक मात्रा मौजूद थी — यह वही रसायन है जो एंटीफ्रीज में इस्तेमाल होता है और कई राज्यों में प्रतिबंधित है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यही रसायन बच्चों की किडनी फेल होने और मौत की मुख्य वजह बना। यह सिरप बच्चों को हल्की खांसी और बुखार के इलाज के लिए दिया गया था।



