बहुजन समाज पार्टी (BSP) प्रमुख मायावती ने ‘वंदे मातरम’ के गायन को लेकर चल रही राजनीतिक बहस पर सवाल उठाते हुए कहा है कि देश में इस मुद्दे को लेकर अनावश्यक राजनीति नहीं होनी चाहिए। उनका कहना है कि वंदे मातरम पूरा गाया जाए, शुरुआती दो छंद गाए जाएं या इसे न गाया जाए—इसे राजनीतिक विवाद का विषय बनाना उचित नहीं है।
मायावती ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कहा कि संसद द्वारा वंदे मातरम को लेकर हाल में पारित कानून कोई पहली ऐसी घटना नहीं है। सत्ता परिवर्तन के साथ केंद्र और राज्यों में सरकारें पहले की सरकारों द्वारा बनाए गए कानूनों में अपने राजनीतिक हितों के अनुसार बदलाव करती रही हैं।
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दरअसल, संसद ने Prevention of Insults to National Honour (Amendment) Bill, 2026 पारित किया था, जिसके बाद राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने पर वंदे मातरम को राष्ट्रीय गान के समान कानूनी संरक्षण मिला है।

मायावती ने कहा कि मौजूदा समय में सरकारों और सभी राजनीतिक दलों को ऐसे मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए, जिनका सीधा संबंध देश और आम जनता से है। उन्होंने बेरोजगार युवा, छात्र, Gen Z और स्कूली बच्चों की समस्याओं को प्राथमिकता देने की बात कही।
इसके साथ ही उन्होंने देश के कई हिस्सों में आई भयंकर बाढ़ और उससे हो रही जान-माल की भारी क्षति पर भी चिंता जताई। उनका कहना है कि ऐसे कई गंभीर मुद्दे हैं, जिन पर केंद्र और राज्य सरकारों के साथ-साथ सभी राजनीतिक दलों को मिलकर गंभीरता से काम करना चाहिए।
मायावती का संदेश साफ है—राष्ट्रभक्ति महत्वपूर्ण है, लेकिन जनता की रोजमर्रा की समस्याओं पर राजनीति से ऊपर उठकर काम करना भी उतना ही जरूरी है।
आपकी राय क्या है? क्या ‘वंदे मातरम’ जैसे राष्ट्रीय मुद्दों पर राजनीतिक बहस जरूरी है, या सरकारों को बेरोजगारी, युवाओं, छात्रों और बाढ़ जैसी समस्याओं पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए? अपनी राय कमेंट में जरूर बताएं।



