केंद्र सरकार 20 जुलाई से शुरू होने वाले संसद सत्र में राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ के अपमान को लेकर बड़ा कदम उठाने की तैयारी में है। सरकार राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम (संशोधन) विधेयक लोकसभा में पेश कर सकती है, जिसके तहत राष्ट्रीय गीत का अपमान करने या उसके गायन में बाधा डालने पर कानूनी कार्रवाई का प्रावधान किया जाएगा।
सरकारी सूत्रों के अनुसार, इस संशोधन विधेयक को केंद्रीय मंत्रिमंडल पहले ही मंजूरी दे चुका है। यदि यह विधेयक लोकसभा और राज्यसभा दोनों से पारित होकर कानून का रूप लेता है, तो ‘वंदे मातरम्’ का अपमान भी राष्ट्रीय ध्वज, राष्ट्रगान और संविधान जैसे राष्ट्रीय प्रतीकों के अपमान की श्रेणी में शामिल हो जाएगा।
👉 यह भी पढ़ें:
- वंदे मातरम् पर सियासी संग्राम: कांग्रेस के दो अंतरे वाले फैसले पर भाजपा ने पास किया प्रस्ताव
- वंदे मातरम विवाद पर मायावती का बड़ा बयान: ‘राजनीति छोड़कर बेरोजगारी, युवाओं और बाढ़ पर ध्यान दें’
- वंदे मातरम पर सियासी संग्राम: कांग्रेस-बीजेपी आमने-सामने, यूपी से केरल तक बढ़ा विवाद
- वंदे मातरम् विवाद : अमित शाह ने कहा-तुष्टिकरण की राजनीति कर रही कांग्रेस
- CWC की बैठक में वंदे मातरम् पर मंथन, दो ही छंद गाएगी कांग्रेस
- वंदे मातरम् विवाद पर भड़के खरगे, कहा-पहले गांधी-नेहरू-पटेल और अटल पर केस करो
यह पहल गृह मंत्रालय द्वारा हाल ही में जारी दिशानिर्देशों के बाद सामने आई है। इन दिशानिर्देशों में कहा गया है कि जिन आधिकारिक कार्यक्रमों में राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ बजाया जाता है, वहां ‘वंदे मातरम्’ का गायन या वादन भी अनिवार्य किया जाएगा।
प्रस्तावित कानून का उद्देश्य राष्ट्रीय सम्मान से जुड़े प्रतीकों के प्रति सम्मान सुनिश्चित करना और उनके अपमान या व्यवधान को दंडनीय अपराध की श्रेणी में लाना बताया जा रहा है। हालांकि, विधेयक के अंतिम प्रावधान संसद में पेश होने और पारित होने की प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होंगे।
अब सभी की निगाहें 20 जुलाई से शुरू होने वाले संसद सत्र पर टिकी हैं, जहां इस महत्वपूर्ण विधेयक पर चर्चा और आगे की कार्रवाई होने की संभावना है।
आपकी राय क्या है?
क्या आप राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ के अपमान को दंडनीय अपराध बनाने वाले प्रस्तावित कानून का समर्थन करते हैं? आपके अनुसार इससे राष्ट्रीय सम्मान की भावना मजबूत होगी या इस पर व्यापक चर्चा की जरूरत है? अपनी राय कमेंट में जरूर साझा करें।



