👉 यह भी पढ़ें:
- मनुस्मृति पर राहुल गांधी के बयान से सियासत गरम, निशिकांत दुबे का पलटवार
- PM Modi के वीडियो डिलीट करने के मामले में निशिकांत दुबे की चेतावनी-तीन दिन में माफी मांगें जुकरबर्ग
- PM Modi के वीडियो डिलीट करने के मामले में संसदीय समिति ने दिखाई सख्ती, निशिकांत दुबे ने कहा-मार्क जुकरबर्ग मांगे माफी
- BJP MP Nishikant Dubey का दावा-राहुल गांधी को नेता प्रतिपक्ष पद से हटाने के लिए जल्द पेश होगा प्रस्ताव
- बीजू पटनायक पर विवादित बयान देकर फंसे भाजपा सांसद निशिकांत दुबे, माफी मांगते हुए कहा-मैं तो नेहरू पर बोल रहा था
- भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने साधा कांग्रेस पर निशाना, कहा-इमरजेंसी के कारण जनता ने गांधी परिवार के अहंकार को जमीन पर ला दिया
0:00 left
नई दिल्ली। अपने बयानों से हमेशा विवादों में रहने वाले भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने एक और दावे ने नया विवाद खड़ा कर दिया है। उन्होंने कहा कि 1984 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने ब्रिटेन के साथ मिलकर स्वर्ण मंदिर पर हमला किया था। दुबे ने कहा कि कांग्रेस के लिए सिख समुदाय सिर्फ खिलौना है। सिखों के कत्लेआम को छुपाने के लिए 2004 में मनमोहन सिंह को कठपुतली प्रधानमंत्री बनाया गया था।
दुबे ने एक्स पर गृह सचिव की एक कथित रिपोर्ट का हवाला देते हुए लिखा, 1984 में स्वर्ण मंदिर पर हमला ब्रिटेन के साथ मिलकर किया गया। ब्रिटिश सेना के अधिकारी अमृतसर में मौजूद थे। कांग्रेस के लिए सिख समुदाय सिर्फ खिलौना है। उन्होंने यह भी दावा किया कि 1960 में करतारपुर साहिब पाकिस्तान को देने का समझौता सरदार स्वर्ण सिंह ने किया, 1984 में सिखों के कत्लेआम को छुपाने के लिए वरिष्ठ कांग्रेसी नेताओं को बचाया गया और 2004 में मनमोहन सिंह को कठपुतली प्रधानमंत्री बनाया गया।
भाजपा ने गृह सचिव की एक कथित गोपनीय चिट्ठी साझा की, जिसमें दावा किया गया है कि भारतीय अधिकारियों ने स्वर्ण मंदिर से सिख चरमपंथियों को हटाने के लिए ब्रिटेन से सलाह मांगी थी। ये खत विदेश एवं राष्ट्रमंडल कार्यालय के निजी सचिव ब्रायन फॉल ने तत्कालीन गृह सचिव के निजी सचिव ह्यूग टेलर को लिखा था। इस खत के जरिए निशिकांत ने अपने दावे को पुख्ता किया है। इसमें लिखा है, विदेश सचिव ने इस अनुरोध पर सहमति दी और ब्रिटिश प्रधानमंत्री की मंजूरी से एक शिरोमणि अकाली दल के अधिकारी ने भारत का दौरा किया। इस अधिकारी ने एक योजना बनाई, जिसे इंदिरा गांधी ने मंजूरी दी।



