ओमान की खाड़ी में एक कमर्शियल जहाज पर हुए हमले में तीन भारतीय नाविकों की मौत के बाद भारत में गुस्से की लहर दौड़ गई है। आम नागरिकों से लेकर राजनीतिक नेताओं तक, हर कोई इस घटना को लेकर सवाल उठा रहा है। इसी बीच कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने अमेरिका के आधिकारिक रुख पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कई गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
थरूर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए कहा कि अमेरिकी बयान पढ़कर उन्हें गहरा झटका लगा। उन्होंने आरोप लगाया कि बयान में भारतीय नागरिकों की मौत पर न तो संवेदना व्यक्त की गई और न ही किसी तरह का अफसोस जताया गया।
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उन्होंने लिखा, “कोई देश खुद को भारत का दोस्त और रणनीतिक साझेदार बताता है, लेकिन बेगुनाह भारतीयों की मौत पर एक शब्द तक नहीं कहता। यह बेहद असंवेदनशील रवैया है।”
शशि थरूर ने यह भी सवाल उठाया कि यदि जहाज ने कथित रूप से किसी नियम का उल्लंघन किया था, तो क्या उसे रोकने के लिए ऐसे तरीके नहीं अपनाए जा सकते थे जिनसे लोगों की जान न जाती? उन्होंने पूछा कि क्या जहाज के इंजन या स्टीयरिंग सिस्टम को निष्क्रिय कर उसे रोका नहीं जा सकता था, बजाय सीधे मिसाइल हमला करने के?
उन्होंने चिंता जताते हुए कहा कि दुनिया के अधिकांश मर्चेंट जहाजों पर बड़ी संख्या में भारतीय नाविक काम करते हैं। ऐसे में क्या अब अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों पर काम कर रहे भारतीय क्रू सदस्य भी खतरे में हैं?
दरअसल, 8 जून को ओमान की खाड़ी और Strait of Hormuz के पास एक कमर्शियल तेल टैंकर पर अमेरिकी नौसैनिक कार्रवाई हुई थी, जिसमें तीन भारतीय नाविकों की मौत हो गई। रिपोर्ट्स के मुताबिक जहाज पर कुल 24 भारतीय नाविक सवार थे, जिनमें से 21 को सुरक्षित बचा लिया गया।
अमेरिका ने बाद में सफाई देते हुए कहा कि संबंधित जहाज ने नौसैनिक प्रतिबंधों का उल्लंघन किया था। हालांकि इस स्पष्टीकरण के बाद भी विवाद थमता नजर नहीं आ रहा है।
बताया जा रहा है कि MT Setbal नामक टैंकर को पहले निशाना बनाया गया था, जबकि 11 जून 2026 को MT Jalveer नाम के एक अन्य जहाज पर भी दो मिसाइलें दागी गई थीं। इन घटनाओं ने वैश्विक समुद्री सुरक्षा और भारतीय नाविकों की सुरक्षा को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।
भारत और अमेरिका के बीच मजबूत रणनीतिक साझेदारी के बावजूद इस घटना ने दोनों देशों के संबंधों को लेकर बहस छेड़ दी है। अब निगाहें इस बात पर हैं कि भारत सरकार इस मामले में क्या रुख अपनाती है और क्या पीड़ित परिवारों को न्याय मिल पाएगा।
सबसे बड़ा सवाल
अगर किसी जहाज ने नियमों का उल्लंघन किया था, तो क्या उसे रोकने के लिए घातक सैन्य कार्रवाई ही एकमात्र विकल्प था? और क्या भारतीय नाविकों की सुरक्षा के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नए नियम बनाए जाने चाहिए?
आपकी क्या राय है? क्या अमेरिका को इस घटना पर सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए और जवाबदेही तय करनी चाहिए? अपनी राय कमेंट में जरूर बताएं।



