सुप्रीम कोर्ट में तीन नए जजों की नियुक्ति से जुड़ी खबर में, केंद्र सरकार ने जस्टिस सुनीता अग्रवाल, देवेंद्र उपाध्याय और अपरेश सिंह को सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश के रूप में नियुक्त करने की अधिसूचना जारी की है। यह नियुक्ति 5 अक्टूबर 2026 को राष्ट्रपति की मंजूरी के साथ हुई है, जो सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण कदम है।
सुप्रीम कोर्ट में नई नियुक्तियों का औपचारिक ऐलान
केंद्र सरकार ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में तीन नए न्यायाधीशों की नियुक्ति की अधिसूचना जारी की। इस नियुक्ति की सिफारिश सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने 28 सितंबर 2026 को की थी, जिसके बाद राष्ट्रपति ने इसे मंजूरी दी। जस्टिस सुनीता अग्रवाल, जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस अपरेश कुमार सिंह अब शीर्ष अदालत में कार्यभार संभालेंगे।
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इन नियुक्तियों के बाद सुप्रीम कोर्ट में कुल जजों की संख्या 37 हो जाएगी, जिससे एक पद खाली रह जाएगा।

जस्टिस सुनीता अग्रवाल का न्यायिक सफर
जस्टिस सुनीता अग्रवाल गुजरात हाईकोर्ट की मुख्य न्यायाधीश हैं। वे मूल रूप से इलाहाबाद हाईकोर्ट की जज रह चुकी हैं। जुलाई 2023 से गुजरात हाईकोर्ट की मुख्य न्यायाधीश के रूप में कार्यरत सुनीता अग्रवाल अप्रैल 2031 तक सुप्रीम कोर्ट में सेवाएं देंगी।
इनकी नियुक्ति से सुप्रीम कोर्ट में महिला न्यायाधीशों की संख्या तीन हो जाएगी, जो महिला न्यायपालिका प्रतिनिधित्व के लिहाज से महत्वपूर्ण है।
जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय की भूमिका
जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय भी इलाहाबाद हाईकोर्ट से न्यायिक अनुभव लेकर आए हैं। जुलाई 2023 में उन्हें बॉम्बे हाईकोर्ट का मुख्य न्यायाधीश बनाया गया था, उसके बाद जनवरी 2025 में दिल्ली हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के रूप में तैनात हुए।
उनकी नियुक्ति सुप्रीम कोर्ट की कार्यक्षमता में इज़ाफा करेगी और दिल्ली जैसे संवेदनशील क्षेत्र के अनुभव से न्यायालय को लाभ होगा।

जस्टिस अपरेश कुमार सिंह का न्यायिक अनुभव
जस्टिस अपरेश कुमार सिंह ने झारखंड हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश और त्रिपुरा हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के रूप में भी काम किया है। जुलाई 2025 से वे तेलंगाना हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश हैं।
उनकी नियुक्ति से सुप्रीम कोर्ट के विविध अनुभव और न्यायिक क्षितिज का विस्तार होगा।
सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या और क्षमता
सुप्रीम कोर्ट की स्वीकृत क्षमता वर्तमान में 38 न्यायाधीशों की है। वर्तमान में 34 जज कार्यरत थे। तीन नए नियुक्त जजों के बाद कुल संख्या बढ़कर 37 हो जाएगी, जिससे केवल एक पद ही खाली रहेगा।
यह नियुक्ति सुप्रीम कोर्ट में न्यायिक मामलों के निपटान को तेज करने के उद्देश्य से की गई है, जिससे लंबित मामलों में कमी आएगी।
आगे की प्रक्रिया और शपथ ग्रहण
राष्ट्रपति की मंजूरी के पश्चात तीनों न्यायाधीशों के शपथ ग्रहण की तारीखों का निर्धारण किया जाएगा। इसके बाद वे सुप्रीम कोर्ट के पूर्ण सदस्यों के रूप में कार्यभार संभालेंगे।
इस नियुक्ति से न्यायपालिका की कार्यक्षमता में सुधार की उम्मीद जताई जा रही है, जो आम जनता के न्यायिक अनुभव को बेहतर बनाएगा।



