पणजी । ‘वंदे मातरम्’ को लेकर कांग्रेस और बीजेपी के बीच शुरू हुआ विवाद अब सीधे राजनीतिक विरासत और राष्ट्रवाद की बहस में बदलता दिखाई दे रहा है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने मंगलवार को बीजेपी के आरोपों पर पलटवार करते हुए कहा कि अगर कांग्रेस द्वारा गाए गए ‘वंदे मातरम्’ के संस्करण को लेकर अपराध बनता है, तो पहले महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू, सरदार वल्लभभाई पटेल और अटल बिहारी वाजपेयी के खिलाफ भी मामला दर्ज किया जाना चाहिए। खरगे का तर्क था कि कांग्रेस ने वही परंपरा जारी रखी है, जो लंबे समय से चली आ रही है।
स्वतंत्रता दिवस के दिन से शुरू है विवाद
मामले की शुरुआत स्वतंत्रता दिवस के मौके पर दिल्ली स्थित कांग्रेस मुख्यालय में हुए कार्यक्रम से हुई। वहां ‘वंदे मातरम्’ के गायन के दौरान कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी और राहुल गांधी समेत पार्टी के वरिष्ठ नेता मौजूद थे। कार्यक्रम के वीडियो को लेकर बीजेपी ने आरोप लगाया कि कांग्रेस नेतृत्व ने राष्ट्रगीत के प्रति उचित सम्मान नहीं दिखाया। खास तौर पर सोनिया गांधी के कुछ इशारों और खरगे के साथ उनकी बातचीत को बीजेपी ने मुद्दा बनाया। कांग्रेस ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि सोनिया गांधी का इशारा ‘वंदे मातरम्’ रोकने के लिए नहीं था, बल्कि वह खरगे के लिए कुर्सी की व्यवस्था को लेकर बात कर रही थीं। इस सफाई के बावजूद विवाद थमा नहीं और बीजेपी ने कांग्रेस पर राष्ट्रगीत के कथित अपमान का आरोप लगाते हुए राजनीतिक हमला तेज कर दिया।
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खरगे ने लिया गांधी-नेहरू-पटेल और अटल का नाम
खरगे का पूरा तर्क ऐतिहासिक परंपरा को लेकर था। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने ‘वंदे मातरम्’ का वही रूप गाया है, जिसे महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू और सरदार पटेल जैसे नेताओं के दौर में गाया जाता रहा। उन्होंने अटल बिहारी वाजपेयी का भी उल्लेख करते हुए कहा कि बीजेपी के नेतृत्व वाली सरकार के दौर में भी यही परंपरा जारी रही। खरगे ने चुनौती भरे अंदाज में कहा कि अगर इस तरीके से ‘वंदे मातरम्’ गाना अपराध है, तो गांधी, नेहरू, पटेल और अटल बिहारी वाजपेयी पर भी कार्रवाई की जानी चाहिए। उनका कहना था कि केवल आज की कांग्रेस को निशाना बनाकर इस परंपरा को अपराध बताना तर्कसंगत नहीं है।
मोदी-शाह जो कहेंगे, वही देश का नियम नहीं होगा
खरगे ने अपने बयान में केंद्र सरकार और बीजेपी पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि देश में केवल इसलिए कोई चीज नियम नहीं बन जाती क्योंकि मौजूदा सरकार या उसके नेता ऐसा कहते हैं। उनके मुताबिक, सरकारें आती-जाती रहती हैं, लेकिन राष्ट्रीय प्रतीकों से जुड़ी परंपराओं को राजनीतिक सुविधा के आधार पर नहीं बदला जाना चाहिए। कांग्रेस अध्यक्ष ने यह भी दावा किया कि ‘वंदे मातरम्’ को लेकर कांग्रेस की एक पुरानी परंपरा रही है और पार्टी करीब 90 साल से उसी परंपरा का पालन कर रही है। उनका तर्क था कि आज सत्ता में कोई दूसरा दल है, इसलिए वह पुरानी परंपरा अपने आप गलत नहीं हो जाती।
पीएम मोदी पर भी साधा निशाना
खरगे ने इस विवाद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भी जिक्र किया। उन्होंने दावा किया कि मोदी ने गुजरात के मुख्यमंत्री रहते हुए लंबे समय तक इसी तरह ‘वंदे मातरम्’ गाया है। खरगे ने सवाल उठाया कि अगर यही तरीका अपराध है तो फिर उन वर्षों के दौरान भी यही सवाल उठना चाहिए था। इस बयान के जरिए कांग्रेस अध्यक्ष ने बीजेपी के मौजूदा आरोप को उसके पुराने राजनीतिक संदर्भ से जोड़ने की कोशिश की। उनका संदेश साफ था कि ‘वंदे मातरम्’ को लेकर कांग्रेस को राष्ट्रविरोधी या राष्ट्रगीत का अनादर करने वाली पार्टी के तौर पर पेश करना ऐतिहासिक संदर्भों को नजरअंदाज करना है।
गोवा में कांग्रेस ने दो अंतरे ही गाए
विवाद के बीच सोमवार को गोवा में कांग्रेस के एक कार्यक्रम में ‘वंदे मातरम्’ के दो अंतरे गाए गए। कार्यक्रम में मल्लिकार्जुन खरगे भी मौजूद थे। बीजेपी की आलोचना के बीच कांग्रेस ने इस आयोजन को एक तरह से अपने पक्ष की राजनीतिक प्रतिक्रिया के तौर पर पेश किया। यहीं से खरगे ने बीजेपी और आरएसएस पर भी हमला बोला। उन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन में योगदान को लेकर बीजेपी और आरएसएस से सवाल किए और कांग्रेस की स्वतंत्रता संग्राम की भूमिका को सामने रखा।
भाजपा का क्या है आरोप
भाजपा का आरोप है कि कांग्रेस नेतृत्व ने ‘वंदे मातरम्’ जैसे राष्ट्रीय महत्व के गीत के प्रति अपेक्षित सम्मान नहीं दिखाया। स्वतंत्रता दिवस के कार्यक्रम के वीडियो सामने आने के बाद भाजपा नेताओं ने कांग्रेस नेतृत्व से सफाई और माफी की मांग की। इसी विवाद के बीच कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं के खिलाफ शिकायतों की खबरें भी सामने आई हैं। भाजपा इस मुद्दे को केवल एक कार्यक्रम के प्रोटोकॉल का मामला नहीं, बल्कि राष्ट्रवाद और राष्ट्रीय प्रतीकों के सम्मान से जोड़कर देख रही है। वहीं कांग्रेस का कहना है कि भाजपा राजनीतिक विवाद खड़ा करके उसके स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास और राष्ट्रीय गीत से जुड़ी पुरानी परंपरा पर सवाल उठा रही है।



