अमेरिका और ईरान के बीच हुए 14 सूत्रीय मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (MOU) को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। ईरानी संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा समिति के प्रमुख इब्राहिम अजीजी ने अमेरिका पर समझौते की पहली शर्त का पालन न करने का आरोप लगाते हुए कहा कि इससे साफ है कि वॉशिंगटन में ईरानी जनता का भरोसा जीतने की इच्छाशक्ति नहीं है।
अजीजी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर चेतावनी भरे अंदाज में लिखा, “अगर हालात ऐसे ही बने रहे तो अमेरिका को इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ेगी। इसकी शुरुआत MOU के वादों के उल्लंघन पर स्मार्ट और उचित जवाब से होगी। हम अपने इरादों पर अडिग हैं।”
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दूसरी ओर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी कड़ा रुख अपनाते हुए ट्रुथ सोशल पर कहा, “हम किसी मजबूरी में बातचीत नहीं कर रहे थे, बल्कि ईरान बातचीत के लिए आया था। उनका खेल खत्म हो चुका है। हम 60 दिनों की समयसीमा पूरी होने देंगे। उन्हें कोई पैसा नहीं मिलेगा, दस सेंट भी नहीं।”

इस बीच, अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के स्विट्जरलैंड दौरे में देरी के कारण अमेरिका और ईरान के बीच प्रस्तावित नई सीधी वार्ता भी टाल दी गई है, जिससे दोनों देशों के रिश्तों में तनाव और बढ़ गया है।
गौरतलब है कि हाल ही में अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम को आगे बढ़ाने के लिए 14 बिंदुओं वाले MOU पर हस्ताक्षर हुए थे। समझौते के तहत ईरान ने कभी परमाणु हथियार न बनाने का वादा किया है, जबकि ईरान के पुनर्निर्माण और आर्थिक विकास के लिए 300 अरब डॉलर का फंड बनाने की बात कही गई है। हालांकि इस फंड में अमेरिका का योगदान अनिवार्य नहीं है।
फिलहाल अमेरिका ने समझौते के अनुरूप ईरानी बंदरगाहों पर लगाई गई नौसैनिक नाकाबंदी हटा दी है, लेकिन दोनों देशों के बीच बढ़ती बयानबाजी इस समझौते के भविष्य पर सवाल खड़े कर रही है।
क्या आपको लगता है कि अमेरिका और ईरान के बीच यह समझौता टिक पाएगा, या फिर दोनों देशों के बीच एक नया टकराव शुरू होने वाला है? अपनी राय कमेंट में जरूर बताएं।



