Bengal Politics Shocker: TMC विधायक मदन मित्रा पर ED का बड़ा एक्शन! भर्ती घोटाले में सोना-नकदी रिश्वत का खेल? 7 ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी

Date:

AI Audio Companion Ready to stream full article
0:00
0:00 left

पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर बड़ा भूचाल आ गया है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने कथित नगर पालिका भर्ती घोटाले (Municipality Recruitment Scam) से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के वरिष्ठ नेता, विधायक और पूर्व मंत्री मदन मित्रा के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए उनके और उनसे जुड़े कुल 7 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की है।

ईडी के मुताबिक, विभिन्न नगर पालिकाओं में नौकरी दिलाने के नाम पर कथित तौर पर अयोग्य उम्मीदवारों की नियुक्तियां कराई गईं और इसके बदले भारी मात्रा में नकदी और सोने के रूप में रिश्वत ली गई। जांच एजेंसी का दावा है कि बिचौलियों के जरिए यह पूरा नेटवर्क संचालित किया गया और कामरहाटी नगर पालिका समेत कई निकायों में अवैध नियुक्तियों का खेल चला।

सूत्रों के अनुसार, जांच एजेंसियां यह भी पता लगा रही हैं कि मदन मित्रा का नाम लगभग 125 संदिग्ध नियुक्तियों से जुड़े मामले में सामने क्यों आ रहा है। ईडी फिलहाल वित्तीय लेन-देन, दस्तावेजों और डिजिटल रिकॉर्ड की गहन जांच कर रही है।

इस बहुचर्चित मामले की शुरुआत तब हुई थी, जब स्कूल भर्ती घोटाले की जांच के दौरान ईडी ने टीएमसी से जुड़े प्रमोटर अयान शील के ठिकानों पर छापेमारी की थी। उसी दौरान मिले दस्तावेजों और कथित सबूतों ने नगरपालिका भर्ती घोटाले की जांच का रास्ता खोल दिया। बाद में कलकत्ता हाई कोर्ट के निर्देश पर सीबीआई ने भी ‘कैश फॉर जॉब’ मामले में समानांतर जांच शुरू की।

दिलचस्प बात यह है कि ईडी की कार्रवाई से ठीक एक दिन पहले मदन मित्रा ने कामरहाटी नगर पालिका के सभी टीएमसी पार्षदों से इस्तीफा देने की अपील की थी और पार्टी कार्यकर्ताओं से विरोध प्रदर्शन करने का आह्वान किया था। यह घटनाक्रम तब सामने आया जब नगर पालिका चेयरमैन गोपाल साहा ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया।

सोशल मीडिया पर जारी अपने बयान में मदन मित्रा ने आरोप लगाया कि गोपाल साहा को लगातार अपमान और उपेक्षा का सामना करना पड़ा, जिसके चलते उन्हें इस्तीफा देने के लिए मजबूर होना पड़ा। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक संस्थाओं और विपक्षी नेताओं को निशाना बनाने की व्यापक साजिश का हिस्सा बताया।

अब बंगाल की राजनीति में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या यह भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कार्रवाई है या फिर राजनीतिक दबाव बढ़ाने की रणनीति? आने वाले दिनों में इस मामले से और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।

 आपकी क्या राय है? क्या ED और CBI की कार्रवाई भ्रष्टाचार के खिलाफ जरूरी कदम है, या विपक्षी नेताओं को निशाना बनाने की कोशिश? कमेंट में अपनी राय जरूर बताएं।

Abhilash Shukla (Editor)
Abhilash Shukla (Editor)http://www.hbtvnews.com
Abhilash Shukla is an experienced editor with over 28 years in journalism. He is known for delivering balanced, impactful, and credible news coverage.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Share post:

Subscribe

spot_imgspot_img

Popular

Recent News
Related

Taslima Nasreen : 20 साल बाद कोलकाता आएंगी तसलीमा नसरीन, बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद हो रही है वापसी

बांग्लादेशी निर्वासित लेखिका तसलीमा नसरीन लगभग 20  साल बाद कोलकाता वापस आ रही हैं। 1 अगस्त को वह कोलकाता के रवींद्र सदन में आयोजित एक कार्यक्रम में शामिल होंगी। यह जानकारी उन्होंने सोशल मीडिया पर दी है।